‘वह’ कोरोना पर मेरी पहली प्रतिक्रिया थी, किसी ने छेड़छाड़ से बतंगड़ बनाया है!:- मुंढे

नागपुर:- मेरा एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर घूम रहा है। इसमें, मैंने कहा, ‘अपने हाथों को बार-बार धोएं, मास्क का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है।’ यह वीडियो ‘मास्क का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं’ ऐसा एडिट करके अब वायरल हुआ है। मार्च के पहले सप्ताह में कोरोना पर पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस का ‘वह’ बाइट है नगर आयुक्त ने बताया कि किसी शरारती व्यक्ति द्वारा आज की स्थिति में काटछाट कर पुराना वीडियो गलत अर्थ से वायरल किया जा रहा है।

उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुझसे मास्क के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया था। उस समय सरकार के दिशा-निर्देश थे कि कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों के लिए मास्क अनिवार्य हैं।

इसके अलावा, किसी और को मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं थी, जो उस समय स्पष्ट रूप से निर्देशीत था। इस पर ही मैंने यह बयान दिया था। ICMR और सरकार ने तब इन दिशानिर्देशों को बदल दिया, जिसमें कहा गया था कि सभी को मास्क पहनना आवश्यक है। “मैंने अपने फेसबुक लाइव में भी यह स्पष्ट किया था,” आयुक्त मुंडे ने कहा।

“मैंने कहा है कि मास्क पहनना अनिवार्य नहीं” पर यह उस वक्त की बात थी। अब उस पुराने वीडियो को जारी कर मेरे गलत बताने की कोशिशे कि जा रही है, ऐसा करके जनता को गुमराह करना सही नहीं है। यह लोगों की जान के साथ खेलने जैसा है। अप्रैल के बाद से, सभी को बाहर जाते समय मास्क पहनना आवश्यक किया गया है।

मास्क वायरस के प्रसार को रोक सकते हैं, संक्रमण को कम कर सकते हैं। इसलिए आज मैं फिर से सभी से आग्रह करता हूं कि घर से बाहर न जाएं, जब तक कि कोई बहुत महत्वपूर्ण कार्य न हो और घर से बाहर जाते समय मास्क का उपयोग करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि घर में एक से अधिक व्यक्ति हैं, तो भी मास्क का उपयोग घर में भी किया जाना चाहिए।‌‌

राज्य में कोरोना दवाओं की कमी है? सच क्या है?

नागपुर:- एक ओर जहां कोरोना का प्रचलन बढ़ रहा है, वही उपराजधनी सहित विदर्भ में चिकित्सा व्यवस्था अपर्याप्त होती जा रही है। जिला बार एसोसिएशन (डीबीए) ने इस मुद्दे पर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना की दवा के कमी के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है और एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति रवि देशपांडे और न्यायमूर्ति नितिन सूर्यवंशी के समक्ष इस मामले की सुनवाई गुरुवार को हुई। DBA के अध्यक्ष एड कमल सतुजा ने यह याचिका दायर की है। नागपुर सहित पूरे विदर्भ में कोरोना के रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की कमी है। यहां तक ​​कि प्रशासनिक उपाय भी पर्याप्त नहीं हैं। संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता है।

इन त्रुटियों के कारण, सुनील मिश्रा और अॅड. शशिकांत बोरकर का निधन हुआ। रोगियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए, उपचार के लिए तैयार कक्ष में स्थान अपर्याप्त है। यही नहीं, अलग-अलग जगह जांचों की रिपोर्ट भी अलग-अलग होती है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी अस्पतालों में इलाज के लिए मनमाना शुल्क लिया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने आवश्यक दवाओं के साथ पर्याप्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए एक आदेश देने का अनुरोध किया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, नगर आयुक्त, मंडल आयुक्त, कलेक्टर, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, चिकित्सा अधीक्षक और मेयो अधीक्षक को भी मामले में बचाव पक्ष के रूप में नामित किया गया है।‌‌

अब किस बात पर महापौर और आयुक्त के बिच फिर बनी नाराजगी?

