कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक दीपक कापसे सहित कई दिग्गज शामिल हुए शिवसेना में

कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक दीपक कापसे सहित तीन वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता शिवसेना में शामिल हो गए हैं।इनमें नाना झोडे, श्रीकांत कैकेडे, हरीश रामटेके शामिल हैं। नागपुर शहर के चार प्रमुख नेताओं सहित लगभग 200 से 250 कार्यकर्ता, शिवसेना में शामिल हुए हैं। ये कार्यकर्ता शिवसेना के मीडिया समन्वयक नितिन तिवारी की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुए हैं।

पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी ने अपने बेटे के भविष्य के लिए कांग्रेस में हड़कंप शुरू कर दिया है।शिवसेना के विधायक दुष्यंत चतुर्वेदी के शिवसेना के नागपुर प्रभारी बनने के बाद, उन्होंने अपने पिता की मदद से शहर में कांग्रेस को हवा देनी शुरू कर दी। हाल ही में, सतीश चतुर्वेदी और कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक के कट्टर समर्थक दीपक कापसे शिवसेना में शामिल हुए हैं। 

ऐसी चर्चा है कि शिवसेना के पूर्व सांसद प्रकाश जाधव, पूर्व उप जिला प्रमुख चिंटू महाराज और शिवसेना के कई अन्य पुराने नेता दुष्यंत चतुर्वेदी से नाराज हैं। 

लेकिन इस अवसर पर एक बार फिर नागपुर में कांग्रेस और शिवसेना के बीच तनाव पैदा होने की संभावना है। सतीश चतुर्वेदी नागपुर में कांग्रेस में एक बड़ा नाम थे। उनके साथ कार्यकर्ताओं का एक बड़ा कैडर भी था। 

मंडी में आवक की कमी, सब्जियों के दामों में आया उछाल “सब्जियां पड़ रही जेब पर भारी”

नागपुर: कई दिनों से नागपुर की आम जनता मंडी में सब्ज़ियों के बड़े हुए दाम से परेशान है। लोकल मार्केट में सब्जियों की आवक भी कम हो गई है।

मंडी के सब्जी भाजी विक्रेताओं का कहना है के सब्जी भाजी के बड़े हुए दामों का असल कारण पिछले दिनों हुई बारिश है।बारिश की नमी के कारण सब्जियां जल्दी खराब भी हो रही है और जिले के बाहर स्थानों से जो सब्जियां आती है उसकी आवक में भी कमी हो गई है। लोकल मार्केट में सब्जी की आवक कम होने से सब्जी भाजी के भाव आसमान छू रहे हैं।ऐसे में एक सामान्य परिवार की जेब पर बड़ी मार पड़ रही है। 

जहां उसे हर सब्जी पर लगभग दोगुने दाम देने पड़ रहे हैं।अब आमजन को अपनी थाली में एक वक़्त की सब्जी परोसने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।आमजन की यही डिमांड है के सब्जियों के दामों में कुछ कमी आना चाहिए ।

अब देखना यह है के सब्जी भाजी के भावों में कोई कमी आती है या नहीं।फिलहाल तो नागपुर की सब्जी मंडी में सब्जियों के भाव कम होने का नाम नहीं ले रहे।

आमदार निवास कोविड केंद्र हिवाळी अधिवेशनाच्या पार्श्वभूमीवर रिकामे

नागपूर: हिवाळी अधिवेशनाचे सत्र पाहता आमदार निवास इमारत क्र. २०१ मध्ये निर्मिलेले कोविड केअर सेंटर रिकामे केले गेले आहे. या इमारतीचे सॅनिटाईजेशन करण्यात आले आणि आता इमारत आठवडाभर बंद राहील.

जिल्हा प्रशासनाच्या आदेशावरून आमदार निवास इमारत क्र.२ व ३ चे कोविड केअर सेंटर बनवले गेले. येथे कोविड रूग्णांसाठी २२० खोल्या आरक्षित होत्या. ७ डिसेंबरपासून असलेल्या हिवाळी अधिवेशनाच्या पार्श्वभूमीवर सार्वजनिक बांधकाम विभागाने जिल्हा प्रशासनाला एक महिन्यापूर्वी एक पत्र देऊन कोविड केअर सेंटर रिकामे करण्याची विनंती केली होती. जिल्हाधिकारी रवींद्र ठाकरे वर्क फ्रॉम होम स्थितीत असल्यामुळे या पत्रावर तातडीने प्रक्रिया होऊ शकली नाही. जिल्हा प्रशासनाने बुधवारी आमदार निवासस्थानाची इमारत क्र. 3 मधील केंद्र रिकामे करण्यास परवानगी दिली. 

