मुंढे होते तो यह नौबत ना आती: सामान्य नागपूरकर

नागपुर: शहर में, दिन-प्रतिदिन कोरोना कहर बढ़ रहा है और नगरपालिका स्वास्थ्य प्रणाली की कमर टुट गई है। मरीजों को बेड नहीं मिल रहे, जरूद इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग हों रही है। ऐसी स्थिति में, तत्कालीन नगर आयुक्त मुंढे आज नागपुर में रहते, तो यह स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं जाती, और नागपुर सिटी नागपुर देश में एक मॉडल बन जाता। नागपुरकर ऐसी भावनाएं जता रहे हैं।

पिछले साल, मुंढे ने कोरोना स्थिति को अच्छी तरह संभाला। नगर निगम ने करोना मरीजों को ₹600 में मिलने वाला खाना ₹159 मे दिलवाया। इतना ही नहीं, राधास्वामी सत्संग न्यास से संपर्क कर रोगियों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया गया। उन्होंने शहर में कोरोना के लिए पांच अस्पतालों की शुरुआत की। 12 अलगाव केंद्र स्थापित किया गया। इसमें, लगभग 1300 रोगियों की व्यवस्था की, उन्होंने नागपुर के लोगों के संपर्क के लिए एक स्वतंत्र ऐप बनाया। वे हर दिन ऐप की जाँच करते रहे थे। आज, वह होते तो इतनी विशाल मरिज संख्या नहीं होती। पूर्व नगरसेवक वेदप्रकाश आर्य ने कहा कि उन्हें बीजेपी की लगातार राजनीति द्वारा स्थानांतरित कर दिया गया।

वह आज होते तो इतनी भयावह स्थिति नहीं होती। इसके विपरीत, नियंत्रण में देश में नागपुर मॉडल नाम दिया जाता। हमने उन्हे गवाया और अब हम पीड़ित हैं। गंभीर रोगियों को अस्पताल नहीं मिलता है। लोग घर पर बैठे हैं और घर पर इलाज कर रहे हैं। वह होते तो रेमडेसिव्हीर इंजेक्शन के काला बाजारों पर नकेल कसती वह इंजेक्शन आम लोगों के लिए उपलब्ध होता। आवश्यकता अनुसार कोरोना देखभाल केंद्र स्थापित किए जाते। उन्होंने मरीजों की लुटमार रोकने की कोशिश की थी। बढ़ते भुगतान, संबंध में निजी अस्पतालों को जगह दिखाई थी। अब नगर निगम ने अस्पताल में भुगतान पर नजर रखने के लिए कर्मचारी नियुक्त किए है। लेकिन वह कर्मचारी यह बता सकने में असमर्थ है कि उस अस्पताल में कितने बेड उपलब्ध है। यह भी करना होगा। बढते रोगियों की संख्या को देखते हुए मुंढे को नागपुर में लाने की जरूरत है। वही एक अकेला अधिकारी है जो सख्त अनुशासन ला सकता है और सब नियंत्रण में ला सकता है। सरकार को नागपुर में बदलाव के लिए राजनीति छोड़नी चाहिए। नागपुर की गंदी राजनीति ने और भाजपा नेताओं ने इस अनुशासित अधिकारि को टिकने नहीं दीया। इस तरह की प्रतिक्रिया कृ द दाभोलकर ने व्यक्त कि।

एक नागपूरकर पाटील का यु ट्युब व्हिडिओ तो बहुत जादा फॉर्वर्ड किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने स्थानीय नेताओं के और राज्य के संबंधी नेताओं के भी चेहरे उजागर कर दिए। किसे क्या करना चाहिए था, किसने क्या नहिं किया, और उस बदले वह क्या कर रहा था ऐसी सब बातें समय-समय पर टाइमलाइन के साथ बताई है जो सही में सभी के मन की कुंठा दर्शाती है

क्या विधायक निधि कर पाएगी कोरोना को कंट्रोल ?

