नागपुर में जारी हुई नई गाइडलाइन अब रात 8 बजे तक खुली रहेगी दुकानें,और 11 बजे तक रेस्टोरेंट

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नागपुर ने अपनी बैठक में जिले में विभिन्न गतिविधियों के लिए और अधिक छूट की अनुमति देने का निर्णय लिया

वर्तमान में कोरोना पॉजिटिविटी रेट तथा ऑक्सीजन बेड कंजप्शन के प्रतिशत को देखते हुए नागपुर जिला अभी भी स्तर 1 के मानदंडों को पूरा कर रहा है।

रवींद्र ठाकरे, कलेक्टर तथा जिला मजिस्ट्रेट, नागपुर एतद् द्वारा निम्नलिखित गतिविधियों में छूट की अनुमति देते हुए आदेश जारी करते हैं।

उक्त आदेश पूरे नागपुर जिले में 21 जून, 2021 को सुबह 7.00 बजे से 28 जून 2021 को सुबह 07.00 बजे तक लागू रहेगा।

जरूरी वस्तुओं, गैर जरूरी वस्तुओं से संबंधित दुकानों एवम प्रतिष्ठानों को रात 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है-

मॉल/थिएटर (मल्टीप्लेक्स के साथ-साथ सिंगल स्क्रीन)/नाट्यगृह आदि को 50 पर्सेंट के साथ रात 8 बजे तक काम करने की परमिशन दी गई है। केपेसिटी

  • 50% के साथ रेस्तरां का समय 11 बजे तक बढ़ा दिया गया है –
    सार्वजनिक स्थान / खुले मैदान / पैदल / साइकिल चलाने की अनुमति सुबह 5 बजे से 9 बजे और शाम 5 बजे से 9 बजे
    तक – निजी कार्यालयों तथा कार्यालयों की उपस्थिति सहित- सरकारी कार्यालय और निजी यदि अनुमति हो तो) खेल (जिमनैजशियम सहित) को नियमित रूप से कार्य करने की अनुमति है –
    व्यायामशाला सहित खेलों को सुबह 5 बजे से 9 बजे तक और शाम 5 बजे से 9 बजे तक (इनडोर और आउटडोर दोनों) काम करने की अनुमति है।
  • सभा (सामाजिक/सांस्कृतिक/मनोरंजन) की अनुमति 50% क्षमता या 100 व्यक्तियों में से जो भी कम हो – 50% क्षमता या 100 व्यक्तियों के
    साथ विवाह की अनुमति, जो भी कम हो –
    अधिकतम 50 लोगों के लिए अंतिम संस्कार की अनुमति –
    पुस्तकालय, पढ़ने के कमरे 8 तक की अनुमति है। दोपहर
    1 बजे तक शॉपिंग मॉल में रेस्तरां और बार को कुल क्षमता के 50% के साथ
    अनुमति दी गई – गोरेवाड़ा जंगल सफारी को रात 8 बजे तक परमिशन दी गई –
    कोचिंग कक्षाएं नियमित रूप से संचालित होंगी

इस बीच स्कूल, कॉलेज तथा अन्य शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक स्थल, स्वीमिंग पूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे

कोरोना इफैक्ट :छोटे बच्चों के लिए जल्द ही आ सकती है वैक्सीन, नागपुर में हुई 50 बच्चों की स्क्रीनिंग, कल से शुरू होगा ट्रायल

कोरोना महामारी की तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है ऐसे में बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए कोविड का टीका काफी अहम होगा। इसी के तहत भारत बायोटेक के कोवैक्सीन वैक्सीन ने अब छोटे बच्चों पर प्रारंभिक परीक्षण शुरू कर दिया है। 

