इमामबाड़ा में 32 बिस्तरों वाला एनएमसी-साई अस्पताल आज से शुरू हो रहा है

नागपुर:- साईं मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से नागपुर महानगर पालिका (NMC), सोमवार से इमामबाड़ा में 32-बेड कोविद अस्पताल शुरू करने के लिए तैयार है। रेलवे की मदद से, नागरिक निकाय बुधवार से सदर के 47 बेड के कोविद अस्पताल में ऑपरेशन शुरू करने की संभावना है। 22 सितंबर को साईं मंदिर ट्रस्ट और नागरिक निकाय ने इमामबाड़ा में कोविद अस्पताल चलाने के लिए एक समझौते की सूचना दी।

ट्रस्ट के अध्यक्ष ओमप्रकाश ‘मुन्ना’ यादव और ट्रस्टी डॉ. रवींद्र ’छोटू’ भोयर, जो एक नगरसेवक भी हैं, ने बताया “हम बुधवार से कोविद -19 रोगियों का उपचार और उपचार शुरू करेंगे। इलाज मुफ्त होगा। मरीजों को दवाओं और इंजेक्शनों पर भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि एनएमसी इसकी आपूर्ति करेगा। ”

डॉ.भोयर ने कहा, “वेंटिलेटर प्राप्त करते ही आठ बेड को आईसीयू में बदल दिया जाएगा।” अस्पताल को 23 सितंबर से ऑपरेशन शुरू करना था। निगम के एक व्यक्ति ने आपत्ति जताई थी और अब इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है। इसके अलावा, ट्रस्ट को एम्बुलेंस और कोविद रोगियों के लिए अलग प्रवेश और निकास की व्यवस्था करनी थी क्योंकि एनएमसी भी एक ही परिसर में एक अलगाव अस्पताल चलाता है।

एनएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त राम जोशी ने कहा, “सदर में विकसित एनएमसी का कोविद अस्पताल संभवत: बुधवार से शुरू होगा। रेलवे डॉक्टरों को प्रदान करने के लिए सहमत हो गया है और एनएमसी आरएमओ, नर्सों और परिचारकों की सुविधा प्रदान करेगा। ”

दोनों अस्पतालों के संचालन के बाद, 79 बेड शहर की कुल कोविद उपचार क्षमता में जोड़े जाएंगे। ये दोनों अस्पताल उन पाँचों का हिस्सा हैं, जिन्हें तत्कालीन नगरपालिका आयुक्त तुकाराम मुंडे ने डॉ. योगेंद्र सवाई और डॉ. प्रवीण गंटावर के साथ मई में संरक्षक मंत्री नितिन राउत द्वारा स्वीकृत धन की सहायता से विकसित किया था। हालांकि, सभी पांच अस्पतालों को मैनपावर की कमी के कारण शुरू नहीं किया जा सका।

अगस्त मध्य में LAD चौक पर 110 बेड वाला एक अस्पताल शुरू किया गया था। कुछ दिनों पहले, एनएमसी ने पचपौली में एक और शुरुआत की थी जो गर्भवती कोविद रोगियों के लिए विशेष अस्पताल है। रविवार तक, कुल 110 बेड में से 25 ऑपरेशन में हैं और जल्द ही संख्या बढ़ने की संभावना है। जोशी ने कहा कि केटी नगर में जल्द ही 100 बेड के साथ पांचवां अस्पताल शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। एनएमसी के दावे के अनुसार, कोविद -19 रोगियों के लिए 53 अस्पतालों में 3,436 बिस्तर शहर में उपलब्ध हैं।



राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) ५१ व्या वर्धापनदिनानिमित्त रक्तदान

रक्ताची भासत होती गरज मग दिली एनएसएस ला हाक ,कोरोनाचा वाढता प्रादुर्भाव पाहता व नागपूर शहरात रक्ताची कमतरता पडू नये  म्हणून .

