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“सरकारी में जगह नहीं,निजी के लिए पैसा नही” गरीब मरीजों का घर पर ही हो रहा उपचार

नागपुर: सूत्रों के हवाले से ऐसा बताया जा रहा है के शहर के बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल्स में आम मरीजों के बेड लेने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। एक मिडिल क्लास या गरीब परिवार को सिर्फ मेयो हॉस्पिटल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

पिछले कई दिनों से शहर में कोरोना मरीजों की संख्या विस्फोटक तौर पर बढ़ती जा रही है। इसी के चलते पेशेंट्स को हॉस्पिटल में एडमिशन और बेड अवेलेबल नहीं हो पा रहा है।और बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल्स में भी आसानी से बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।दूसरी तरफ प्राइवेट हॉस्पिटल्स में अमीर तथा रुतबे वाले लोगों को पहली प्राथमिकता दी जा रही है। 

गवर्मेंट हॉस्पिटल्स में बेड खाली नहीं है और प्राइवेट हॉस्पिटल्स में जाने के अधिकतर पेशेंट्स के न तो पैसे हैं या ही प्राइवेट हॉस्पिटल्स की प्राथमिकता में वो है।तो पेशेंट जाए तो जाए कहां? 

एनएमसी ने शहर के 127 प्राइवेट हॉस्पिटल्स को 80-20 फार्मूले के हिसाब से कोविड केयर सेंटर के रूप में परमिशन दी है तथा बेड की संख्या बढ़ाने के लिए मंजूरी भी दी है। इसका प्राथमिक उद्देश्य वहां गरीब तबके से आए मरीजों का उपचार करना था।कुछ बड़े हॉस्पिटल्स ने होटलों में हॉस्पिटल शुरू किए है। वहां इलाज की दरें की इतनी अधिक है की आम आदमी का वहां तक पहुंच पाना बहुत ही मुश्किल है। 

अब ऐसे में मरीज कहीं के भी नही रह जाते ना प्राइवेट में जा सकते हैं और सरकारी अस्पतालों में तो जगह है ही नही ।मजबूरन उन्हें रिस्क लेकर घर पर ही क्वारेंटाइन हो कर उपचार लेना पड़ता है।

ऐसे में कई लोगों की मांग की उठ रही है कि नगर निगम ऐसे प्राइवेट हॉस्पिटल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो पेशेंट्स को बेड उपलब्ध है या नही इसकी सही समय पर ठीक जानकारी नहीं दे रहे ।

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