क्लिनिकल परीक्षण नागपुर, महाराष्ट्र सहित देश भर में चार स्थानों पर होगा। बच्चों पर वैक्सीन का प्रारंभिक परीक्षण आज नागपुर में शुरू हो गया है।नागपुर के मेडिट्रेना अस्पताल में आज 12 से 18 साल के बच्चों के ब्लड सैंपल्स लिए जा चुके है। फिटनेस सैंपल्स के परीक्षण के लिए आज 50 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। रिपोर्ट मिलने के बाद वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो जाएगा। ट्रायल तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों का परीक्षण किया जाएगा, दूसरे चरण में 7 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों का परीक्षण किया जाएगा और तीसरे चरण में 2 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों का परीक्षण किया जाएगा।

नैदानिक ​​परीक्षण में बच्चों के लिए रक्त परीक्षण, उसके बाद बच्चों के लिए नैदानिक ​​परीक्षण शामिल होगा। इसका क्लीनिकल ट्रायल नागपुर में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वसंत खलाटकर की देखरेख में होगा। प्रारंभ में, एक स्टडी के लिए सैंपल लिया जाएगा, और अच्छे परिणाम वाले बच्चों को 28 दिनों के बाद दूसरी खुराक दी जाएगी।

यह ट्रायल देश भर में चार स्थानों पर 208 दिनों तक चलेगा। कुल 525 बच्चों का क्लिनिकल परीक्षण किया जाएगा और उन्हें तीन आयु समूहों में विभाजित किया जाएगा। क्लिनिकल ट्रायल 2 से 6 साल के 175 बच्चों, 6 से 12 साल के 175 बच्चों और 12 से 18 साल के 175 बच्चों पर किया जाएगा।

शिशुओं पर टीके का प्रारंभिक परीक्षण शुरू हो गया है और रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद जल्द ही शिशुओं के लिए कोविड का टीका उपलब्ध होगा। अगर छोटे बच्चों के लिए कोविड का टीका उपलब्ध हो जाए तो इससे कोरोना का खतरा कम होगा और संक्रमण फैलने की संभावना भी कम होगी

बच्चों को टीकाकरण के लाभ

बच्चों के टीकाकरण के बाद कम हो सकेगा कोरोना का खतरा

कोरोना फैलने की संभावना कम रहेगी

इसके साथ ही संपर्क में आने वालों की जान बचाई जा सकती है

कोरोना: प्रसारवेग मंदावला; रविवारी 13 मृत्यु तर 357 नवे रूग्ण

नागपूर: जिल्ह्यात कोरोनाची तीव्रता सतत घटत आहे. परिस्थिति सामान्य आहे. रविवारी जिल्ह्यात 357 नवे पॉजिटिव रुग्ण आढळले, त्यापैकी 220 शहरी तर 132 ग्रामीण भागातील आहेत. 5 जिल्ह्याबाहेरील आहेत. नवे पॉझिटिव्ह मिळून, जिल्ह्यातील पॉजिटिव रुग्णांची संख्या 4.74 लाखांपेक्षा जास्त झाली आहे, परंतु आतापर्यंत ते 4.59 लाख ठिक झाले आहेत. दररोजच्या संक्रमितांची संख्या कमी झाली आहे, यामुळे आरोग्य विभाग व प्रशासन दिलासा अनुभवत आहे.

रविवार रोजी जिल्ह्यात एकूण 13 मृत्यु झाले यात 5 शहरी आणि 3 ग्रामीण भागातील आहेत तर 5 जिल्ह्याबाहेरील आहेत. ते मिळून 8,892 बळी ठरले आहेत. 5,237 शहरी आणि 2,287 ग्रामीण भागातले आहेत. दैनंदिन तपासणीमध्ये पॉजिटिव असलेल्या लोकांची टक्केवारी 2.5 टक्के होती. एप्रिलमधे ही टक्केवारी 30 टक्क्यांहून अधिक होती. गोष्टी अनियंत्रित होत्या. लोकांस रुग्णालयांत बेड, ऑक्सिजन शोधणे अक्षम होते.