नागपुर :दिन ब दिन बढ़ते कोविड मामलों को नियंत्रित में लाने के लिए एक सशक्त स्वास्थ्य प्रणाली की बड़ी आवश्यकता है। और इसी के चलते राज्य सरकार ने विधायक निधि से हर एक विधायक को 1 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया है। बिल्कुल इसी तरह का निर्णय पिछले वर्ष भी लिया गया था।हालांकि, कुछ ही विधायकों ने धन जुटाया। 

दूसरी लहर में, कोरोना का संक्रमण तीगुना हो गया है। आए दिन राज्य में हजारों कोविड पेशेंट्स आ रहे हैं और कई लोगों की मृत्यु भी हो रही हैं। इनमें से अधिकतर मृत्यु समय पर उपचार न मिलने के कारण हो रही हैं। इसी के चलते अब स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त करने के लिए सरकार द्वारा कोशिश की जा रही हैं। 

गवर्मेंट ने कोरोना के लिए विधायक निधि से हर एक विधायक को 1 करोड़ रुपये देने का फैसला लिया है ताकि स्थानीय तौर पर धन की कोई कमी न हो। नागपुर शहर में 16 विधायक हैं। इसलिए, पूरे साल में 16 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया जाएगा।

विशेष तौर पर, कोरोना की पहली लहर में, सरकार ने कोरोना के लिए एसेंशियल इक्विपमेंट खरीदने के लिए विधायक निधि से 20 लाख रुपये खर्च करने का निर्णय किया था।

वास्तव में, केवल चंद विधायकों ने धनराशि दी थी।कइयों ने बाद फंड नहीं दिया , बाद में यह पता चला कि कुछ विधायकों ने धन के अपने पत्र वापस ले लिए हैं। कुछ ग्रामीण विधायकों ने शहरी इलाके में मेयो, मेडिसिन के वित्तीय पोषण का प्रस्ताव दिया था।लेकिन क्योंकि धन निर्वाचन क्षेत्र के बाहर व्यय नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे कोरोना पर व्यय नहीं किया गया था। 

अब कोरोना की इस दूसरी भयावह लहर में, यह देखना बहुत जरूरी है कि इस वर्ष कितने विधायक फंड देते हैं।

पाचपावली रुग्णालयात ऑक्सिजन प्लांट: महापौर

नागपूर: मनपा माध्यमातून पाचपावली रुग्णालयात कोरोना रुग्णांसाठी 110 बेडांची व्यवस्था केली गेली आहे. या हॉस्पिटलमध्ये दाखल केलेल्या रुग्णांना ऑक्सिजन प्रदान करण्याच्या हेतूने 6 किलोलीटर प्लांट तयार असल्याचे महापौर तिवारी यांनी सांगितले. त्यांनी या प्रकारच्या व्यवस्थेत असे हे पहिलेच सरकारी रुग्णालय असल्याची माहिती दिली. रविवारी, महापौरांनी पाचपावली सुतिकागृहाचे निरीक्षण केले. डिप्टी कमिश्नर मिलिंद मेश्रम, विभागाचे आरोग्य अधिकारी डॉ. दीपंकर भिवगडे आणि इतर डॉक्टर उपस्थित होते.

आजपासून 70 बेड सेवेत: अधिकारी म्हणाले की काही बेडवर ऑक्सिजन व्यवस्था केली गेली आहे. अशा प्रकारे सोमवारी सार्वजनिक लोकांच्या सेवेसाठी 70 बेड उपलब्ध असतील. तथापि, रुग्णालयात लसीकरण केंद्र आहे ते हस्तांतरित केले जाईल, त्यानंतर रुग्णालयात 110 बेडांची व्यवस्था केली जाईल. अधिकार्यांनी सकारात्मक प्रयत्न केल्याबद्दल माहिती देखील दिली. अधिकाऱ्यांनी सांगितले की या क्षणी, हे लसिकरण केंद्र बाळाभाऊपेठच्या इमारतीमध्ये हस्तांतरित केलं जाईल. आयुक्त राधाकृष्णन बी चे मार्गदर्शनानुसार, मनपाचा संपूर्ण टीम हॉस्पिटल सुरू करण्यात गुंतली आहे.

तत्कालिक आयुक्तांनी तयार केली: कोरोना च्या पहिल्या टप्प्यात, पाचपावली सुतिकागृहात बेड वाढवण्याची व्यवस्था तत्कालिन आयुक्ताच्या कार्यकाळात केली गेली, परंतु कोरोना रुग्णांच्या संख्येत घट झाल्यानंतर, हे प्रकरण थंड बस्त्यात गेले. मूलभूत पायाभूत सुविधा पूर्णपणे तयार होते त्यायोगे दुसर्या टप्प्यात हे सुरू करण्यात कोणतीही समस्या आली नाही. केवळ 110 बेडांसाठी पुरेशी ऑक्सिजन येथे उपलब्ध असावी, ही समस्या आहे. आता ऑक्सिजनची उणीव पाहताना, ऑक्सिजन हॉस्पिटलमध्ये तयार केली जाईल. द्रव ऑक्सिजन गॅसमध्ये रुपांतर करून रुग्णांना द्रव ऑक्सिजन उपलब्ध केले जाईल. अॅशरफी फाऊंडेशनला स्वयंसेवक क्षेत्राला हॉस्पिटलची व्यवस्था देण्यात आली आहे. डॉक्टर आणि चिकित्सक देखील सेवेसाठी उपलब्ध असतील.