कोरोना महामारीच्या या काळात मोठ्या प्रमाणात रक्ताचा तुटवडा असल्यामुळे गरजु रुग्णांना रक्त मिळत नाही. अशा या काळात तायवाडे महाविद्यालयाचा विद्यार्थी व   एनएसएस स्वयंसेवक राहूल मनोहर जिभकाटे यांनी राज्य रक्त संक्रमण परिषद महाराष्ट्र राज्य  (         SBTC  ) येथील शासकीय ब्लड बॅंकेत , सोमवार रोजी रक्तदान शिबिराचे आयोजन केले होते. सक्षम अधिकारी नागपूर यांच्या उपस्थितीत यावेळी रक्तदात्यांनी कोरोना योध्दाप्रमाणे येवून उस्फुर्तपणे रक्तदान केले. या रक्तदान शिबीरामुळे गरजु रुग्णांना नक्कीच या रक्ताची मदत होईल, कारण मी  नागपूरात अपघात ग्रस्त रक्षक म्हणून नेहमी काम करत असतात अपघात झाल्यानंतर रक्त किती महत्वाचे असते .असे राहूल जिभकाटे यांनी सांगितले  यावेळी  रासेयो स्वयंसेवक  अभिषेक धुर्वे गौरव शाहू  विनोद हजारे रोहीत जिभकाटे शुभम वाघमारे यांनी महत्त्वपूर्ण योगदान दिले. 

 कोरोना_योद्धा_सन्मान प्रमाणात देऊन सन्मानित करण्यात आले.  तसेच मास्क व सॅनिटायझर देण्यात आले.यात प्रशासनाच्या सुचनांच्या आदेशानुसार  चे पालन करण्यात आले .

महापौर संदीप जोशी यांचे आवाहन : शनिवारी व रविवारी घरातच राहा

नागपूर शहरातील कोरोना रुग्णांची संख्या कमी वाटत असली किंवा ‘रिकव्हरी रेट’जरी जास्त दिसत असला तरी संक्रमण खूप जास्त वाढले आहे. शहरात कोरोनाचा धोका टळलेला नाही. त्यामुळे प्रत्येकाने स्वत:ची जबाबदारी ओळखावी. स्वत:सह इतरांचाही जीव धोक्यात घालू नये. स्वत:वर बंधने घालून जबाबदारीने या शनिवारी आणि रविवारी (२६ आणि २७ सप्टेंबर) ‘जनता कर्फ्यू’चे पालन करावे, असे आवाहन महापौर संदीप जोशी यांनी केले आहे.

शहरातील कोव्हिडचा धोका वाढत असतानाच संक्रमणाची साखळी खंडीत करणे आवश्यक आहे. बेजबाबदारपणे रस्त्यावर, सार्वजनिक ठिकाणी फिरणा-या काही लोकांमुळे नियमांचे पालन करणा-यांचाही जीव धोक्यात आला आहे. कोरोनाची साखळी खंडीत व्हावी, नागरिकांनाही शिस्त लागावी यासाठी शहरातील सर्व जनप्रतिनिधींच्या सूचनेवरून महापौर संदीप जोशी यांनी १९ व २० सप्टेंबर आणि २६ व २७ सप्टेंबर रोजी ‘जनता कर्फ्यू’ लागू करण्याची घोषणा केली होती. १९ व २० सप्टेंबर रोजी लागू करण्यात आलेल्या ‘जनता कर्फ्यू’मध्ये शहरातील नागरिकांनी उत्तम प्रतिसाद दिला. मात्र काही ठिकाणी बेजबाबदार वर्तनही दिसून आले. महापौरांनी घोषित केलेला दुसरा ‘जनता कर्फ्यू’ शनिवारी आणि रविवारी (२६ आणि २७ सप्टेंबर) रोजी लागू करण्यात येत आहे.

