नागपुर पदवीधर चुनाव Result: नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहळे को हराकर जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान बाजी पूरी तरह पलट गई, और इस पलटवार की सबसे बड़ी वजह दूसरी पसंद के वोटों की गिनती मानी जा रही है।
गिनती में क्या हुआ?
बताया जा रहा है कि शुरुआती गिनती में कोहळे ने करीब 5,000 वोटों की बढ़त बना ली थी। लेकिन अंतिम चरण में दूसरी पसंद के वोट गिने जाने शुरू हुए और उनकी बढ़त घटने लगी।
उस समय उम्मीदवार नितेश कराले (कराले गुरुजी) से जुड़े लगभग 14,000 वोटों की गिनती बाकी थी। इन मतपत्रों में वंजारी को दूसरी पसंद मिलने से नतीजे का रुख बदल गया।
दूसरी पसंद का गणित, आसान भाषा में
इस चुनाव में मतदाता सीधे एक नाम पर मुहर नहीं लगाते, बल्कि उम्मीदवारों को पसंद के क्रम में नंबर देते हैं।
- पहले सभी पहली पसंद के वोट गिने जाते हैं।
- अगर किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी कोटा नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है।
- बाहर हुए उम्मीदवार के वोट उन मतपत्रों में लिखी अगली पसंद के हिसाब से बाकी उम्मीदवारों को दिए जाते हैं।
- यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक कोई उम्मीदवार कोटा पूरा न कर ले।
यही वजह है कि पहली पसंद में आगे चल रहा उम्मीदवार भी आखिर में पिछड़ सकता है।
वंजारी ने क्या कहा?
जीत के बाद वंजारी ने इसे “शक्ति से बड़ी युक्ति” की जीत बताया। उनके मुताबिक यह सीधा नहीं, बल्कि पसंद आधारित मतदान था, जिसका फायदा उन्हें मिला। उन्होंने कहा कि उनके हिस्से के वोट उन्हें मिले और उन्होंने विधान परिषद में जो मुद्दे उठाए, यह उनका समर्थन है।
वंजारी का कहना है कि महाविकास आघाडी एकजुट होकर लड़ी। उन्होंने विरोधी खेमे पर तंज कसते हुए कहा कि बूथों पर नेता तो बहुत थे, लेकिन स्नातक मतदाता नहीं थे। कोहळे ने अपनी हार स्वीकार कर ली है।
भाजपा का गढ़ और 2020 का इतिहास
नागपुर स्नातक सीट लंबे समय तक भाजपा के पास रही है। इस सीट का प्रतिनिधित्व नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधरराव फडणवीस भी कर चुके हैं। 2020 में वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को 18,910 वोटों के अंतर से हराकर करीब 58 साल पुराना भाजपा का दबदबा तोड़ा था। उस चुनाव में भी किसी को कोटा नहीं मिला था और दूसरी पसंद की गिनती करनी पड़ी थी।
इस बार चुनाव से पहले भाजपा के भीतर नाराजगी की चर्चा थी। पूर्व एमएलसी अनिल सोले ने निर्दलीय के तौर पर पर्चा भरा, फिर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद भाजपा उम्मीदवार को समर्थन दिया। इसके बावजूद पार्टी सीट वापस नहीं ले सकी।
अवैध वोटों पर सवाल
एक रिपोर्ट के मुताबिक 3,000 से ज्यादा वोट अवैध घोषित होने और 15,000 से ज्यादा वोट खारिज होने के दावे किए जा रहे हैं। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, इसलिए इन्हें दावा ही माना जाए।
पूरे राज्य की तस्वीर
यह नागपुर के साथ कुल पांच सीटों के चुनाव का हिस्सा था: तीन स्नातक सीटें (पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर) और दो शिक्षक सीटें (अमरावती, पुणे)। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक के नतीजों में महाविकास आघाडी को तीन और महायुति को दो सीटें मिली हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नागपुर स्नातक चुनाव में किसकी जीत हुई?
कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की, भाजपा के सुधाकर कोहळे के खिलाफ।
नतीजा आखिरी चरण में कैसे पलटा?
रिपोर्ट के अनुसार दूसरी पसंद के वोटों की गिनती में, खासकर नितेश कराले से जुड़े करीब 14,000 वोटों में, वंजारी को बढ़त मिली।
वरीयता मतदान में पहली पसंद वाला उम्मीदवार क्यों हार सकता है?
क्योंकि कोटा पूरा न होने पर बाहर हुए उम्मीदवारों के वोट अगली पसंद के हिसाब से बंटते हैं, जिससे गिनती का क्रम बदल जाता है।
क्या 2020 में भी यही हुआ था?
हां, तब भी दूसरी पसंद की गिनती हुई थी और वंजारी ने संदीप जोशी को 18,910 वोटों से हराया था।