यानंतर इमारत क्र. ३ कोविड केअर सेंटर रिकामे केले गेले. येथे 70 बेड आरक्षित होते. इमारत क्र. 2 ऑक्टोबर 15 पर्यंत रिक्त करण्यास सांगितले गेले आहे. सार्वजनिक बांधकाम विभागाने (पीडब्ल्यूडी) इमारत क्र. २ येथे सॅनिटायझेशन करून कोणाच्याही प्रवेशावर बंदी घातली आहे. एका आठवड्यानंतर ही इमारत आतून रंगविली जाईल. देखभाल व दुरुस्तीची कामेही सुरू केली जातील.

मास्क न लावणा-या २२२ नागरिकांकडून दंड वसूली

नागपूर महानगरपालिकेच्या उपद्रव शोध पथकाचे जवानांनी शुक्रवार (९ ऑक्टोंबर) ला मास्क शिवाय फिरणा-या बेजबाबदार २२२ नागरिकांविरुध्द कारवाई केली असून त्यांच्याकडून प्रत्येकी रुपये ५०० प्रमाणे १ लक्ष ११ हजार रुपयांचा दंड वसूल केला. मागील काही दिवसात शोध पथकांनी ११००६ नागरिकांविरुध्द कारवाई करुन रु. ३८,६२,०००/- चा दंड वसूल केला आहे.

लक्ष्मीनगर झोन अंतर्गत ४१, धरमपेठ झोन अंतर्गत ६०, हनुमाननगर झोन अंतर्गत १४, धंतोली झोन अंतर्गत १३, नेहरुनगर झोन अंतर्गत ९, गांधीबाग झोन अंतर्गत १६, सतरंजीपूरा झोन अंतर्गत २०, लकडगंज झोन अंतर्गत १६, आशीनगर झोन अंतर्गत १६, मंगळवारी झोन अंतर्गत १३ आणि मनपा मुख्यालयात ४ जणांविरुध्द शुक्रवारी ही कारवाई शोध पथकाचे प्रमुख विरसेन तांबे यांच्या मार्गदर्शनात करण्यात आली. ५०० रुपये प्रमाणे आतापर्यंत ५५३६ बेजबाबदार नागरिकांकडून रु २७ लक्ष ६८ हजार वसूल करण्यात आले आहे.

नागपूरात रुग्णांची संख्या सतत वाढत आहे तसेच मृतांची संख्या पण वाढत चालली आहे. यावर नियंत्रण करण्यासाठी महानगरपालिकेचे उपद्रव शोध पथक दररोज दहा ही झोनमधील मास्क शिवाय फिरणा-या बेजबाबदार नागरिकांविरुध्द कारवाई करत आहे. नागरिकांना कोरोनापासून वचक करण्यासाठी मास्क लावणे, सामाजिक अंतराचे पालन करणे, हात स्वच्छ धुणे इ. ची सूचना नागपूर मनपा व्दारे वारंवार केली जात आहे. कोरोनाचा वाढता संसर्ग लक्षात घेता मास्क न वापणा-या नगारिकांना बचक बसावा व त्याची प्रभावी अंमलबजावणी व्हावी यादृष्टीने ही दंडाची रक्कम १५ सप्टेंबर पासून ५०० रुपये करण्यात आली आहे. तरीसुध्दा नागरिक मास्क शिवाय फिरत आहेत. 

ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए हाईकोर्ट ने लगाई विभाग को फटकार

शहर में यातायात नियोजन एक अहम चिंता का विषय बना हुआ है यातायात व्यवस्था अस्त व्यस्त होने के कारण हर दूसरे दिन कोई न कोई नागरिक  दुर्घटनाओं का शिकार हो रहा है।लेकिन पुलिसकर्मी  इन मुद्दों को नजरंदाज किए हुए है।