यासंदर्भात जनतेसाठी जारी केलेल्या संदेशात महापौर संदीप जोशी म्हणाले, झपाट्याने वाढणारी कोरोनाबाधितांची संख्या ही चिंतेची बाब आहे. आपल्या प्रत्येकाच्याच घरात लहान मुले आहेत, वृद्ध माता-पिता, आजी आजोबा आणि आजारी व्यक्तीही आहेत. त्यामुळे आपल्या स्वत:च्या जीवाची काळजी घ्या. आपल्या कुटुंबातील प्रत्येक सदस्याची काळजी घ्या. त्यासाठी आठवड्यातील दोन दिवस घरातच राहण्याची सवय बाळगा. आपला बेजबाबदारपणा इतर कुणाच्याही जीवावर उदार होउ देउ नका. स्वत:सह आपले आप्तगण, कुटुंबिय सर्वांच्या सुरक्षेसाठी ‘जनता कर्फ्यू’चे पालन करा. शहरातील सर्व जनप्रतिनिधी, नगरसेवक आणि सर्व राजकीय पक्षांच्या वतीने सर्वांना हात जोडून विनंती करतो की, स्वत:साठी नव्हे किमान आपल्या परिवारासाठी घरातच राहा, असे भावनिक आवाहनही महापौरांनी केले आहे. 

स्कूल लगे ही नहीं , फिर भी एक्टिविटी फीस के नाम पर पैरेंट्स की जेब ढीली करने में लगे स्कूल

पैरेंट्स की डिमांड है कि एजुकेशन डिपार्टमेंट स्कूलों पर कार्रवाई करें, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है। कोरोना महामारी के चलते ई-लर्निंग करवाई जा रही है इसके बावजूद भी प्राइवेट स्कूल मनमानी फीस वसूल कर बच्चों के पैरेंट्स की जेब ढीली करने में लगे हैं।

नागपुर में जो हालात देखने को मिल रहे है, उसके पीछे का कारण यह है, कि महाराष्ट्र एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट 2011 के प्रावधान के तहत राज्य की सरकार को स्कूलों की फीस तय करने के अधिकार नहीं है।अपनी फीस स्कूल खुद ही तय करेंगे।यही नियम स्कूलों के लिए ढाल का काम कर रहा है।

इसी एजेंडे के तहत मंगलवार को शहर के दत्तवाड़ी स्थित जिंदल पब्लिक स्कूल में पैरेंट्स ने फीस का विरोध किया। स्कूल, पैरेंट्स को एक्टिविटी फीस जमा करने के लिए कह रहा है, नहीं जमा करने पर स्टूडेंट्स को परीक्षा से वंचित रखने की चेतावनी दी गई है। 

पैरेंट्स ने स्कूल मैनेजमेंट के इसी रुख के खिलाफ लिखित में अपना विरोध व्यक्त किया है।देखा जाए तो  यह पहला मामला नहीं है, शहर के अधिकांश जाने माने स्कूलों की स्थिति यही है। स्कूल पैरेंट्स को ट्यूशन फीस, ई-लर्निंग फीस, अमाल्गामेटेड फंड और कई इंस्टॉलमेंट में फीस भरने के लिए कहते हैं। आए दिन शहर के बहुत से स्कूलों के सामने पैरेंट्स के आंदोलन जारी है। इसके पहले भी कई स्तरों पर शिकायतें दर्ज हुई हैं। परन्तु इतनी शिकायतों के बावजूद अब तक शिक्षा विभाग स्कूलों पर नियंत्रण लगाने में नाकाम रहा है।

नियमों में हमारे पास कई प्रकार के अधिकार हैं, जिससे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मामले में हमने जांच भी शुरू कर दी है, जिसका परिणाम जल्द ही सबके सामने होगा।   – अनिल पारधी, शिक्षा उपसंचालक नागपुर

स्कूलों की मनमानी फीस का मुद्दा हमारे संज्ञान में है, लेकिन न्यायालयीन मामलों के कारण कुछ बंदिशे हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि स्कूल अनाप-शनाप फीस वसूल करेंगे। 

पैरेंट्स को राहत देने के लिए स्टेट गवर्नमेंट ने 8 मई 2020 को जीआर जारी किया था।जिसने स्कूलों में फीस वृद्धि पर रोक लगाई।पैरेंट्स को फीस जमा करने के लिए इंस्टॉलमेंट व अन्य प्रकार की राहत देने के आदेश दिए गए। पर कई स्कूलों ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस जीआर पर रोक लगा दी। हालांकि स्टेट गवर्नमेंट ने इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट  ने राज्य सरकार को दोबारा हाईकोर्ट के सामने ही अपनी दलीलें रखने के आदेश दिए। तभी से फीस के मेटर पर राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई है।