96.70% रिकवरी दर: कोरोना च्या नवीन संक्रमणांची संख्या कमी आणि दैनंदिन स्वस्थ लोकांची संख्या आता वाढती आहे. रविवारी जेथे 357 संक्रमित आढळून आले, त्याहून जवळजवळ 3 पट 1,041 बरे झाले. ज्यामुळे रिकवरी दर आता 96.70 टक्के पोहोचला आहे. हे अत्यंत उत्साहवर्धक आहे. कोरोना
अनियंत्रित असताना, हाच दर 73 टक्के पर्यंत आला होता. सुमारे 100 मृत्यू दररोज होत होते 7-8 हजार पॉजिटिव आढळत होते. रविवारी विविध प्रयोगशाळेतून 14,037 स्वॅब चाचणी अहवालापैकी 357 पॉजिटिव आले.

हॉस्पिटलचे ओझे कमी झाले: कोव्हिड हॉस्पिटलचे ओझे आता खूप कमी झाले आहे आणि बेड सहजपणे मिळताहेत. जिल्ह्यात रविवारी 6,781 सक्रिय प्रकरणांची माहिती देण्यात आली. 4,073 शहर आणि 2,708 ग्रामीण भागाचे आहेत. यात 2,273 रूग्णांचा विविध रुग्णालये आणि कोव्हीड केअर सेंटरमध्ये उपचार सुरू आहे. तर 4,508 होम क्वारंटाइन्स आहेत. जरी कोरोनाची तीव्रता जिल्ह्यात कमी झाली आहे, परंतु धोका अजून कायम आहे. प्रशासन आणि डॉक्टर अजूनही वारंवार अपील करताहेत की कोव्हीड -19 च्या प्रोटोकॉलचे अनुसरण करा. सोशल डिस्टंस आणि मास्क अनिवार्य आहेत. त्यात हलगर्दी केल्यास, शहरासह जिल्ह्यात पुन्हा कोरोना लाट वाईट परिस्थिती आणू शकते.

शहर में कोरोना मामलों में नियंत्रण , पिछले 23 दिनों में डेढ़ लाख से अधिक पेशेंट्स की हुई रिकवरी

नागपुर: शहर में फरवरी 2021 से कोरोना की दूसरी लहर आ गई थी। फिर मार्च-अप्रैल में हर तरफ कोरोना का आतंक मच गया था।सिर्फ एक ही दिन में कुल 113 मौतें हुईं।उसी दिन, 8,000 संक्रमण के मामले पाए गए। मेयो, मेडिकल, एम्स एवम अन्य सरकारी तथा निजी अस्पतालों के साथ-साथ कोविड केयर सेंटर में भी बेड उपलब्ध नहीं थे। नतीजतन, कुछ पीड़ितों ने तो बेड के इंतजार में ही दम तोड़ दिया।यह भी हुआ कि बेड की कमी के कारण एक व्यक्ति की एम्बुलेंस में ही मृत्यु हो गई।

अब कोरोना की लहर धीरे धीरे थम रही है। पिछले 23 दिनों में जिले में एवरेज 18,079 टेस्ट किए गए तथा 2,750 व्यक्ति संक्रमित पाए गए। इसी दौरान एक दिन में 5,420 व्यक्तियों ने सफलतापूर्वक कोरोना को मात दी।हाल फिलहाल कोरोना की स्थिति अब कहीं नियंत्रण में है। रविवार को किए गए 18,016 परीक्षणों में से 1,043 संक्रमित पाए गए, जिनमें शहरी क्षेत्रों में सिर्फ 300 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 732 थे।

वर्तमान में 4 लाख 48 हजार 357 लोग कोरोनामुक्त हो चुके हैं इसके साथ ही एक्टिव केसेस में पीड़ितों की संख्या अब शहरी क्षेत्रों में 7,312 एवम ग्रामीण क्षेत्रों में 6,622 है।

कोरोना रिपोर्ट : 1 से 23 मई के बीच कोरोना संक्रमण स्थिति

इन 23 दिन में डेढ़ लाख से ज्यादा मरीज कोरोना पर नियंत्रण

नागपुर शहर 305123 34842 713 72607

ग्रामीण क्षेत्र 110707 28158 413 52057

जिले के बाहर 272 272 272 

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को खतरा,नागपुर के मेडिट्रिना हॉस्पिटल को मिली वैक्सीन ट्रायल की अनुमति