अवैध हॉकर्स के साथ बहुत से रास्तों व चौराहों पर अवैध पार्किंग के कारण सालों से वाहन चालकों को यातायात में कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड रहा है। छोटे-मोटे वाहनों के साथ ट्रक व बस वालों की मनमर्ज़ी चलती है।जहां रोड़ खाली दिखी वहीं ट्रकों व बसों का पार्किंग अड्डा बन जाता हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए हाईकोर्ट ने जिस तरह से बुधवार को पुलिस प्रशासन को फटकार लगाई।उसके बाद अब जनता के मन में एक ही प्रश्न उठ रहा है कि क्या सड़कों का ट्रैफिक परिचालन करने के लिए भी अब हाईकोर्ट को खुद को सड़कों पर उतरना होगा। शहर के कई महत्वपूर्ण मुद्दे है जो कि हाईकोर्ट में लंबे समय से अटके है लेकिन यातायात की चरमराती व्यवस्था व पुलिस प्रशासन की बेपरवाही के चलते हाईकोर्ट को विवशतापूर्वक खुद ही संज्ञान लेते हुए मामले को अपने हाथों में लेना पड़ा।

सिग्नल बंद होने पर भी कई वाहन चालक सिग्नल तोड़ के गाड़ियां आगे बढ़ाते रहते हैं।इतना होने पर भी  पुलिस कर्मचारी टस से मस नहीं हुए।चौराहों पर ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए एक पुलिस कर्मी जबकि चालान की कार्रवाई के लिए पूरा काफिला शामिल हो जाता है।कार्रवाई के दौरान कोई भी सिग्नल तोड़े या इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है।

शहर के बहुत सारे परिसरों में फुटपाथ व सड़कों पर अवैध हॉकर्स ने अपनी दूकाने सजा कर कब्ज़ा जमा लिया है।इन अवैध हॉकर्स का इंतजाम मनपा भी अभी तक नहीं कर पायी है। धरमपेठ हो,सीताबर्डी मेन रोड हो या इतवारी,या नंदनवन अधिकांश परिसर में वैध हॉकर्स की आड़ में अवैध हॉकर्स ने सड़कों व फुटपाथ पर अपना रोब जमा लिया है।

महानगर पालिका व पुलिस प्रशासन इन अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई होती तो है लेकिन अतिक्रमण दस्ते के गुजरने से पहले ही स्थिति वहीं की वहीं हो जाती है।अतिक्रमणकर्ताओं को इतना साहस प्रशासन के अधिकारियों से मिलता है।एक छोटे दूकानदार की पहचान पुलिस कर्मी से लेकर महानगर पालिका अधिकारी तक होती है।यही कारण है कि अधिकारियों की मिली भगत से शहर में अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है।

वेस्ट हाईकोर्ट रोड, रामदासपेठ, जरीपटका , इतवारी, मुंजे चौक, की तरह कई परिसरों में यातायात के साथ पार्किंग व्यवस्था को लेकर कोई नियोजन ही नहीं है। अतिक्रमण और पार्किंग से 40 फूट की सड़क भी 4 फूट की बन जाती है।इस स्तिथि में नागरिकों को हर परिसर में लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या से जूंझना पड़ता है।तो भी प्रशासन अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने में आना कानी करती है।

आरटीओ का पुलिस प्रशासन और पुलिस प्रशासन का महानगर पालिका से कोई समन्वय नहीं होने पर शहर में सड़क दुर्घटनाए बढ रही है।

पहले साप्ताहिक बाजार हफ्ते में एक दिन लगता था, लेकिन अब साप्ताहिक बाजार के नाम पर हर दिन सड़कों पर सजे हुए सब्जी-भाजी दूकानों ने नागरिकों का सड़क पर चलना मुश्किल कर दिया है।अब सड़कों पर सब्जी मार्केट ही नहीं बल्कि बिरयानी सेन्टर और फास्ट फूड का भी मेला लगा रहता है।

प्रशासन की बेपरवाही के कारण हाई कोर्ट के न्यायाधीश पिछले कुछ माह से स्वयं ऐतिहासिक स्थानों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।यदि हाईकोर्ट को ही शहर के विकास और देखरेख पर ध्यान देना है तो अनेक विभाग में हाई पोस्ट पर बैठे अधिकारी को किस काम का वेतन दिया जा रहा यह सवाल जनता पूछ रही है। 

पहले कस्तूरचंद पार्क, फिर जीरो माईल और अब ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने के लिए हाईकोर्ट आगे आया। अब शहर की किस प्रॉब्लम को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाएगी यह कुछ कहा ही नहीं जा सकता।

स्वस्त धान्य दुकानात खराब धान्याचे वाटप- काँग्रेस युवा नेते मोतीराम मोहाडिकर यांचे आरोप