अब मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण एजुकेशन डिपार्टमेंट भी स्कूल फीस कंट्रोल की दिशा पर वेट एंड वॉच के रोल में है। बस इस हालत का स्कूल लाभ उठा रहे हैं।

सीताबर्डी बाजार को वाहन मुक्त करने की तैयारी ,स्ट्रीट फॉर पीपल सर्वेक्षण का शुभारंभ

नागपुर: वर्ल्ड कार फ्री डे के उपलक्ष्य पर स्ट्रीट फॉर पीपल सर्वेक्षण का शुभारंभ किया गया।इस मुहिम के तहत शहर के मुख्य बाजारों का 7 दिन सर्वेक्षण चलेगा।नागपुर शहर में पॉल्यूशन फ्री वाहनों को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह सराहनीय कदम उठाया गया है। सर्वेक्षण के चलते नागरिकों की प्रतिक्रिया, सूचना व अभिप्राय जानने के बाद भविष्य में इसी तर्ज पर उपाययोजना की नीति बनाई जाएगी।

सीताबर्डी बाजार को वाहन मुक्त करने की संभावनाये तलाशी जा रही है।स्मार्ट सिटी सीईओ महेश मोरोणे और यातायात पुलिस निरीक्षक पराग पोटे ने सीताबर्डी बाजार का निरीक्षण किया। सेंट्रल गवर्नमेंट के गृहनिर्माण व शहरीय विकास मंत्रालय के अंतर्गत इंडिया साइकल्स फॉर चेंज चैलेंज उपक्रम की शुरुआत हुई है।इसी के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के लिए शहर के मुख्य बाजारों का सर्वेक्षण निरीक्षण किया जा रहा है।

हालाकि इन सबसे दुकानदारों के मन में भी कई विचार है जैसे वाहन मुक्त करने पर व्यवसाय पर क्या परिणाम होगा।नागरिक मार्केट में पैदल चल सकेंगे या नहीं।मोरोणे ने नागरिकों से चर्चा में कहा कि वाहन मुक्त जोन करने पर हॉकर्स की सुविधा होगी। चार पहिया और दो पहिया वाहनों के लिए दूसरी जगह व्यवस्था की जाएगी।

इसी के दौरान बुजुर्ग व महिलाओं को पैदल चलने में परेशानी होने का प्रश्न उपस्थित किया। इस प्रश्न पर मोरोणे ने कहा कि उन लोगों के लिए ई-रिक्शा की और साइकिल की व्यवस्था की जाएगी। युवा वर्ग भी इसी बहाने साइकिल का लाभ ले सकेंगे। इसी के साथ दुकानों में रात के समय माल लाने-लेजाने की अनुमति दी जाएगी।

मनपाचे कामात अजून सुधार आवश्यक : देवेंद्र फडणवीस

नागपूर शहरातील कोव्हिडची स्थिती दिवसेंदिवस वाढत आहे. मात्र या सर्वांमध्ये नागरिकांच्या तक्रारींचा ओघ कमी झाल्याचे दिसून येत आहे. चाचण्यांची संख्या, बेड्सची उपलब्धता, रुग्णवाहिका, कोव्हिड केअर सेंटर आणि इतर बाबी समाधानकारक आहेत. पुढील काही दिवसात आणखी रुग्णांची संख्या वाढण्याची शक्यता आहे. मात्र वाढत्या रुग्णसंख्येची चिंता न करता रुग्णांना उपचार मिळवून देणे, त्यांचे कॉन्टॅक्ट ट्रेसिंग आणि इतर सर्व बाबींचे व्यवस्थापन कसे करता येईल, याकडे लक्ष द्या, असे सांगून शहरातील कोव्हिड संदर्भातील महानगरपालिकेचे कार्यात अजून सुधारणा करण्याची सूचना विधान सभेचे विरोधी पक्षनेते देवेंद्र फडणवीस यांनी केली. त्यांनी मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. यांच्या कार्याचे कौतुक केले आणि सांगीतले की, महापौर संदीप जोशी आणि मनपा आयुक्त सोबत कार्य करत आहे. यांचा चांगला संदेश नागरिकांमध्ये गेला आहे.