नागपुर: बढ़ते कोरोना संक्रमण और कोरोना की तीसरी लहर का खतरे भांपते हुए जल्द ही बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल नागपुर में किया जाएगा।नागपुर के मेडिट्रिना हॉस्पिटल को क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति मिल गई है।इसके मुताबिक ये ट्रायल तीन कैटेगरी में होंगे। हर ग्रुप में 25 बच्चे होंगे।जिनकी उम्र 17 साल से कम की होगी

18 तारीख को परमिशन मिल गई एवम हॉस्पिटल को एक ऑफिशियल लेटर मिल गया है।हॉस्पिटल कमेटी अब क्लीनिकल ट्रायल की तैयारियों पर डिस्कस करेगी। उसके बाद जैसे ही समिति निर्णय करेगी, 2 से 18 के बीच के तीन ग्रुप में से प्रत्येक में 25 बच्चों को शामिल किया जाएगा। समिति 2 से 6, 6 से 12 एवम 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों का अच्छे स्वास्थ्य वालों का चयन करेगी।

किंतु वास्तविक नैदानिक ​​परीक्षण शुरू होने में कम से कम एक माह का वक्त लगेगा।पलतेवार ने कहा मेडिट्रिना हॉस्पिटल ने पहले कोवैक्सीन का परीक्षण किया है। 

नागपुर के डॉ. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वसंत खडतकर के मार्गदर्शन में आनंद राठी, डॉ आशीष ताजने नैदानिक ​​परीक्षण इनकी निगरानी में पांच सदस्यीय टीम द्वारा की जाएगी।

क्लीनिकल ट्रायल को परमिशन मिलने के बाद भारत बायोटेक द्वारा वैक्सीन की डिमांड पूरी की जाएगी।वैक्सीन कैप्सूल मिलने के बाद हॉस्पिटल को क्लिनिकल ट्रायल की सूचना दी जाएगी। वैक्सीनेशन ट्रायल में भाग लेने के इच्छुक लोगों का प्रोसेस के थ्रू रजिस्ट्रेशन किया जाएगा एवम उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।उसके पश्चात यह ट्रायल कंपनी के प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी सहमति से किए जाएंगे।

अब नागपुर में ब्लैक फंगस मचा रहा आतंक,10 पीढ़ितों के जबड़ों की हुई सर्जरी

नागपुर: अब तक तो कोरोना ने जनता का परेशान किया हुआ था लेकिन अब ये नई बीमारी आ गई जिसे ब्लैक फंगस भी कहते हैं।पोस्ट-कोविड फंगल इन्फेक्शन(म्यूकोर माइकोसिस) के सिम्टम्स वाले मरीजों की संख्या दिनो दिन बढ़ती जा रही है। सिर्फ सरकारी चिकित्सा और अस्पताल नागपुर में 49 पेशेंट ब्लैक फंगस से पीड़ित है। इसमें से 19 ने यहां मैक्सिलोफेशियल सर्जरी डिपार्टमेंट में जबड़े की सर्जरी करवाई है। उनमें से 10 के जबड़े की सर्जरी हुई है।

हालांकि,स्पेशलिस्ट का कहना है कि शुरुआती निदान के साथ, पेशेंट पूरी तरह से ठीक हो जाता है।कोरोना संक्रमण के बाद कमजोर इम्यून सिस्टम पर फंगस का बहुत असर पड़ रहा है। राजकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के मैक्सिलोफेशियल डिपार्टमेंट में फंगल इनफेक्टिव पेशेंट के लिए लगभग 49 लोगों का उपचार किया जा चुका है।

अप्रैल महीने से अभी तक 19 लोगों के जबड़े निकाले जा चुके हैं। उनमें से नौ ने पहले चरण में अपने जबड़े की सर्जरी की एवम पूरी तरह से ठीक हो गए। दूसरे चरण में फंगस के घुसने के बाद 10 लोगों के ऊपरी एवम निचले जबड़े की सर्जरी की गई। पहली लहर में कोरोना पेशेंट्स में रेमेडिविर या स्टेरॉयड का उपयोग कम किया गया था।जिसके परिणामस्वरूप उस समय म्यूकोरिया के पेशेंट्स की संख्या कम थी।