कोविड-19 चां प्रकोप मोठ्या प्रमाणात नागपुर शहरात वाढला आहे. त्यातच गरीब आम जनतेचे हाल-बेहाल झाले आहे.आज गरीब लोकांकडे काम-धंदे नसल्यामुळे केंद्र सरकार ने नोव्हैम्बर पर्यन्त राशन कार्ड धारकांना १ जुलै २०२० ते ३१ नोव्हैम्बर२०२० पर्यन्त गहु व तांदूळ फ्री मधे धान्य वाटप राशन कार्ड धारकांना होत असून तसेच शिधा पत्रिका द्वारे 2 रु प्रति किलो गहु व 3 रु प्रति किलो तांदूळ अशा प्रकारे वाटप करण्यात येत आहे.

या कोरोना प्रादुर्भाव मुळे स्वास्थ केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन यांचा नुशार भारतात प्रत्येक नागरिकांना स्वस्त व निरोगी राहन्याचा सल्ला/माहिती गाइड लाइन द्वारे आम जनतेला मैसेज देतात पन गरीब रेशेखाली शिधा पत्रिका कार्ड धारक लोकांन्ना निरस्त, बेकार खराब गहु वाटप करुण गरीब जनतेच्या जीवनाशी खेळण्याच तसेच जीव घेणे बीमारीचे प्रमाण वाढवन्यास या कोरोना बीमारी मधे वाढ होत असतांना या केंद्र सरकार ची लापरवाही दिसून येते.

केंद्र सरकारचा गाइड लाइन नुसार फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया मार्फत सम्पूर्ण महाराष्ट्र मधे अन्न-पुरवठा विभागाला धान्य सप्लाय होतो व अन्न पुरवठा विभागातुन स्वस्त धान्य दुकानात धान्य वाटप होतो. नागपुर शहर(जिल्हा) काँग्रेस अध्यक्ष श्री विकास ठाकरे यांचा मार्गदर्शनाखाली तसेच मध्य नागपुर काँग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष मोतीराम मोहाडिकर यांचा नेतृत्वात अन्न पुरवठा अधिकारी यांना नागपुर शहरात असलेले पावने दोन लाख राशन कार्ड धारक लाभार्थी आहे. ,एफ.सी. आय मार्फत अन्न पुरवठा विभागाला धान्य सप्लाय होतो व अन्न पुरवठा विभागातुन स्वस्त धान्य दुकानात धान्य वाटप होतो, मोतीराम मोहाडिकर ने आरोप केला- खराब गहु वाटप होत असल्यामुळे शिधा धारक गरीब जनतेला खुप परेशानी,मजबूर व लाचार आपल्या अन्न पुरवठा विभागातुन येणाऱ्या धान्य मधून दिसून येत आहे.

अश्या प्रकारे धान्य(गहु)मागील तीन महीने जुलै, अगस्त, सेप्टेंबर पासून शिधा कार्ड धारक लोकांन्ना वाटप होत आहे अश्या खराब धान्य वाटप या कोरोना बीमारी मधे मोठ्या प्रमाण बीमारीला कोम फुटतील असे दिशुन येते.काँग्रेस नेते मोतीराम मोहाडिकर ने चेतावनी दिली की स्वस्त धान्य दुकानात वेवस्थित, चांगले साफ-सुथरा धान्य वाटप करण्यात यावे अन्यथा तीव्र आंदोलन करण्यात येईल असे म्हणून नागपुर जिल्हाचे इंचार्ज सवई साहेबांना निवेदन देण्यात आले, सवई साहेबांनी आस्वासन दिले की ज्या स्वस्त धान्य दुकानात खराब धान्य वाटप झाले आहे त्या ठिकाणी धान्य बदली करुण मिळेल.

या निवेदनात नागपुर काँग्रेस चे महासचिवअशोक निखाड़े,सुरेन्द्र रॉय, मंजूर अंसारी,महेश श्रीवास, माजी नगरसेविका विजया ताजने,मध्य नागपुर महिला अध्यक्ष गीता जलगावकर,राकेश गुप्ता,आशीष नेवले,कुणाल मौन्देकर, श्रेयस मोटघरे,उत्तमराव गहाने, अनिल खापेकर,वार्ड अध्यक्ष वर्षा खवशे,लता आमनेरकर, तुलसा आमनेरकर, मीरा मौन्देकर, तुलशी पौनिकर, अनिता अडयाकर, मंदा सोनकुसरे, गीता आमनेरकर इत्यादि या निवेदनात होते.

