नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सुधाकर कोहळे की हार के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। अब हजारों अवैध मतपत्रों और दूसरी पसंद के वोटों की भूमिका पर चर्चा हो रही है, लेकिन इनमें से किसी भी आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
करीबी मुकाबला, आखिरी चरण में पलटा नतीजा
बताया जा रहा है कि मतगणना की शुरुआत में कोहळे ने करीब 5,000 वोटों की बढ़त बना ली थी। लेकिन जैसे ही दूसरी पसंद के वोटों की गिनती शुरू हुई, यह बढ़त घटने लगी।
उस समय उम्मीदवार नितेश कराले, जिन्हें “कराले गुरुजी” के नाम से जाना जाता है, से जुड़े करीब 14,000 वोटों की गिनती बाकी बताई गई थी। इन वोटों में अभिजीत वंजारी को दूसरी पसंद मिलने के बाद मुकाबले का रुख बदल गया और वंजारी विजयी रहे।
अवैध और खारिज वोटों को लेकर दावे
इस समय दो आंकड़े चर्चा में हैं:
- 3,000 से अधिक वोट अवैध घोषित हुए
- 15,000 से ज्यादा वोट अलग-अलग कारणों से खारिज हुए, ऐसा दावा किया जा रहा है
एक दावे के मुताबिक, 3,000 से अधिक मतपत्रों में कोहळे के नाम के सामने दूसरी पसंद के रूप में “2” लिखा गया, लेकिन किसी भी उम्मीदवार को पहली पसंद के रूप में “1” नहीं दिया गया। वरीयता आधारित मतदान के नियमों में ऐसे मतपत्र अवैध माने जा सकते हैं।
इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। अवैध मतों के कारणों का विस्तृत ब्योरा मतगणना के आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही सामने आएगा।
मतदाताओं की जागरूकता पर सवाल
अगर यह दावा सही साबित होता है, तो सवाल उठेगा कि मतदाताओं को वरीयता आधारित मतदान की प्रक्रिया कितनी अच्छी तरह समझाई गई थी। सार्वजनिक सभाओं और सोशल मीडिया पर बार-बार अपील के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर मतपत्र अवैध होने का दावा गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या भाजपा के भीतर थी नाराजगी?
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इस बार कोहळे की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चा थी। पूर्व एमएलसी अनिल सोले की नाराजगी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप का जिक्र भी हुआ, फिर भी भाजपा यह सीट नहीं बचा सकी।
जिन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं
- क्या दूसरी पसंद के वोटों का समीकरण निर्णायक साबित हुआ?
- क्या उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष का असर पड़ा?
- क्या चुनाव प्रबंधन या मतदाता जागरूकता में कोई चूक हुई?
- क्या अवैध और खारिज मतों के आंकड़े सही हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव कौन जीता?
कांग्रेस के अभिजीत वंजारी, भाजपा के सुधाकर कोहळे के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में।
नितेश कराले के वोटों की क्या भूमिका रही?
बताया जाता है कि अंतिम चरण में उनकी दूसरी पसंद के वोटों की गिनती से नतीजे का रुख बदला।
क्या अवैध वोटों के आंकड़ों की पुष्टि हुई है?
नहीं। 3,000+ अवैध और 15,000+ खारिज वोटों के आंकड़े अभी दावे हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
वरीयता आधारित मतदान क्या है?
इसमें मतदाता उम्मीदवारों को पसंद के क्रम में चिह्नित करते हैं। पहली पसंद वैध रूप से न दी गई हो तो मतपत्र अवैध घोषित हो सकता है।