विरोधी पक्षनेते देवेंद्र फडणवीस यांनी सोमवारी (ता.२१) शहरातील कोव्हिड स्थितीचा आढावा घेतला. मनपा मुख्यालयातील आयुक्त कक्षात झालेल्या बैठकीत त्यांच्यासमवेत महापौर संदीप जोशी, माजी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, आमदार सर्वश्री गिरीश व्यास, नागो गाणार, कृष्णा खोपडे, विकास कुंभारे, उपमहापौर मनीषा कोठे, स्थायी समिती सभापती विजय (पिंटू) झलके, सत्तापक्ष नेते संदीप जाधव, मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी., ज्येष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी, अतिरिक्त आयुक्त सर्वश्री जलज शर्मा, राम जोशी, संजय निपाणे, उपायुक्त निर्भय जैन, प्रभारी उपायुक्त अमोल चौरपगार, वैद्यकीय आरोग्य अधिकारी डॉ. संजय चिलकर, वैद्यकीय अधिकारी डॉ. भावना सोनकुसळे, टाटा ट्रस्टचे डॉ. टिकेश बिसेन आदी उपस्थित होते.

यावेळी मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. यांनी शहरातील कोव्हिडची सद्यस्थिती आणि नागपूर महानगरपालिकेतर्फे सुरू असलेल्या उपाययोजनांची सादरीकरणाद्वारे माहिती दिली. ते म्हणाले, शहरातील महत्वाच्या आरोग्य सुविधा सुधारण्याकडे मनपाचे प्रयत्न सुरू आहेत. शहरातील सद्या ४२ खाजगी रुग्णालयांमध्ये कोव्हिड रुग्णांचे उपचार सुरू आहेत. इतरही रुग्णालयांमध्ये सेवा सुरू करण्याबाबत कार्य सुरू आहे. खाजगी रुग्णालयांकडून काढण्यात येणा-या देयकाचे बिलाचे ऑडिट (अंकेक्षण) करण्यासाठी ऑडिटर (अंकेक्षक) नियुक्त करण्यात आले आहेत. याशिवाय प्रत्येक झोनमध्ये प्रत्येकी ५ ॲम्ब्यूलन्स यासह एकूण ६५ रुग्णवाहिका नागरिकांच्या सेवेत आहेत. यामुळे रुग्णवाहिका उपलब्ध होत असल्याच्या तक्रारी कमी झाल्या आहेत. शहरात दररोज ६५०० ते ७ हजार कोव्हिड चाचण्या केल्या जात आहेत. यामध्ये आणखी आरटीपीसीआर चाचण्यांची संख्या वाढविण्यात येत आहे.

कॉन्टॅक्ट ट्रेसिंगमध्ये येत असलेल्या त्रुट्यांमुळे मध्यंतरीच्या काळात अनेक अडचणी येत होत्या. त्याकडे कटाक्षाने लक्ष देउन आता कॉन्टॅक्ट ट्रेसिंग सुरळीत करण्यात आले आहे. मनपाची रुग्णालये सज्ज असून वैद्यकीय कर्मचा-यांच्या अभावी ते सुरू करण्यास अडचण होती. यावरही उपाय शोधण्यात आले आहेत. रेल्वेने काही दिवसांपूर्वीच मनपाला रुग्णालय देण्याचे जाहिर केले होते. मात्र तांत्रिक अडचणीमुळे काही दिवस ते रुग्णालय सुरू न करता येउ शकल्याने तेथील वैद्यकीय चमू मनपाच्या सदर येथील आयुष रुग्णालयात सेवा देणार आहे. त्यामुळे मनपाच्या सदर येथील रुग्णालयात कोव्हिड उपचार केले जाईल. याशिवाय मनपाच्या आयसोलेशन हॉस्पिटलची जबाबदारी शहरातील साई मंदिर ट्रस्टने घेतली आहे. इंदिरा गांधी रुग्णालयातही उपचार सुरू करण्यात आले आहे.