हाईकोर्ट का लेबोरेटरीज को आदेश , RTPCR रिपोर्ट पेशेंट्स को वाट्स एप पर उपलब्ध कराएं

नागपुर: कोविड -19 पेशेंट की बढ़ती संख्या के बावजूद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने एक बड़ी राहत देते हुए, गुरुवार को पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं को सख्त आदेश दिया है कि वे RTPCR टेस्ट की रिपोर्ट व्हाट्सएप पर भेजने के लिए व्यवस्था करें तथा साथ ही एक हार्ड कॉपी भी सौंपें।

वर्तमान में, विशेष रूप से सरकार द्वारा संचालित फैसिलिटीज पर टेस्ट देने वालों को अगले दिन अपने RTPCR रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत रूप से वहां जाने की जरूरत है,इसमें उन्हें स्वयं को और अन्य लोगों को संक्रमणों को बहुत बड़ा खतरा है। 

डॉ मुकेश चांडक काउंसिल राहिल मिर्ज़ा के माध्यम से एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए, खंडपीठ जस्टिस जका हक तथा अमित बोरकर ने प्रयोगशालाओं को 24 घंटे के भीतर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) वेबसाइट पर कोविड पॉजिटिव पेशेंट्स के रिपोर्ट को अपलोड करने का निर्देश दिया।

“जिनका टेस्ट नेगेटिव है ऐसे पेशेंट्स की रिपोर्ट भी सात दिनों में ICMR पोर्टल पर अपलोड हो जानी चाहिए। यह व्यवस्था अगले आदेशों तक जारी रहेगी।”

डॉ चांडक के अनुसार,उपचार में देरी इसलिए होती है क्योंकि प्रयोगशालाओं को प्रोसेस करने में समय लगता है और इसके साथ ही आईसीएमआर वेबसाइट पर अपलोड भी करना होता है, लेकिन कई बार सर्वर प्रक्रिया को धीमा कर देता है।

हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अनुरोध किया की वर्तमान में कोविड महामारी विकराल रूप ले चुकी है ,इस संकट से निपटने के लिए शहर में ऑक्सीजन-उत्पादक संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था।सरकार ने सूचित किया है कि उसने मुख्य रूप से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

कोरोना की इस जंग में राहत भरी खबर – 1200 बेड और 5000 ऑक्सीजन सिलेंडर मिलेंगे

नागपुर: उपचार ना मिलने के कारण शहर में कोविड पेशेंट्स को देखते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को नगर निगम तथा एम्स के डॉक्टर्स को 1200 अतिरिक्त बेड उपलब्ध कराने का आदेश दिया।  इसलिए,शहर में मेयो 100, मेडिकल कॉलेज ,हॉस्पिटल 100, एम्स हॉस्पिटल 500 तथा नगर निगम हॉस्पिटल्स में 100 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जा रही है।

गडकरी ने रोगियों को 5000 , ऑक्सीजन सिलेंडर तथा 2000 वेंटीलेटर भी प्रदान किए है।सिलिंडर तथा वेंटिलेटर जल्द ही नागपुर में उपलब्ध होंगे। 

मेयो मेडिकल सहित नगरपालिका को अपना ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इस संबंध में, गडकरी ने खुद पहल की एवम संयंत्र से संबंधित विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श  करके एक रास्ता खोजने की कोशिश की। 

फिलहाल आईनॉक्स 85% ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहा है। दरअसल नागपुर वर्तमान में इस कंपनी की आपूर्ति पर चल रहा है।

वर्धा की क्षीरसागर की कंपनी को भी रेमेडिविर इंजेक्शन के लिए दवा बनाने की परमिशन दे दी गई है और फैक्ट्री प्रोडक्शन कल से शुरू हो सकता है।

आज की बैठक में, नगर आयुक्त राधाकृष्णन बी, मेयर दयाशंकर तिवारी, विधायक। प्रवीण दटके, एम्स के डॉ मनीष श्रीगिरिवार, मैत्री परिवार के चंदू पेंडके उपस्थित थे। गडकरी ने स्टैंड लिया है कि हम जरूरी इंतजाम करेंगे, लेकिन मरीज को इलाज मिलना चाहिए।