गवर्नमेंट डेंटल हॉस्पिटल में मिला एक फंगल पेशेंट ठीक होकर घर जा रहा है। कुछ पेशेंट्स में विशेष रूप से, इन्फेक्शन फेफड़ों में फैल गया है एवम आगे के उपचार के लिए सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीवीटीएस डिपार्टमेंट में भेजा गया है।एक पेशेंट के तो मस्तिष्क पर फंगस ने अटैक कर दिया है ।उन्हें सुपर स्पेशलिटी के मनोरोग वार्ड में रेफर कर दिया गया है, जैसे के बताया जा रहा है।

हालांकि फंगस सांस एवम त्वचा के जरिए बॉडी में प्रवेश करता है, लेकिन कोरोना के दौरान इलाज के दौरान वेंटिलेटर की सफाई न हो तो यह सीधे बॉडी में प्रवेश कर जाता है। इससे मसूड़ों में सूजन आ जाती है।पेशेंट को जबड़े की की असहनीय समस्या हो जाती है।किसी में तेज सिरदर्द होता है, या दांत दर्द असहनीय पीड़ा होती है।

राहत भरी खबर: पिछले 80 दिनों के बाद कोरोना मामले एक दिन में 1000 से कम ,मृत्यु दर भी कम

पिछले वर्ष जिले में अगस्त, सितंबर 2020 में कोरोना वायरस की पहली लहर में कोरोना का प्रकोप काफी बड़ गया था ।हालांकि इसके बाद स्थिति फिर से सामान्य हो गई। लेकिन फरवरी 2021 के मध्य से जिले में कोरोना की दूसरी लहर आ गई।उसके बाद जिले में हर दिन पीड़ितों के साथ कोरोना ने मौत का मंजर दिखाया। और स्थिति बहुत भयानक हो गई।

रिकॉर्ड देखें तो फरवरी के मध्य से अप्रैल के अंत तक नागपुर शहर एवम ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण की दर 32 फीसदी तक पहुंच गई थी।

जिले में एक ही दिन में साढ़े आठ हजार संक्रमित एवम 113 मौतें दर्ज की गईं। लेकिन अब राहत भरी खबर यह है की दूसरी लहर का प्रकोप थोड़ा कम हो गया है। मरने वालों की संख्या भी कम हो गई है।

जिले में 81 दिन बाद सोमवार (17 तारीख) को रोजाना कोवीड पेशेंट्स की संख्या में एक हजार से भी कम मामले सामने आए हैं।पिछले 24 घंटे में 971 नए कोरोना मामले मिले एवम 30 लोगों की मौत हुई। (नागपुर में एक हजार कोरोना मरीजों के भीतर 80 दिन बाद)

कोरोना का जानलेवा कहर कुछ हद तक कम हुआ। 27 फरवरी, 2021 को जिले में 13,027 टेस्ट किए गए तथा 984 कोरोना मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद जिले में कोरोना ने कहर बरपाया था। जिले में अब तक 8,580 कोरोना पीड़ितों की मौत हो चुकी है।इसमें शहरी इलाकों में 5,137 तथा ग्रामीण इलाकों में 2,184 मौतें शामिल हैं।उसके साथ ही जिले के बाहर से आए 1,259 लोगों को नागपुर रेफर करने के बाद मौत हो गई।नतीजतन, उनकी मृत्यु नागपुर में दर्ज की गई थी।

अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जिले में मरीजों की संख्या में कमी आई है। पीड़ितों की दर में भी थोड़ी कमी हुई है। 

सोमवार को शहरी इलाकों में 9 हजार 818 एवम ग्रामीण इलाकों में 3443 टेस्ट किए गए। इनमें से केवल 4.87 प्रतिशत या शहरी क्षेत्रों में 487 लोग और ग्रामीण क्षेत्रों में 13.77 प्रतिशत या 474 लोग प्रभावित पाए गए।