नागपुर:- शहर में सभी व्यापारियों को 18 अगस्त तक अपने कर्मचारियों के कोरोना परीक्षण करवाना चाहिए, अन्यथा वे अपनी दुकानों को खोल नहीं पाएंगे, आयुक्त के इस बयान पर नाराज मेयर संदीप जोशी ने जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेंगे ऐसा कहा।

शहर में सभी व्यापारियों और उनके कर्मचारियों की संख्या 5 लाख तक है। अब छह दिनों में 50 लाख टेस्ट कैसे करें? महापौर ने अपील की कि आयुक्त इस तरह का स्टैंड लेकर शहर में माहौल प्रदूषित नहीं करना चाहिए।

आयुक्त मुंढे ने शहर के व्यापारियों से कहा है कि वे 18 अगस्त तक सभी कर्मचारियों के कोरोना का परीक्षण करें, अन्यथा दुकानें बंद करेंगे। इस पर मेयर संदीप जोशी ने कहा कि शहर में 50,000 व्यापारी हैं और उनमें से प्रत्येक में औसतन 10 कर्मचारी हैं। नतीजतन, 18 अगस्त तक 5 लाख परीक्षण करने होंगे। क्या यह संभव है? आयुक्त का यह निर्णय न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि व्यापारियों के साथ-साथ कर्मचारियों पर भी लागू होता है जो अल्प वेतन पर अपने घर चलाते हैं। आयुक्त ने दुकानदारों को हर कर्मचारी का परीक्षण करने का भी निर्देश दिया है।

दुकानदारों की स्थिति भी नाजुक है। वे इतना पैसा कहां से लाएंगे। 5 लाख परीक्षणों के लिए प्रति परीक्षण 1900 रुपये के अनुसार 95 करोड़ रुपये का व्यवसाय होगा। आयुक्त को शहर में भय का माहौल नहीं बनाना चाहिए। व्यापारियों के साथ संवाद बनाकर भी रास्ता निकाला जा सकता है।

यदि किसी व्यापारी का एक कर्मचारी पॉजिटिव्ह आता है, तो संपर्क में आए दूसरों का परीक्षण करना भी उचित है। लेकिन, सभी व्यापारियों को चेतावनी देना उचित नहीं है। मेयर ने चेतावनी दी कि वह बिना किसी राजनीति के लोगों के लिए सड़कों पर उतरेंगे।‌‌

आयुक्त मुंढे के कक्ष क्यों पहुंचे सत्तापक्ष वालें?

नागपुर:- जल कर वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं ऐसा कहने वाले आयुक्त के कक्ष के बाहर लगभग 70 नगरसेवकों ने भौतिक दूरी का पालन करते हुए एक आंदोलन किया, और आयुक्त को चेताया। हाल के दिनों में यह पहली बार है जब सभी आयुक्त के खिलाफ आंदोलन कर रहे है।

कोरोना ने शहर के नागरिकों की आर्थिक स्थिति को गंभीर बना दि है। इसलिए, नगरसेवकों ने अब मांग की है कि इस साल वार्षिक जल कर नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। मेयर जोशी ने बुधवार को प्रशासन को 20 अगस्त को होने वाले निगम के सभा में इस संबंध में एक प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। हालांकि, आयुक्त कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए, नगरसेवकों ने आज अगले तूफानी सभा का संकेत दिया।

वर्तमान में कोरोना युग के दौरान कईयो की नौकरियां चली गई हैं। जो नौकरी पेशा हैं उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल रहा। बिजली कंपनी ने बिल को तीन गुना कर दिया। इसलिए मध्यम वर्ग और गरीबों मे परेशानिया है। हर साल टैरिफ के 5 प्रतिशत बढ़ाने के निर्णय होने के बावजूद, वरिष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी और सत्तारूढ़ दल के नेता संदीप जाधव के नेतृत्व में लगभग 70 नगरसेवकों ने सिविल लाइंस स्थित नगर आयुक्त कार्यालय के सामने आंदोलन किया कि इस विपदा अवधि के दौरान ऐसा नहीं किया जाना चाहिए यही उनकी मांग रही।‌‌

