कोरोना महामारी की वजह से नही हो पा रहा नेत्रदान, सैकड़ों नागरिक नेत्रदान का कर रहे इंतजार

नागपुर: कोरोना महामारी के चलते पिछले एक वर्ष से कभी लॉक डाउन तो कभी कर्फ्यू और आपात की स्थिति बनी हुई है।
और बात करें कोरोना से मृत्यु होने वालों की तो अंत्येष्टि पर भी उन्हें स्पर्श करने से बचा जा रहा है। इससे पिछले वर्ष भर से नेत्रदान होना भी बंद हो गया है। दान से प्राप्त नेत्र रेटीना का उपयोग नेत्रहीनों की आंखों की रोशनी दी जाती है। लेकिन, अब कोरोना ने इस कार्य को भी जकड़ लिया है।इस वर्ष के दौरान कोई नेत्रदान नहीं किया गया। 

देश में लगभग 52 मिलियन नेत्रहीन लोग हैं। उनमें से लगभग 55% इसका शिकार सिर्फ मोतियाबिंद के कारण होते हैं। इसलिए, वह आईरिस ट्रांसप्लांट सर्जरी के माध्यम से अपनी दृष्टि पुनः प्राप्त कर सकते है। देश में 52,000 से अधिक नेत्र रेटीना दान के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं। 2019 में, 28,000 लोगों में अंधेपन का उन्मूलन किया गया। हालांकि, इस साल कोरोना आपातकाल के कारण लॉकडाउन हुआ। लॉकडाउन अवधि के दौरान मार्च 2020 से न केवल राजधानी शहर में बल्कि राज्य में भी नेत्रदान पर अलिखित प्रतिबंध था।इस वर्ष एक भी नेत्रहीन व्यक्ति प्रकाश को नहीं देख सका। देश को प्रत्येक वर्ष 2 लाख नेत्र रेटीना की जरूरत होती है। हालांकि, इन नेत्रहीन लोगों में से केवल 25,000 से 28,000 लोग ही देख पाते हैं। मार्च 2020 से जून 2021 तक के पंद्रह महीनों के दौरान, एक भी आईरिस दान नहीं किया गया। इससे नेत्रदान अभियान स्वतः ही बाधित हो गया। नागपुर में नेत्रदान – देश में हर साल 35 से 40 हजार नए नेत्रहीन जुड़ते हैं। यह अनुपात चिंताजनक है। एक व्यक्ति की दो आंखों से दो नेत्रहीन लोगों को फायदा होता है। नागपुर में भी 4,000 से अधिक नेत्रहीन लोग नेत्रदान के लिए इंतजार कर रहे हैं।   

वर्ष 2019 से 20 फरवरी के बीच नागपुर में केवल 80 लोग ही अपनी आंखों की रोशनी प्राप्त हुई।हालाँकि, 2020-2021 के दौरान कोई नेत्रगोलक प्राप्त न होने से कोई भी सर्जरी नही हो पाई।

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