पाचपावली रुग्णालयात कोव्हिड पॉझिटिव्ह गरोदर मातांवर उपचार व त्यांची प्रसूती सुरू करण्यात आली आहे. इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व रुग्णालय (मेयो) येथील शिक्षण पूर्ण झालेले ६० डॉक्टर आणि शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व रुग्णालयातील (मेडिकल) येथून शिक्षण पूर्ण केलेल्या २०० डॉक्टरांना लवकरच नियुक्ती देण्यात येत आहे. त्यामुळे महत्वाचा वैद्यकीय कर्मचा-यांचा प्रश्न सुटला आहे. सप्टेंबर महिन्याअखेरीस मनपाकडे मनपा रुग्णालयांचे ४०० बेड्स उपलब्ध होतील, असेही आयुक्तांनी यावेळी सांगितले.

‘जम्बो हॉस्पिटल’ ऐवजी छोट्या रुग्णालयांवर भर द्या

नागपूर शहरात ‘जम्बो हॉस्पिटल’ तयार करणे प्रस्तावित आहे. त्याचे काम लवकरच सुरू केले जाईल, अशी माहिती आयुक्त राधाकृष्णन बी. यांनी बैठकीत दिली. शहरात ‘जम्बो हॉस्पिटल’ उभारण्याऐवजी २०० ते ३०० बेड्सची छोटी रुग्णालये उभारा, अशी सूचना यावेळी विरोधी पक्षनेते देवेंद्र फडणवीस यांनी केली. एकाचवेळी एक हजार किंवा त्यापेक्षा जास्त बेड्सचे ‘जम्बो हॉस्पिटल’ मध्ये व्यवस्थापनाच्या दृष्टीने त्यात अनेक अडचणी येतात. रुग्णांना उत्तम सुविधा मिळावी, रुग्ण तसेच वैद्यकीय चमूंचे कार्य सुरळीत चालावे यासाठी छोटी रुग्णालये तयार करा. त्यात आवश्यक त्या सर्व सुविधा उपलब्ध करून द्या. शहरातील काही रिकाम्या इमारतींचा यासाठी वापर करता आल्यास त्यादृष्टीने विचार करा, त्यामुळे झटपट कार्यवाही सुरू होईल, असेही ना. देवेंद्र फडणवीस म्हणाले.

बेड्सच्या उपलब्धतेचे ‘एसएमएस’ पाठवा

रुग्ण पॉझिटिव्ह आल्यानंतर ते मनपाच्या नियंत्रण कक्षात बेड्सच्या उपलब्धतेसाठी फोन करतात. त्यांची संबंधित रुग्णालयांची माहिती दिली जाते. मात्र प्रत्यक्ष हॉस्पिटलमध्ये गेल्यानंतर त्यांना परत पाठविण्याचा प्रकार घडतो. यावर उपाय म्हणून ‘एसएमएस’ प्रणाली अंमलात आणावी, अशीही सूचना विरोधी पक्षनेते देवेंद्र फडणवीस यांनी केली. यामध्ये रुग्णाने नियंत्रण कक्षात फोन करताच त्याची संपूर्ण माहिती मागवून घेणे, त्यानंतर त्याची ऑक्सिजनची स्थिती विचारणे, संबंधित रुग्णाला हॉस्पिटलमध्ये भरती करण्याची गरज असल्यास त्याला बेड्स उपलब्ध असणा-या संबंधित रुग्णालयाची माहिती देणे व लगेच त्यासंबंधी रुग्णाच्या मोबाईल नंबरवर त्यासंबंधीचे ‘एसएमएस’ पाठवायचे. ‘एसएमएस’ हे हॉस्पिटलमध्ये रुग्ण तातडीने दाखल करण्यासाठी ‘टोकन’ची भूमिका निभावेल व संपूर्ण प्रक्रियेत सुसूत्रता येईल, असेही ते म्हणाले.