वैक्सीन को लेकर आ सकता है केंद्र सरकार का बड़ा फैसला …अब घर घर जाकर वैक्सिनेशन हो सकता है।

आने वाले 3 महीने में बड़ी जनसंख्या को वैक्सीनेशन का लक्ष्य है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों की माने तो सरकार का लक्ष्य जल्द से जल्दी एक बड़ी आबादी को टीकाकरण करने का है इसी के लिए सरकार ने कुछ अन्य वैक्सिनो को भी जल्दी ही मंजूरी देने का इरादा किया है।
फिलहाल लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।स्पुतनिक वी को परमिशन के साथ ही अब घर घर जा कर लोगों को वैक्सीन लगाने की तैयारी हो रही है।
कई फार्मा कंपनियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने यह प्रस्ताव दिया है के , प्राइवेट कंपनी को वैक्सीन के साथ ही सरकारी वैक्सीन को भी घर जाकर लगाने की पेशकश की है।हालांकि इस कार्य के लिए लिए इन कंपनियों ने प्रति व्यक्ति 25 रुपए से लेकर 37 रुपए तक लेने का प्रस्ताव रखा है।
 लेकिन अभी किसी भी कंपनी को परमिशन नहीं मिली है।यदि इसकी शुरुआत होगी तो स्वास्थ्य मंत्रालय सरकारी नेटवर्क का उपयोग करेगा।

घरात उपचार घेणा-या रुग्णांना कसे मिळणार रेमेडेसिव्हिअर?

नागपूर: कोरोना रुग्णांचे उपचारात कामी येणारे रेमेडेसिव्हिअर वितरणाच्या व्यवस्था जिल्हा प्रशासनाने आपले हाती घेतली आहे. जिल्हाधिकारी द्वारे, कोव्हिड रुग्णालयांच्या बेडनुसार ते वितरित केले जाणार आहे. परंतु सर्व रुग्णांना याची गरज उसके व रुग्णालयातही इतके बेड उपलब्ध आहेत का? प्रश्न वाढत आहेत? ज्या रुग्णाचा सिटी स्कोअर 10 पेक्षा जास्त आहे अशांनाच हे इंजेक्शन लावले जाते, पण रुग्णांच्या नातेवाईकांना रुग्णालयातच हे उपलब्ध होत नाही. काही प्रसिद्ध खाजगी रुग्णालये देखील रुग्णाच्या कुटुंबीयांस रेमडेसिवीर ची स्वत: कडेच व्यवस्था कराया लावत आहेत, ज्यामुळे त्यांना ₹10 ते 15 हजार काळ्या बाजार दराने खरेदी करावे लागतात.

रुग्णालयात भर्ती रुग्णांनाच हे कसेबसे उपलब्ध होत आहेत, तर शेकडो गृहउपचार घेत असलेल्या रुग्णांना कसे मिळेल, ज्यांना रुग्णालयात बेड सापडले नाहीत. घरीच ऑक्सिजन सिलेंडरची व्यवस्था केली जात आहे. गरजू रुग्णांना घरात कसेबसे उपचार केल्या आहेत, अशांना रेमडेसिवीर कसे मिळेल याबद्दल जिल्हा प्रशासनाने लक्ष दिलेले नाही. पूर्वी हे इंजेक्शन प्रत्येक वैद्यकीय स्टोअरमध्ये उपलब्ध होती, ते सहजतेने मिळायचे. घरात उपचार घेणा-यांस गरज असता हे कसे मिळेल हे जिल्हा प्रशासनाने अद्याप स्पष्ट केलेले नाही. लोक इंजेक्शनसाठी भटकत आहेत आणि काळाबाजार करणारे दलाल फायदा घेत आहेत. काही खाजगी रुग्णालयात हा खेळ चालू आहे अशा तक्रारी येत आहेत.