क्या आपने कोरोना वैक्सीन का दुसरा डोज ले लिया है या इंतजार है? जानिए वैक्सीनेशन सेंटर्स की डिटेल

नागपुर: नागपुर में कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर्स पर नागपुर के लोगों द्वारा कई वाक्य आपको सुनने मिलेंगे जैसे अरे वैक्सीन खत्म हो गई क्या ? फिर कब स्लॉट मिल सकता है आदि।सब लोग महीनों से चल रहे टीकाकरण केंद्रों पर टीकाकरण के लिए नजरें लगाकर बैठे है। पहला डोज लेने वाले नागरिक इस उलझन में हैं कि वैक्सीन का दूसरा डोज कहां से लें।
कई केंद्र वैक्सीन की कमी के कारण बंद हैं।यहां उन नागरिकों को प्राथमिकता दी जाती है जिनके पास ऑनलाइन अपॉइंटमेंट (वैक्सीन के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट) है। इससे कई नागरिकों को परेशानी भी हो रही है।
लेकिन अब आप चिंता मत करो। हम आपको आपके घर के पास के कुछ वैक्सीनेशन सेंटर्स के नाम बताएंगे। (दूसरी खुराक के लिए नागपुर में कोरोना टीकाकरण केंद्रों की सूची)
टीकाकरण के लिए जाते समय अपने साथ आधार कार्ड ले जाना न भूलें। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर टीकाकरण केंद्र पर भी जाएं। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेते समय यदि आपको स्लॉट नहीं मिलता है या आपको केंद्र का नाम नहीं दिखता है, तो केंद्र पर जाएं और पूछताछ करें। अपने साथ पानी की बोतल ले जाना न भूलें।
कोविशिल्ड वैक्सीन
लक्ष्मीनगर जोन
खामला आयुर्वेदिक
संत जगन्नाडे महाराज समाज भवन राजीव नगर
खेल परिसर बैडमिंटन हॉल, विवेकानंद नगर
समाज भवन गजानन नगर
गायत्री नगर स्केटिंग हॉल
महात्मा गांधी समाज भवन
सोनेगांव समाज भवन
म्युनिसिपल स्कूल जयताल
दादा दादी पार्क
गणेश मंदिर पुस्तकालय
सुर्वे नगर, एन.आई.टी. गार्डन सोसाइटी बिल्डिंग
सीआरपीएफ अस्पताल
धरमपेठ क्षेत्र
इंदिरा गांधी अस्पताल
केटी नगर यूपीएचसी
जगदीश नगर समाज भवन
दाभा म्युनिसिपल स्कूल
आयुर्वेदिक औषधालय
हनुमान नगर जोन
ईएसआईएस अस्पताल
नरसाला यूपीएचसी
आजमशाह स्कूल कॉर्पोरेशन
दुर्गा नगर स्कूल
जानकी नगर स्कूल
मालवी नगर स्कूल
मानेवाड़ा यूपीएचसी
धंतोली क्षेत्र
अलगाव अस्पताल
बाबुलखेड़ा डिस्पेंसरी
सनेगुरुजी स्कूल
गजानन मंदिर समाज भवन
आकर्षक मैदान नरेंद्र नगर
महात्मा फुले हिंदी स्कूल
भीम नगर, मराठी प्राइमरी हिंदी स्कूल, भीम नगर
लकड़गंज जोन
बाबुलबान आयुर्वेदिक औषधालय
पारदी नगर अस्पताल
पारदी कोंडवाना स्कूल
भारतवाड़ा स्कूल
मिनमाता
डिप्टी सिग्नल यूपीएचसी सेंटर
कलमाना प्राथमिक विद्यालय
काछविसा भवन, सतनामी नगर
संतराजीपुरा क्षेत्र
मेंहदीबाग यूपीएचसी
लालगंज आयुर्वेदिक औषधालय
सतरंजीपुरा हेल्थ पोस्ट
जगन्नाथ बुधवार प्राइमरी स्कूल
कुडनलाल गुप्ता नगर पालिका स्कूल
बिनकी महिला औषधालय
मुदलियार हॉल