‘कोव्हिड संवाद’ स्तूत्य उपक्रम

कोव्हिड संदर्भात नागरिकांमध्ये असलेली भीती आणि संभ्रम दूर करण्यासाठी मनपामध्ये महापौर संदीप जोशी यांच्या संकल्पनेतून ‘कोव्हिड संवाद’ हा फेसबुक लाईव्ह उपक्रम सुरू करण्यात आला आहे. यासंबंधी महापौर संदीप जोशी यांनी बैठकीत माहिती दिली. ‘कोव्हिड संवाद’मध्ये दररोज शहरातील विविध क्षेत्रातील तज्ज्ञ डॉक्टरांना आमंत्रित केले जाते. संबंधित डॉक्टर यासंबंधी सविस्तर मार्गदर्शन करून नागरिकांच्या शंका आणि प्रश्नांचे निरसन करतात. या उपक्रमाला नागपुरकरांचा उत्तम प्रतिसाद मिळत असून तो पुढेही सुरू ठेवण्यात येणार आहे, असेही महापौरांनी सांगितले. आजच्या स्थितीत नागरिकांना योग्य माहिती मिळणे व त्यांना भेडसावणा-या समस्या सोडविण्यासाठी व्यासपीठ उपलब्ध असणे अत्यावश्यक आहे. यासंबंधी नागपूर महानगरपालिकेने घेतलेला पुढाकार अत्यंत स्तूत्य आहे, अशा शब्दांत विरोधी पक्षनेते देवेंद्र फडणवीस यांनी ‘कोव्हिड संवाद’ची प्रसंशा केली. जास्तीत जास्त नागरिकांपर्यंत हा कार्यक्रम पोहोचावा यासाठी त्यांच्या स्वत:च्या फेसबुक पेजवरूनही प्रसारीत करण्याची सूचना ना. देवेंद्र फडणवीस यांनी दिली.

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नागपुर पुलिस डिपार्टमेंट ने रेडी किया खुद का कोविड सेंटर,आज सीपी करेंगे उदघाटन

नागपुर शहर में बढ़ते कोरोना मामलों के चलते पुलिस विभाग भी धीरे धीरे इसकी चपेट में आते जा रहा है।अब तक कोरोना 1386 वॉरियर्स पुलिस कर्मी संक्रमित हो चुके हैं।इसके साथ ही कोरोना संक्रमण से कुल 15 पुलिस ऑफिसर्स की मौत हो चुकी है।यहां तक कि प्राइवेट हॉस्पिटल्स में पुलिस कर्मियों के लिए बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु हो रही थी इसी वजह से पुलिस विभाग ने अपना कोविड सेंटर रेडी किया है (Image used for representation purpose only)

एडवांस सुविधाओं से लेस यह सेंटर के बन जाने से पुलिस डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को काफी राहत मिल सकती है।सीपी अमितेशकुमार के आदेश पर डीसीपी (क्राइम ब्राच) गजानन राजमाने और पुलिस वैद्यकिय अधिकारी डॉ. संदीप शेंडे ने पुलिस हॉस्पिटल में 5 दिनों के अंदर कोविड सेंटर का निर्माण किया । 

पुलिस हॉस्पिटल के कोविड केयर सेंटर में टोटल 16 बेड की फैसिलिटी की गई है, जिसमें 3 बेड कैज्यूल्टी और 13 बेड आईसीयू में रहेगे।इसके अलावा 2 वेन्टीलेटर, ऑक्सीजन की नई सेंटर लाइन तैयार की गई है।मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की मुश्किलें नहीं आए इसलिए अतिरिक्त 8 स्टाफ हायर किया गया है।जिसमे 1 फिजिशियन, 2 बीएमएएस डॉक्टरों समेत कुल 16 लोगों को स्टाफ पेशेंट्स की सेवा में दिन रात लगा रहेगा।वर्तमान में ‘बी’ और ‘सी’ कैटिगिरी के पेशेंट्स को किसी हॉस्पिटल में बेड की समस्याओं से टाइम पर इलाज़ नहीं मिलने के कारण कई लोगों की घर में ही मौत हो गई थी। ऐसा न हो इसलिए ‘बी’ श्रेणी के सर्दी, खासी, बुखार वाले मरीजों को और ‘सी’ श्रेणी में आने वाले क्रिटिकल कोविड मरीजों को ही सेंटर में उपचार दिया जाएगा। 