चालू आहे काळा बाजार: केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी यांच्या प्रयत्नांमुळे नागपूर जिल्ह्यासाठी रेमेडेसिव्हरची पहिली खेप पोचली मात्र त्याची संख्या आवश्यकतेपेक्षा कमी आहे. काहींचे मते रुग्णालयात भरती नातेवाईकांसाठी डॉक्टरांनी त्यांना स्वत:च इंजेक्शनची व्यवस्था करण्यास सांगितले आहे. म्हणजेच त्याला 10-11 हजार रुपये फटका बसतोच आहे. आपत्तीकाळात नफा कमविणा-यांचं पिक आलं आहे. मानवता मृत्यू पावली आहे. 2,000-2,200 रुपये इंजेक्शन किंमत 4-5 पट घेत आहे. त्यासाठीही ओळख व बड्यांची वर्णी, शिफारस हवी. महाराष्ट्र विकास फोरमचे कार्तिक लारोकर यांनी सांगितले की, एका खाजगी रुग्णालयाने प्रशासनाकडून केवळ 5 इंजेक्शन मिळाल्याचे सांगीतले, परंतु जेव्हा त्यांनी जिल्हाधिका-यांकडून प्रसिद्ध यादीतून तपासले तेव्हा रुग्णालयास 17 इंजेक्शन्स देणे असल्याचे दर्शवण्यात आले आहे. याचाच अर्थ असा आहे की काही खाजगी रुग्णालये रुग्णांना लुबाडण्यासाठी कार्यरत आहेत.

सर्व मेडिकल मध्ये उपलब्ध हवे: काळा बाजार शक्यता लक्षात घेऊन प्रशासनाने वितरण आपल्या हाती घेतले आहे. रुग्णांना प्रदान करण्यासाठी आणि कोव्हीड रुग्णालयांना थेट प्रदान करण्यासाठी काही मोठ्या वैद्यकीय स्टोअरची सूची तयार केली जात आहे. पूर्वी सर्व अधिकृत वैद्यकीय स्टोअरमध्ये हे इंजेक्शन सहज उपलब्ध होते. तेव्हा त्याची काळाबाजारी होत नव्हती. काही वैद्यकीय स्टोअर मालकांची मागणी आहे की ते सर्व स्टोरमधे उपलब्ध केले पाहिजे. काही लोकांना मक्ता दिल्यामुळे शहराच्या सर्व भागातील लोकांना अडचणी येत आहेत. जिल्हाधिका-यांनी देखील लक्षात ठेवाया हवे की हे जीवनदायी इंजेक्शन सर्व वैद्यक स्टोर वर सहज उपलब्ध हवे, तरच रुग्णांचे संबंधितांना भटकावे लागणार नाही. सरकारने सोमवारी जिल्ह्यांमध्ये 6,117 कार्यात्मक बेड आहेत तितकेच इंजेक्शन दिले आहेत.

रेमेडिसवीरचा तुटवडा संपला: सर्व रुग्णालयांना बेडनुसार वाटप

नागपूर: कोरोना उपचारात महत्त्वपूर्ण मानल्या जाणा रेमाडेसिव्हिर इंजेक्शनबाबत आतापर्यंत गोंधळाची परिस्थिती होती, परंतु सोमवारी जिल्हा प्रशासनाने ही चणचण थांबविली. जिल्हाधिकारी रवींद्र ठाकरे यांनी शहर व ग्रामीण भागातील सर्व कोविड रुग्णालयांमध्ये बेडनुसार रेमेड्सवीर इंजेक्शन वाटपाची माहिती दिली.

काहीजण इंजेक्शनची कमतरता असल्याचे भासवून काळाबाजार करीत होते. टंचाईच्या अफवांमुळे अनेक फार्मासिस्टच्या दुकानात लोकांच्या रांगा लागल्या होत्या. एकीकडे सोमवारी शासनाने हायकोर्टाला रेमेडिसवीर इंजेक्शन्स थेट रुग्णालयांना उपलब्ध करुन देण्याचे आश्वासन दिलेले असताना जिल्हा प्रशासनानेही शहरातील 103 कोविड रुग्णालये व ग्रामीण भागातील 33 रुग्णालयांना ही इंजेक्शन्स उपलब्ध करुन दिलीयत. ज्यामुळे कोविड रूग्णांचे कुटुंबियांची समस्या समाप्तीची माहिती जिल्हा प्रशासनाकडून देण्यात आली.

6177 इंजेक्शन्स उपलब्ध: शहर व ग्रामीण भागातील बरीच रुग्णालये कोविड रुग्णालये म्हणून ठरवली गेली आहेत. जेथे, बेड्सनुसार कोरोना रुग्णांना दाखल करण्याच्या सूचनाही देण्यात आल्या आहेत. त्या आधारे आता जिल्हा प्रशासनाने उपलब्ध असलेल्या बेडच्या संख्येनुसार प्रत्येक रुग्णालयात रेमेडिसिव्हिर इंजेक्शन दिले आहेत. सर्व रुग्णालयांमध्ये एकूण 6,117 इंजेक्शन्स उपलब्ध करुन देण्यात आली आहेत अशी माहिती आहे. आवश्यकतेनुसार ही पहिली खेप असू शकते, परंतु आता आवश्यक तेवढी इंजेक्शन्स थेट रुग्णालयांना उपलब्ध करुन दिली जातील. याद्वारे, रुग्णाच्या कुटुंबास या इंजेक्शनसाठी भटकंती करावी लागणार नाही.