इस समय, कुछ ने डिमांड बोर्डों पर लिखी घोषणाएं भी पकड़ी हुई थी। इसलिए, संकेत हैं कि आयुक्त और पार्षदों के बीच संघर्ष तेज होगा। आंदोलन में परिवहन समिति के अध्यक्ष बाल्या बोरकर, विधी सभापति अॅड धर्मपाल मेश्राम, वरिष्ठ पार्षद डॉ छोटू भोयर, सभापति अभय गोटेकर, पार्षद वर्षा ठाकरे, प्रगति पाटिल, दिव्या धुरडे आदि उपस्थित थे।

हाल के दिनों में आयुक्त के खिलाफ अधिकारियों द्वारा आंदोलन की यह पहली ही घटना है। इससे पहले टी चंद्रशेखर जब कमिश्नर थे, तब उन्होंने खेल सामान घोटाले में सत्तापक्ष को जेल का रास्ता दिखाया था ऐसा ही आंदोलन हुआ था।

कमिश्नर का बयान गलत: मेयर जोशी कहते हैं

आयुक्त का कहना गलत है कि जल कर को कम नहीं किया जा सकता है। कोरोना ने सभी की वित्तीय स्थिति को बदतर बना दिया है। आयुक्त को मूल्य वृद्धि पर जोर नहीं देना चाहिए। टैक्स का फैसला एक साल के लिए टाल दिया जाना चाहिए। हाउस टैक्स कम करने का फैसला करेगा। आयुक्त को यह प्रस्ताव सरकार से मंजूर करवाना चाहिए। सरकार दरबार में अपने वजन का लाभ उठा उसका फायदा नागपुर के लोगों को देना चाहिए।‌‌

अत्यावश्यक कामाखेरीज म.न.पा. मध्ये येण्याचे टाळावे

नागपूरात दररोज कोरोनाचा प्रादुर्भाव वाढत आहे तसेच पॉझिटिव्ह रुग्णांची संख्या वाढत चालली आहे. याचा शिरकाव आता महानगरपालिकेच्या मुख्यालय व झोन कार्यालय पर्यंत झालेला आहे. अधिकारी व कर्मचारी मध्ये सुध्दा कोरोना पॉझिटिव्ह रुग्ण आढळून आले आहे.

महानगरपालिकेच्या मुख्य कार्यालय व झोनमध्ये दररोज विविध कामासाठी मोठया प्रमाणात नागरिक येत असतात. विविध भागातील नागरिकांच्या येण्यामुळे संसर्ग वाढण्याची शक्यता नाकारता येत नाही. म.न.पा.चे स्वच्छता विभाग, आरोग्य विभाग, अग्निशामण इ.विभागाव्दारा नागरिकांना अत्यावश्यक सेवा दिला जातात. सदर सेवा काही प्रमाणात बाधीत होण्याची शक्यता नाकारता येत नाही. सदर बाधीत होवू नये यासाठी सर्व संबंधित अधिकारी/कर्मचारी यांच्या सुरक्षेचे दृष्टीने सदर प्रतिबंधात्मक उपाययोजना करण्यात येत आहे.

उपरोक्त वस्तुस्थिती लक्षात घेता म.न.पा. आयुक्त तुकाराम मुंढे यांनी महानगरपालिकेच्या मुख्यालय तसेच झोन कार्यालयामध्ये नागरिकांना अत्यावश्यक कामाशिवाय येण्याचे टाळावे असे आवाहन केले आहे. तसेच नागरिकांना मनपाच्या कोणत्याही अत्यावश्यक कामाविषयी तक्रार असल्यास ते मनपाचे “नागपूर लाईव्ह सिटी “ मोबाईल ॲप वर तक्रार नोंदवू शकतात.