नाना पटोले – कई विधायक कर रहे विरोध पर शीतकालीन सत्र नागपुर में होगा

कोरोना संक्रमण के चलते,कई लोग व विधायक  मांग कर रहे हैं कि दिसंबर में नागपुर में शीतकालीन सत्र का आयोजन न किया जाए बल्कि अधिवेशन का खर्च कोरोना उपायों और विदर्भ के विकास कार्यों पर खर्च कर दिया जाए। विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने आज कहा-  “हालांकि, मानसून सत्र में घोषणा की गई थी, शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से आरंभ होगा”

नाना पटोले ने बताया के यह फैसला कहां,कब व कितने दिनों तक आयोजित होना चाहिए, यह पूरे तौर  से विधायिका के हाथ में है। उस समय, कोरोना से हालात पहले की अपेक्षा  खराब थे।लेकिन गत कई दिनों में,कोवीड पेशेंट्स की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है और मृत्यु दर में भी कमी आई है। वैसे तो यह एक अच्छी बात है, पर शीतकालीन सत्र अभी दो महीने दूर है।इसी कारण से उस वक़्त की स्थिति के आधार पर निर्णय किया जाएगा। बस इसी वजह से आज चर्चा का विषय यह नहीं हो सकता है। 

अधिवेशन के वक़्त विधान भवन के बहुत से कमरे खाली कर दिए गए हैं।इससे अब प्रश्न यह उठता है कि अधिकारी व कर्मचारी वर्ग कहां रहना चाहता है और कोरोना काल के समय कमरे किराए पर उपलब्ध नहीं हैं।ऐसी छोटी बड़ी परेशानियां हो सकती हैं। एक सम्मेलन के लिए निश्चित तौर पर व्यवस्था की जाएगी।क्योंकि सम्मेलन हर वर्ष आयोजित किया जाता है, इसलिए यह इस साल भी होगा। 

संयुक्त महाराष्ट्र के गठन के बाद नागपुर में सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक समझौता किया गया है।इसी कारणवश किसी भी निर्णय में समझौते पर विचार करना होगा। उसी के तहत सरकार कितने बिल लाती है, सम्मेलन कितने दिन चलेगा, यह सब तय किया जाएगा। 

जिले में टेस्ट स्पीड अभी भी कम है, डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की अपील की

डाक्टरों की माने तो मौसम में हो रहे बदलाव का असर सीधे तौर पर होता है। सितंबर की अपेक्षा अक्टूबर में कोरोना से मरने वाले मरीजों की संख्या कमी आ रही हैं।वहीं पाजिटिव पेशेंट भी कम हो रहे हैं।लेकिन प्रशासन द्वारा टेस्टिंग में सुस्ती बरती जा रही है।यही वजह है कि मामूली सर्दी, जुकाम को भी हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है।

परन्तु संदेह होने पर तुरंत टेस्ट कराने पर ही बीमारी का पता चल सकेगा।इस बीच बुधवार को 976 नये संक्रमितों के साथ ही अब तक टोटल 84081 पर पहुंच गई है।वहीं अब तक 71602 मरीज स्वस्थ होकर अपने काम पर लौट चुके हैं।

मौसम का बिगड़ा हुआ मिजाज बार-बार लोगों को परेशान कर रहा है।अक्टूबर में ज्यादातर ठंड शुरू हो जाती है।लेकिन अब तक बारिश का ही सिलसिला यूंही जारी है। बेमौसम की बारिश एक बार फिर मुसीबतें ला सकती हैं।इस मौसम में बच्चों में सर्दी, जुकाम आम हो जाता है।और इसके कारण ही डाक्टरों ने सावधानी बरतने की अपील की है।

84081 कुल संक्रमित

2704 की मौत

71602 हुये ठीक

976 बुधवार को पाजिटिव

बुधवार को 24 घंटे के अंदर 22 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें जिले के 18 मरीजों का समावेश रहा। जबकि 4 मरीज जिले से बाहर के रहे।इस तरह अब तक मरने वालों की संख्या 2704 हो गई है।बुधवार को 835 मरीजों को ठीक होने के बाद छुट्टी दी गई। इस तरह अब तक 71602 मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। अधिकाधिक पेशेंट्स के ठीक होने की वजह से अब रिकवरी रेट 85.16 फीसदी तक आ गया है। बुधवार को 976 पेशेंट्स में संक्रमण की पुष्टी हुई।वहीं अब तक टोटल 84081 हो गये हैं।फिलहाल जिले में 9775 एक्टिव केस है।इनमें आधे से अधिक होम आयसोलेशन में है।