आता कोव्हिड नियमांसह रहायला शिका: तज्ञांचा सल्ला

नागपूर: कोरोना संक्रमणाची भितीदायक परिस्थिती आणि कोरोना व्हायरसमधील सतत बदल लक्षात घेऊन, चालू कालावधी मोठा कठीण ठरतो आहे. लवकरच यातून मुक्त होण्याची कुठलीच आशा तुर्त तरि दिसत नाही. इकडे लॉकडाउनही कायम टिकू शकत नाही. म्हणून, कोव्हीडच्या नियमांचे अनुसरण करत जगणे शिकावे लागणार आहे.

सामाजिक अंतर, हँड सेनेटायझर आणि मास्क आता जीवनाचा अविभाज्य भाग बनवाना लागणार असा सल्ला तज्ञांनी दिला आहे. मनपा व आयएमए संयुक्त विद्यमाने फेसबुक लाईव्ह कार्यक्रम आयोजित होतो, ज्यामध्ये डॉ. निलेश अग्रवाल आणि डॉ. नितीन शिंदे यांनी लोकांचे प्रश्नांचीही उत्तरे दिली.

द्वितीय लाटेचा कहर: ‘कोरोनाबरोबर कसे राहावे’, डॉ. निलेश अग्रवाल यांनी सांगितले की, कोरेना आता कुणाला होणार नाही हे सांगने कठीण आहे. दुसरी लाट सर्व मानवजातीवर भयानक ठरली आहे. लाखो लोक पॉजिटिव आहेत. हे संक्रमण टाळता येऊ शकते. आता प्रत्येकाला त्यांचे जीवनशैली बदलणे आवश्यक आहे. सोशल डिस्टेंसिंगनंतर, हँड सॅनिटाइजर मास्किंगची सवय असणे आवश्यक आहे. संसर्ग टाळण्यासाठी मास्क हा सर्वात चांगला उपाय आहे. नेहमीच सर्व अनुसरण केले पाहिजे. जर कोणात लक्षणे दिसत असतील किंवा पॉजिटिव व्यक्तीशी संपर्कात आल्यास ताबडतोब टेस्ट केली पाहिजे. अशा प्रकारे जलद उपचार केले जाऊ शकतात.

संसर्ग टाळण्याचा हेतू: डॉ. शिंदे म्हणाले की जर कोरोना पॉजिटिव आला किंवा लक्षणे दिसतील तर विलगीकरण केले जावे. विलगीकरण म्हणजे कोरोना पॉजिटिव चा शिक्का नाही. परंतु जर संक्रमण झाले असेल तर इतरांना संसर्ग होऊ नये म्हणून हे जरूरी आहे. चाचणी अहवालापर्यंत विशेष काळजी घ्यावी. याशिवाय, क्वारंटाइन्सच्या मदतीसाठी कोणी असतं.

जर संपूर्ण परिवार पॉजिटिव आढळला तर त्यास कोणत्याही प्रकारची मदत केली जाऊ शकत नाही, असा गैरसमज काढून टाकला पाहिजे. येथे सर्व नियम पालन करून क्वारंटाईन व्यक्तीला मदत केली जाऊ शकते. आता दुस-या लाटे नंतर तिसऱ्या लाटेची शक्यता व्यक्त केली जात आहे. म्हणून लसीकरण शक्य तितक्या लवकर केले पाहिजे. हाच रामबाण उपाय असल्याचा सल्ला दिला.

11नंतरही नो-लॉकडाउन: बँका, पॅथोलॉजी आणि निदान केंद्रे दिवसभर गर्दीयुक्त

नागपूर: प्रशासनाने 11 नंतर सर्वबंद केले तेव्हापासूनच सकाळी रेशन, भाज्या, दुग्ध डेयरी दुकानांत गर्दि असते, त्याआधी ज्याला जेव्हा वेळ असेल तेव्हा जाऊन तो खरेदी करे. लॉकडाउनच्या काळानंतरही, काही दुकाने 12 पश्चात ही दुपारी बंद होत नाहीत, असं बर्याच भागात पाहिलं जात आहे.