या ॲपव्दारे नागरिकांच्या तक्रारी सोडविण्याबाबत मनपा प्रयत्नशील असून त्यासाठी नागरिकांना मनपा मध्ये येण्याची कोणतीही आवश्यकता राहणार नाही, असेही त्यांनी स्पष्ट केले आहे. कोरोना कोव्हिड-१९ संबंधी तक्रार असल्यास म.न.पा. आपत्ती व्यवस्थापन नियंत्रण कक्षातील दुरध्वनी क्र. ०७१२-२५६७०२१, २५५१८६६ तसेच पाणी पुरवठा व चोकेज संबंधी तक्रारी असल्यास ०७१२-२५६५५०९ वर संपर्क साधावा असेही आवाहन करण्यात येत आहे.

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तिरंगा मास्क वापरणाऱ्यांवर कारवाई?

स्वातंत्र्य दिनानिमित्त यंदा तिरंगा मास्क घालायचे नवीन फॅड आलेले आहे. मात्र, अशा पद्धतीने मास्क घालणे हा तिरंगा झेंड्याचा अपमान समजला जाईल व अशा पद्धतीने राष्ट्रध्वजाचा अपमान करणाऱ्यांच्या विरोधात कारवाई केली जाणार आहे.

गेल्यां २ ~ ३ दिवसांपासून सोशल मीडियावर बहुसंख्य ठिकाणी तिरंगी रंगाचा झेंड्यासारखा असलेला फेस मास्क स्वातंत्र्यदिनाचे औचित्य साधून विक्रीस आलाय तो अजिबात घालू नका असे कळकळीने आवाहन केले जात आहे, फेसबुक, यु ट्यूब, वा व्हिडिओ माध्यम अथवा वृत्त माध्यमातही सर्व ठिकाणी सर्वच लोक कळकळीने त्याविषयकचे फोटो किंवा ते विक्रीस तयार असल्याचे फोटो शेअर करत 15 ऑगस्ट रोजी हे मास्क घालून देशाभिमान मिळवणार की देशाचा अपमान करणार आहोत? अशा आशयाचे वृत्तही त्या फोटोंसह फिरवत आहेत.

ब-याच ठिकानी प्रशासनाने हा मास्क घातल्यास व वापरल्यानंतर इतस्तत: फेकल्यास कारवाईचे संकेत दिले आहेत भलेही त्यामागची पेहरावाची भावना व उद्देश्य काहि का नसे ना? अनेक नेत्यांनी असे तिरंगा मास्क निर्मितिचे वृत्त समजताच त्याबाबत निषेध व्यक्त केलाय.

कंपन्या पैसा कमावण्याचे उद्देश्याने लोकभावना जानत तसे प्रॉडक्ट हंगामानुसार निर्मीती करतात पण हे प्रॉडक्ट अविचाराने बाजारात आलंय्, दुकानांत, मेडिकल्स स्टोर्स मधे ते उपलब्धही आहे.

या प्रॉडक्टला विरोध का? तर हा मास्क पेहेराव करणारे व्यक्ति वारंवार खोकून, छींकून उपयोगाअंती डस्टबिनला फेंकण्याचा संभव आहे, तिरंगा प्रत्येकच भारतीयाची आन बान शान मानल्या जातो करिता राष्ट्रीय ध्वजाचा पुर्ण सन्मान प्रत्येक नागरिकाचे कर्तव्य आहे, असल्या मास्कच्या वापरावर बहिष्कार टाकला जावा हि मागणी जोर धरतेय

तिरंगी मास्क स्वत: घालून राष्ट्रध्वजाचा अपमान तर करूच नका, मित्र-मैत्रिणींसोबतही शेअर करू नका, त्यांनाही घालू देऊ नका, विक्रेते, दुकानदारांनाही तो विकू देऊ नका, प्रसंगी त्यांची तक्रार करा. असा समंजस सल्ला सर्व जानकार व सामान्यही व्यक्त करत आहेत. सरकार ने ही याविषयक मनाई आदेश त्वरित प्रसारित करावा हि मागणी सर्वस्तरातून होते आहे