पुरवठादाराकडून त्वरित औषध घ्या: उल्लेखनीय आहे की 5 एप्रिल रोजी रेमेडिसवीर इंजेक्शनच्या पुरवठ्याबाबत अन्न व औषध विभागाच्या आयुक्तांनी परिपत्रक जारी केले होते. असे नमूद करून जिल्हा प्रशासनाकडून सांगण्यात आले की, विविध औषध पुरवठादारांना वेगवेगळ्या रुग्णालयांसाठी राखून ठेवले आहे. कोविड हॉस्पिटल्स या पुरवठादारांकडून इंजेक्शन्स घेतील त्यानुसार ही यादी सर्वांना उपलब्ध करुन देण्यात आली आहे. यासाठी कोणताही आक्षेप स्वीकारला जाणार नाही.

गडकरी का डायरेक्ट फोन कॉल: नागपुर में आएंगे 10,000 डोज

नागपुर: कोरोना महामारी से राज्य में हर कोई पीड़ित है। कोरोना रोगियों में भारी वृद्धि राज्य के कुछ हिस्सों में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव डाल रही है। कई जगहों पर डॉक्टरों, नर्सों और दवाओं की कमी है। नागपुर में तो स्थिति और भी चिंताजनक बन गई है। इस पृष्ठभूमि के पर, नागपुर के सांसद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस मामले पर ध्यान दिया। उन्होंने Sun Pharma कंपनी के मालिक के साथ सीधे चर्चा की ताकि रेमडेसविर इंजेक्शन का स्टॉक उपलब्ध कराया जा सके जिसे कोरोना रोगियों के उपचार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। रेमेडिसिविर के 10,000 इंजेक्शन जल्द ही उपलब्ध होंगे

नागपुर में कोरोना के रोगियों की बढ़ती संख्या के कारण, वर्तमान में यहाँ स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव है। दवाओं की भी कमी है। इसलिए, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कोरोना के रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक उपचार प्रदान करने के लिए यह कदम उठाए हैं।

उन्होंने सन फार्मा कंपनी के मालिक के साथ सीधे मामले पर चर्चा की है। उन्होंने यह भी मांग की कि सन फार्मा के मालिक उन्हें रेमेडिविर इंजेक्शन प्रदान करें। इस चर्चा के बाद, नागपुर में जल्द ही कुल 10,000 रिमेडिक्विविर इंजेक्शन उपलब्ध होंगे। आज (10 अप्रैल) तक, 5,000 इंजेक्शन तुरंत Sun Pharma द्वारा दिए जाएंगे। शेष 5,000 इंजेक्शन अगले 2 दिनों में उपलब्ध कराए जाएंगे।‌‌

मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. यांची माहिती : निर्बंधाचे पालन करण्याचे आवाहन

कोव्हिड-१९ ची साखळी खंडित करण्यासाठी महाराष्ट्र शासनाने ५ एप्रिलच्या रात्री ८ वाजतापासून कडक निर्बंध लावले आहेत. या निर्बंधाची अंमलबजावणी नागपुरातही होणार असून मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. यांनी यासंदर्भातील आदेश जारी केला आहे.

कोरोनाची साखळी खंडित करण्यासाठी ५ एप्रिलचे रात्री ८ वाजतापासून कडक निर्बंध लावण्यात आले आहे. रात्री ८ वाजतापासून सकाळी ७ वाजतापर्यंत संचारबंदी तसेच सकाळी ७ ते रात्री ८ पर्यंत जमावबंदी राहणार आहे. शिवाय मॉल, चित्रपटगृहे, हॉटेल, बार, रेस्टॉरंट, धार्मिक स्थळे, नाट्यगृहे, बाजारपेठ बंद राहणार आहेत. फक्त अत्यावश्यक सेवा सुरू राहतील. दरम्यान, सार्वजनिक वाहतूकही नियमानुसार सुरू राहील. हे निर्बंध ३० एप्रिलपर्यंत राहणार असून नागपूरकरांनी या निर्बंधांचे पालन करावे, असे आवाहन आयुक्त राधाकृष्णन बी. यांनी केले आहे.

 

Exit mobile version