मानेवाडा सिमेंट रोडवर, एका सरकारी राशन दुकानात, सकाळपासून लोकांची गर्दी आणि सर्व नियमांचे उल्लंघन होत आहे. सामाजिक अंतर पालन होत नाही आणि देखरेखसाठीही कोणी नाही. असेच जवळच्या एका बँकचं देखील आहे. ग्राहकांची गर्दी बँके बाहेरही तुंबलेली आढळते. इथेही सामाजिक अंतर पालन अनुसरण केले नाही.

नंदनवन रोडवर बॅकेसमोर गर्दी असते. वृद्ध त्यांची पेंशन काढण्यासाठी गर्दी करत आहेत. भाज्या विकत घेण्यासाठी बर्याच ठिकाणी गर्दी होत आहे. दुग्ध डेयरी वर तर मोठ्या प्रमाणात खरेदिदारांची झुंबड दिसून येते. असे दिसते की लोक पुन्हा बेपर्वा होत आहेत. आवश्यक सेवांव्यतिरिक्त, सर्व दुकाने बंद आहेत परंतु जे उघडतात त्यांना 11 पर्यतच परवानगी आहे. परंतु बर्याच भागात आणि वस्तिंत दुकाने दुपारपर्यंत उघडल्या जातात. अशा दुकानांवर कोणतीही कारवाई केली जात नाही.

दुपारीही वर्दळ: सकाळी 11 नंतर अत्यंत महत्त्वाच्या कामाने बाहेर पडायलाच अनुमति आहे परंतु गेल्या 4-5 दिवसांपासून दिसतेय की रस्त्यांवर वर्दळ वाढलीय. वाटेल तसा जो फिरत आहे. नियम असा आहे की जे लोक बाहेर पडतात ते आरटी-पीसीआर चाचणीत निगेटिव असले पाहिजे परंतु कोणतीही तपासणी केली जात नाही. काही चौकांत मोजक्या लोकांस थांबवून असे केले जायचे परंतु आता त्याचीही संख्या कमी झाली आहे. 11 वाजता, कठोर लॉकडाउनमुळे सर्व पूर्णपणे निर्जन व्हासला पाहिजे परंतु तसे दिसत नाही. प्रशासन व पालक मंत्र्यांचे अपिलचा असर कमी होऊ लागला आहे. नागरिक घरांमध्ये कंटाळले आहेत आणि जबरदस्तीने बाहेर पडताहेत. त्यांच्याकडे अनेक प्रकारचे कारणं आहेत आणि पोलिसांद्वारे थांबविल्यास बहुतेक वैद्यकीय कारणं असतात.

सर्वांचे आपले कारणं: काही लोक म्हणतात की कोरोना पासून जीवीतास धोका आहे, परंतु त्यांच्या स्वत:च्याही काही सिमा आहेत. लोक प्रशासनास सहकार्य करण्यास तयार आहेत आणि ते करताहेत, परंतु दुकाने बंदमुळे कमाई थांबली आहे. टेलर, बूटीक, सलून, चहा-नाश्ता, कपडे, होसियरी, बूट चप्पल, इतर वस्तू विकणार्या लहान हॉकर्स, काम थांबल्याने बेरोजगार होतायत. अशांना आता लॉकडाउन मानवत नाहीय, ज्यामुळे काही चहा विक्रेत्यांनी तर सकाळी सायकलवर केटली ठेवून चहा विकताहेत. नाश्ता त्याच प्रकारे विकला जात आहे. अनेक ठिकाणी भिंतींच्या मागे लपून खर्रा-सिगारेट देखील विकल्या जात आहेत. त्यांच्याकडे या शिवाय उपायही नाही. पुन्हा कारवाईची सतत भीती टांगती आहे.

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