नागपूरात कोरोना घोळ: कैक बाबींत खासगी व सरकारी अहवाल भिन्न

नागपूर:- शहरात कोरोनाचा संसर्ग झपाट्याने पसरत आहे. प्रत्येकजण स्वत: बाबत साशंक आहे. अशा परिस्थितीत लोक आता स्वत: च स्वत:ची तपासणी करण्यासाठी पुढे येताहेत, परंतु तपासाअंती गोंधळात टाकणारा निकाल लागतो आहे. अशीच बाब एका गर्भवती महिलेबाबत झाली आहे. मनपाने आयोजित केलेल्या कोविड 19 तपासणी शिबिरात तिचा अहवाल पॉजिटिव्ह आला. हा अहवाल पाहून संपूर्ण कुटुंब घाबरले. मग त्या महिलेसह सर्वांनी ठरवले की पुन्हा खासगी संस्थेत तपासणी करावी.

खाजगी लॅब तपासणीत अहवाल निगेटिव आला. आता गर्भवती महिलेबाबत जोखीम कशी घ्यावी याबद्दल कुटुंब अस्वस्थ आहे. सरकारी अहवालाचे अनुसरण करावे कि खासगी अहवालावर विश्वास ठेवायचा. संपूर्ण कुटुंबच संभ्रमात आहे. कोण खरे, कोण खोटे आहे? निर्णय घेणे अवघड होत आहे.

90 पैकी 24 पॉझिटिव्ह: मनपा स्थायी समिती सभापती पिंटू झलके यांच्या विभागांतर्गत मागे 7 ऑगस्ट रोजी प्रगती हॉलमध्ये कोविड तपासणी शिबिर आयोजित करण्यात आले होते. छावणीत 90 जणांनी तपासणी करून घेतली. त्यात 24 लोक सकारात्मक आढळले. यात त्या गर्भवती महिलेचा देखील समावेश होता. तिने दुसर्‍या दिवशी डॉ. मेजर शांतनु मुखर्जी यांच्या रूग्णालयात पुन्हा एकदा त्याची कोरोना तपासणी केली. तपास अहवाल नकारात्मक आला.

हा अहवाल पाहून तिला आनंद झाला, पण गोंधळातही टाकले. कोणता अहवाल बरोबर, कुठला नाही हे ते ठरवू शकत नाहीत. हा अहवाल घेतल्यानंतर स्थायी समिती सभापती झलके यांच्याकडे ती पोहोचली. झलके म्हणाले की, तपासणीच्या पद्धतींचा पुनर्विचार करावा. केवळ तपास म्हणून याचा तपास होऊ नये तर एक यावर योग्य तोडगा निघायली हवा. या संदर्भात मनपा आयुक्तांशी बोलल्यानंतर हे प्रकरण निदर्शनास आणून देण्यात येईल.

कन्नमवार नगरातील 74 वर्षाची एक ज्येष्ठ महिला घरात पाय घसरून पडली. उपचारासाठी ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर सुब्रमण्यम अय्यर यांच्याकडे नेले. डॉक्टरांनी कोरोना टेस्ट करण्याचा सल्ला दिला. ती महिला एका खाजगी प्रयोगशाळेत गेली. कोरोना चाचणी अहवाल तेथे पॉजिटिव्ह आला. महिलेने कधीच घर सोडले नाही व कैक दिवसांपासून ती कोणत्याही बाहेरील व्यक्तीशी संपर्कात आली नव्हती. म्हणून कुटूंबियांस संशय होता करिता कुटुंबीयांनी दुसर्‍या खाजगी प्रयोगशाळेत नेले. कोरोना चाचणी अहवाल तेथे निगेटिव आला.