पिछले दिनों प्रशासन द्वारा घर-घर जाकर लोगों की जांच की मुहिम शुरू की। इसके बावजूद टेस्ट कराने वाले नहीं बढ़ रहे हैं। बुधवार को कुल 5918 लोगों की जांच की गई। बताया जा रहा है कि जिन कर्मचारियों को जांच का दायित्व सौंपा गया है वे सिर्फ जानकारी लेकर ही डॉक्यूमेंट तैयार कर रहे हैं। वहीं महानगर पालिका द्वारा शुरू की गई मोबाइल फैसिलिटी का भी अधिकाधिक लोग फायदा नहीं ले रहे हैं।

गंभीर होने के बाद ही लोग हॉस्पिटल्स में जा रहे हैं और कोविड का टेस्ट करवा रहे हैं।शंका होने पर तुरंत हर व्यक्ति को टेस्ट करवाना चाहिए। बात करें टेस्टिंग की तो नागपुर को छोड़कर जिले में  टेस्ट की गति अभी भी धीमी ही रही है।

महानगर पालिका नागपुर ने जीता स्टार म्युनिसिपल लीडरशीप अवॉर्ड

महानगर पालिका द्वारा ग्रीन विजिल फाऊंडेशन के सहयोग से शुरू किए गए उपक्रम को संस्था द्वारा गंभीरता से लिया गया। पुर्णिमा दिवस के अवसर पर एनर्जी सेविंग का मैसेज देनेवाली नागपुर मनपा को अर्थ डे नेटवर्क इंडिया की तरफ से ऊर्जा बचत वर्ग में स्टार म्युनिसिपल लीडरशीप अवार्ड से सम्मानित किया गया। महानगर पालिका की इस सफलता के लिए महापौर संदीप जोशी व आयुक्त राधाकृष्णन बी ने सभी स्वयंसेवक और महानगर पालिका कर्मचारियों का स्वागत किया।

ज्ञात हो के नागपुर में तत्कालीन महापौर अनिल सोले के मार्गदर्शन में वर्ष 2014 से ऊर्जा बचत का उपक्रम चलाया जा रहा है।विशेष तौर पर पुर्णिमा की रात में गैर जरूरी लाईट व बल्ब बंद करने की अपील लोगों से की जाती है।जिसमें रात 8 से 9 बजे तक लोगों को और दूकानदारों को बल्ब बंद करने की अपील की जाती है।

ऐसा अनुमान है कि इस उपक्रम के चलते अबतक 2.53 लाख किलो कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली है।यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस उपक्रम की प्रशंसा की। एलईडी प्रकल्प के तहत महानगर पालिका ने 1.39 लाख पारंपरिक पथदीपो को एलईडी लाईट में परिवर्तित किया है।जिसके कारण वर्ष में 2.27 लाख युनिट कार्बन फुटप्रिंट की सेविंग हुई है।

महापौर संदीप जोशी ने यह भी कहा कि शहर की ग्रीन सिटी के रूप में पहचान है।अब इस पुरस्कार से पर्यावरण की दृष्टि से शहर एक कदम आगे बढ़ा है।

ग्रीन सिटी के साथ ही एनर्जी सेविंग करनेवाले शहर के रूप में देश में नाम दर्ज हुआ है।इस सफलता के पीछे जनता के सहयोग के साथ ही ग्रीन विजिल फाऊंडेशन के स्वयंसेवकों द्वारा की गई जनजागृति की भी अहम रोल है।अब शहर के नागरिकों के रूप में हर एक की जिम्मेदारी बढ़ गई है।हर एक व्यक्ति ने पुर्णिमा की रात घर और आंगन में बिजली बंद रखकर अपनी नैतिक दायित्व निभाना चाहिए।