कुटुंबीयांना दिलासा तर मिळाला, पण गोंधळ वाढला. तथापि, पहिल्या अहवालाच्या आधारे मनपाने तातडीने त्या महिलेच्या राहत्या जागेस सील केले. गंमतीची गोष्ट म्हणजे संबंधित महिलेच्या शेजारीच मनपाचे आरोग्य अधिकारी यांचे निवासस्थान आहे.

हि तांत्रिक चूक असो की खासगी लॅबची फसवणूक. पालिका आयुक्तांनी याची चौकशी करून दोषींवर त्वरित कारवाई करावी अशी मागणी ज्येष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी यांनी केली आहे

मालमत्ता कर, पाणी बिल 50 टक्के माफ करा, मनपाच्या बैठकीत पाठवा प्रस्ताव: महापौर

नागपूर:- कोरोना प्रादुर्भावामुळे व्यापारी आणि सामान्य लोकांवर आर्थिक ओझे पडले आहे. विवीध संकटाशी दोन हात चालू असताना अशात मालमत्ता कर व पाणी बिलाची वसुलीकडे जोर देण्याऐवजी सर्व लोकप्रतिनिधींचा 50 टक्के मालमत्ता कर आणि पाण्याचे बिल माफ करण्याचा हेतू आहे.

या संदर्भात महापौर संदीप जोशी यांनी मनपाच्या बैठकीत विचार करण्यासाठीचा प्रस्ताव पाठविण्याच्या सूचना दिल्या. ते म्हणाले की उशिरा कर भरल्यास दंड आकारला जातो. हा दंड माफ करण्याची शक्ती मनपा आयुक्तांकडे आहे. संवेदनशीलता दाखवत हा दंड माफ करण्याच्या सूचना आयुक्तांना दिल्या.

या विषयांवर चर्चा करण्यासाठी मनपा मुख्यालयात लोकप्रतिनिधींची बैठक घेण्यात आली. आमदार कृष्णा खोपडे, गिरीश व्यास, ना गो गणार, मोहन मते, प्रवीण दटके, संदीप जाधव, तानाजी वनवे, महेंद्र धनविजय, दयाशंकर तिवारी, सुनील अग्रवाल, राम जोशी, मिलिंद मेश्राम, मनोज गणवीर, आदी उपस्थित होते.

बिल वेळेत वितरित झाले नाही तर, आंदोलनः

चर्चेदरम्यान आमदार प्रवीण दटके म्हणाले की, एकीकडे दरमहा बिल लोकांकडे पाठवले जात नाही. दुसरीकडे, जनतेने हे बिल भरणे अपेक्षित आहे. ते अयोग्य असल्याचे सांगत ते म्हणाले की प्रत्येक व्यक्तीला वेळेवर बिल द्यावे. ओसीडब्ल्यूने पिण्याच्या पाण्याच्या व्यवस्थापनासाठी केलेल्या करारामध्ये याची नोंद आहे. परंतु कंपनीने अद्याप दरमहा बिल दिलेले नाही.

जर लोकांकडून नियमित बिले भरणे अपेक्षित असेल तर लोकांचे बिलही वेळेवर द्यावे. अन्यथा जनतेसह आंदोलन करण्याचा इशारा त्यांनी दिला. चर्चेदरम्यान आमदार खोपडे, मते आणि व्यास यांनी 50 टक्के पर्यंत कर माफ करण्याची मागणी करत तीव्र संताप व्यक्त केला. गतवर्षीचा दंड माफ करण्याबरोबरच लोकांना एकवेळ समझोता करण्याची संधी उपलब्ध करून देऊन नंतरच कर न भरण्याबाबत कायदेशीर कारवाई करण्याची मागणी सत्ताधारी नेते संदीप जाधव यांनी केली.

महापौर आणि आयुक्त यांच्यात पुन्हा बेबनाव: आयुक्त मुंढे उपस्थित नसताना बुधवारी मुख्यालयात लोकप्रतिनिधींच्या बैठकीत महापौर आणि आयुक्त यांच्यातील संघर्ष पुन्हा एकदा दिसून आला. महापौर म्हणाले की 31 जुलै रोजी आयुक्तांच्या सभागृहात जनतेच्या प्रश्नांसंदर्भात बैठक झाली. ज्यामध्ये मनपा आयुक्त उपस्थित नव्हते.

पाणीपट्टी व मालमत्ता कराबाबत जनतेला भेडसावणा-या अडचणींबाबत बुधवारी बैठक घेण्यात आली. या बैठकीतही ते गैरहजर होते. दोन्ही विभाग आयुक्तांकडे असताना अतिरिक्त आयुक्तांना जबाबदारी न देता आयुक्तांनी दोन्ही विभाग आपल्याकडे ठेवले आहेत. दर वाढ कमी करण्यासाठी एक पत्र देण्यात आले पण त्यास उत्तर दिले गेले नाही. सभेलाही उपस्थित राहणे योग्य नाही.

परिवहन पुर्ववत होण्यासाठी “डफली बजाओ” आंदोलन

एस. टी. महामंडळ ची बस सेवा शुरू करून दैनंदिन जिवन सुरळीत करावे या मागणीसाठी वंचित बहुजन आघाडी चे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अॅड. बाळासाहेब उर्फ प्रकाश आंबेडकर यांच्या नेतृत्वात आज बुधवार दिनांक १२ आॅगष्ट २०२० रोजी दुपारी १२ वाजता हिंदी मोरभवन बस स्टाॅप, झांशी राणी चौक, नागपुर येथे डफली बजाओ आंदोलन करन्यात आले.

आजचे आंदोलन संपूर्ण महाराष्ट्रात जिल्हा व तालुका स्तरावर करन्यात आले. ज्यामधे जनतेचा उत्स्फुर्त प्रतिसाद मिळाला. अॅड. बाळासाहेब आंबेडकर यांनी नागपुर येथे स्वतः उपस्थित राहून आंदोलनाचे नेतृत्व केले.

प्रसंगी जनतेला संबोधित करतांना बाळासाहेबांनी राज्य सरकार ला चांगलेच धारेवर धरले. महाराष्ट्र राज्य हे अगोदर दुसऱ्यांना निर्देशित करनारे राज्य होते पण आता हे दुसऱ्यांचे आदेश पाळनारे राज्य बनले आहे, सरकार प्राइवेट ट्रांसपोर्ट ला परवानगी देत आहे तर प्रायवेट ट्रांसपोर्ट मधील लोकांना कोरोना होत नाही मग सरकारी ट्रांसपोर्ट मधील लोकांनाच कोरोना कसा होनार हे शासनानं सांगावं असा घनाकाती प्रहार त्यांनी केला. सोबतच आजचे आंदोलन हे फक्त इशारा देन्यासाठी आहे, जनजिवन सुरळीत केलं नाही तर १५ आॅगष्ट नंतर मोठ्या प्रमाणात आंदोलन करू असा इशारा सुध्दा यावेळी बाळासाहेबांनी दिला.

प्रसंगी वंचित बहुजन आघाडी चे नागपुर शहर कार्यकारिणी, ग्रामीण कार्यकारिणी, युवक आघाडी, महिला आघाडी व सम्यक विद्यार्थी आंदोलन चे पदाधिकारी, पक्षाचे सर्व कार्यकर्ते व हजारों च्या संख्येने नागरिक मोठ्या संख्येने उपस्थित होते. त्यानंतर नागपुर जिल्हा चे मा. जिल्हाधिकारी यांना निवेदन देन्यात आले, तेव्हा पक्षाचे प्रतिनिधि इंजि. राहुल वानखेडे, सुमेध गोंडाने, सुनिल इंगळे, अंकुश मोहिले, सिध्दांत पाटिल, सुमधू गेडाम, धर्मपाल लामसोंगे उपस्थित होते.