उपराजधानीसही हवी स्वत:ची ‘डबेवाला” प्रणाली

नागपूर:- लाखोची लोकसंख्या, लक्षावधी नोकरदार आणि व्यापारी यांचे टिफिन्स, योग्य पत्त्यावर आणि अचूक वेळेत वितरण. मुंबईच्या डबेवाल्यांनी आपल्या उत्कृष्ट व्यवस्थापनासह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्डमध्ये नाव नोंदवले आहे. कोट्यवधी लोकांना घरचे अन्न भरलेल्या डब्यांची गरज आहे, जी आता आपल्या शहरालाही भासत आहे. दुस-या शब्दांत, आता ऑरेंजसिटीला स्वतःचा डबेवाला आवश्यक आहे. ऑरेंजसिटी हे मध्य भारताचे व्यावसायिक केंद्र आहे. येथे शेकडो व्यापारी आहेत ज्यांची दुकाने त्यांच्या घरापासून दूर आहेत. अशा परिस्थितीत, त्यांना बर्‍याचदा जेवणाच्या वेळी जास्त वेळ वाट पहात थांबावं, ताटकळावं लागतं. बर्‍याच वेळा जेवनामुळे दुकानांत उशीरा पोहोचतात. बर्‍याचदा दुकानातील कर्मचार्‍यांना घरी पाठवून खायला डबे बोलावले जातात. अशा परिस्थितीत दुकानात कर्मचा-याचा योग्य उपयोग होऊ शकत नाही.

तथापि, शहरातील व्यावसायिक भागात असे काही लोक आहेत जे आपल्या घरातून टिफिन आणून देतात. ही सेवा गेल्या 10 ते 15 वर्षांपासून कार्यरत आहे परंतु अद्याप असंघटित आहे. जर या क्षेत्राल संगठित केले गेले तर नागपूरातील जवळजवळ सर्वच व्यापारी आपल्या घरातून टिफिन मागवण्यास सुरवात करतील. आयटी व्यावसायिक, खासगी नोकरदारांची आत्यंतिक गरज: नागपूर शहर खूप वेगाने वाढत आहे. कोरोना संकटकाळाकडे दुर्लक्ष करून हजारो आयटी व्यावसायिक आयटी पार्क, मिलान, बुटीबोरी एमआयडीसी, हिंगणा एमआयडीसी यासारख्या क्षेत्रात कार्यरत शेकडो आयटी कंपन्यांमध्ये कार्यरत आहेत.

त्यापैकी बहुतेक बाहेरील शहरांतील आहेत. कार्यालय असो वा भाड्याचे घर, त्यासाठी टिफिन आवश्यक आहे. जर ऑरेंजसिटीची डबेवाला व्यवस्था असेल तर प्रत्येकजण त्यांच्या कार्यालयातच घरचे चांगले जेवण घेण्यास सक्षम असतील. सरकारी कर्मचा-यांची धावपळ, गृहिणींचा व्याप कमी होईल: आपल्या शहरातील सरकारी कर्मचा-यांची संख्याही हजारोवर आहे. हायकोर्ट, नॅशनल टॅक्स अकॅडमी, नॅशनल फायर कॉलेज, रिझर्व्ह बँक यासारख्या अनेक राष्ट्रीय संस्था व्यतिरिक्त राज्य सरकारची अनेक महत्त्वाची कार्यालये शहरात आहेत. सकाळी दहा ते सायंकाळी 6 या वेळेत कर्तव्य बजावणा-या या सरकारी कर्मचा-यांना टिफिनसह कार्यालयात धाव घ्यावी लागत आहे.

बहुतेक समस्या घरगुती महिलांना भेडसावत आहेत ज्यांना सकाळी मुलांना शाळेची वा अन्य तयारी करून द्यावी लागते आणि पुन्हा पतीच्या टिफिनसाठी घाम गाळावा लागतो. जर शहरात डबेवाले असतील तर मुंबईच्या धर्तीवर गृहिणी आरामात चांगले जेवण बनवू शकतील आणि डबेवाल्यांच्या मदतीने के कार्यालयही वेळेवर पोहोचेल. अलीकडेच मुंबईतील डबेवाल्यांनी त्यांच्या अचूक कामगिरीने जगभरात नाव कमावले आहे. हजारो लाखो टिफिनपैकी 99.9 टक्के टिफिन योग्य पत्त्यावर, योग्य वेळी आणि योग्य वेळी कोणतीही चुक न करता वितरित करणे सोपे नाही. अशा परिस्थितीत मुंबईच्या या डबेवाल्यांनी नागपुरातही ही सेवा सुरू करावी. व नागपुरातील हजारो लोकांना दिलासा ज्याला अशी मागणी जोर धरू लागली आहे

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