घरगुती गणपती 2 फूटांपेक्षा जास्त नको: जिल्हाधिका-यांचे गणेशोत्सव साधेपणाने साजरा करण्याचे आवाहन

नागपूर: कोरोना साथीच्या प्रादुर्भावामुळे जिल्ह्यातील नागरिकांनी यंदा घरचा गणेशोत्सव साधेपनातच साजरा करण्याचे आवाहन जिल्हाधिकारी रवींद्र ठाकरे यांनी केले आहे. ते म्हणाले की, शहरी भाग वगळता उर्वरित जिल्ह्यात उत्सव सार्वजनिक स्वरूपात साजरा न करता घरीच साधेपणाने साजरा करण्याचा निर्णय घेण्यात आला आहे.

ते म्हणाले की सार्वजनिक गणेशोत्सवासाठी मंडळांना नियमानुसार संबंधित पालिका, स्थानिक प्रशासनाकडून पूर्व परवानगी घेणे आवश्यक असेल. कोर्टाच्या आदेशांचे पालन करणे, संबंधित गव्हर्नर बोर्डाने व संबंधित स्थानिक प्रशासनाच्या धोरण व नियमांचे पालन करणे बंधनकारक असेल. गणेश मूर्ती 4 फूटांपेक्षा जास्त नसावी आणि घरगुती गणपतीची उंची 2 फूटांपर्यंत मर्यादित ठेवली पाहिजे. ठाकरे म्हणाले की शक्य झाल्यास घरात आधीच उपलब्ध असलेल्या धातू, संगमरवरी प्रतिमेची पूजा करा. किंवा मातीची मुर्ती स्थापित करा जेणेकरून घरातच विसर्जन होऊ शकेल.

विसर्जन पुढील वर्षीपर्यंत पुढे ढकलले जाऊ शकते: जिल्हाधिकारी म्हणाले की कोरोनाचा संसर्ग रोखण्यासाठी गणेश मूर्ती विसर्जन पुढील वर्षी 2021 च्या भाद्रपद महिन्यात विसर्जनाच्या तारखेपर्यंत पुढे ढकलले जाऊ शकते. विसर्जन स्थळांवर गर्दीमुळे कोरोनाचा संसर्ग झपाट्याने होण्याचा धोका असेल. सार्वजनिक मंडळांमध्ये गर्दी नसेल अशा यंत्रणेचे पालन करावे लागेल, असे आवाहनही त्यांनी सार्वजनिक मंडळांना केले. सॅनिटायझर, थर्मल स्क्रीनिंग, मास्कशिवाय कोणालाही आत जाण्याची परवानगी दिली जाणार नाही. सोशल डिस्टेंस पाळणे बंधनकारक असेल. त्यांनी मंडळांना सांस्कृतिक कार्यक्रमांऐवजी रक्तदान शिबिरे, प्लाझ्मा दान आयोजित करण्याचे आवाहन केले. कोरोना, मलेरिया, डेंग्यू टाळण्यासाठी केलेली उपाययोजना बाबत जनजागृति करावी.

ऑनलाईन विक्री व होम डिलिव्हरी सेवा: शक्य असल्यास गणेश मूर्तीच्या ऑनलाइन बुकिंगची व्यवस्था करावी व दुकानांत गर्दी होऊ नये म्हणून घरपोचसेवा देण्याचे आवाहनही जिल्हाधिका-यांनी केले. दुकानांमध्ये कोविड19 च्या मार्गदर्शक सूचनांचे अनुसरण करावे. गणेश मंडळांनी दर्शनासाठी ऑनलाइन सुविधा म्हणून, केबल नेटवर्क, वेबसाइट आणि फेसबुक सुविधांचा वापर करावा. थेट दर्शन वेळी, सोशल डिस्टेंसच्या नियमांचे पालन करणे फार महत्वाचे आहे. नागरिकांनी विसर्जनस्थळी जाणे टाळण्याचे त्यांनी आवाहन केलेय, गेलेच तर घरीच आरती करून विसर्जनस्थळी पोहोचा व विसर्जनानंतर किमान वेळेत घरी परतावे.

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