इसके बाद प्राथमिक इलाज़ देने के बाद अन्य हॉस्पिटल्स में बेड मिलने पर उन्हें वहां शिफ्ट किया जाएगा।प्राइवेट हॉस्पिटल्स में फोन करने पर उन्हें बेड उपलब्ध होने की जानकारी मिलती है, लेकिन 3-4 घंटे की यात्रा करने के बाद नागपुर पहुंचने तक बेड फूल हो जाते है। ऐसे में संक्रमित और परिवार को हॉस्पिटल्स के चक्कर काटने पड़ते है।इसी बात को नज़र में रखते हुए विदर्भ के किसी भी पुलिस कर्मी और उसके परिवार को पुलिस कोविड केयर सेंटर में निशुल्क उपचार देने की फैसिलिटी की गई है।   और तो और सिर्फ नागपुर के ही नहीं बल्कि विदर्भ के किसी भी जिले से आने वाले कोरोना पीढ़ित पुलिस कर्मी का इलाज किया जाएगा।कई पुलिस कर्मी अकोला, अमरावती, यवतमाल से शहर में इलाज़ करवाने आते है।

मेडिकल में होगा कोविशिल्ड का मानवी परीक्षण: १०० व्यक्तियों को चुना जाएगा

नागपुर: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में विकसित हो रहे कोविशिल्ड कोरोना वैक्सीन का जल्द ही नागपुर के मेडिकल अस्पताल में मानवील परीक्षण किया जाएगा।

वैक्सीन का विकास ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, अस्ताज़नेका और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयासों से पुणे में किया जा रहा है। इसका परीक्षण देश भर के 17 स्थानों के साथ-साथ नागपुर मेडिकल अस्पताल में भी किया जाएगा। पहले चरण में, 100 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा। इच्छुक का पंजीकरण अगले सप्ताह शुरू होगा।

एक ओर, जहा पूरी तरह से भारत में निर्मित होने वाले कोवाक्सीन वैक्सीन का मानव परीक्षण नागपुर में चल रहा है और दूसरा चरण पूरा हो चुका है। और अब कोव्हीशिल्ड भी नागपूर में परिक्षण चलाएगी यह खबर काफी राहत दिलाने वाली हैं

हालांकि, कोविशिल्ड वैक्सीन का अंतिम परीक्षण 22 अगस्त से शुरू भी हो गया है। यह पूरे भारत में 17 स्थानों पर कुल 1600 रोगियों पर किया जाएगा। यह प्रत्येक स्थान पर 100 रोगियों पर किया जाएगा। 18 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के स्वस्थ लोगों को इसके लिए चुना जाएगा। पहले दिए जाने के 28 दिन बाद दूसरा दिया जाएगा। वह सब लोग 56 वें दिन अस्पताल में चिकित्सा परीक्षा से गुजरेंगे। 90 वें दिन टेलीफोनीक जांच होगी और 180 वें दिन अस्पताल में एक और जांच होगी।

इस बीच, उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जाएगी। नागपुर में, टीके की सुरक्षा और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने की इसकी क्षमता का परीक्षण किया जानेवाला है यह जानकारी प्रमुख अन्वेषक डॉ. सुशांत मेश्राम ने दी। ट्रायल छह महीने तक चलेगा। अधिष्ठाता डॉ सजल मित्रा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ अविनाश गावंडे, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ शिल्पा गुप्ता, डाॅ सुशांत मुळे, डॉ रवि यादव, डाॅ अलीना एलेक्जेंडर इस परीक्षण की सह-अन्वेषक हैं। वर्तमान में प्रभारी डॉ। सुधीर गुप्ता भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।‌‌

मनकापुर डिवीजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में जल्द ही शुरू हो सकता है 1000 बेड वाला जंबो कोविड सेंटर

पालक मंत्री नितिन राउत ने मनकापुर में डिवीजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के विशाल परिसर में 1,000 बेड की क्षमता वाला एक जंबो कोविड हॉस्पिटल विकसित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है।फिलहाल सरकारी और निजी-संचालित डेडिकेटेड कोविद हॉस्पिटल्स (DCHs) में समय पर प्रवेश और उपचार प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है।

नागपुर को यह जंबो कोविद सेंटर चलाने की परमिशन भी मिल गई है।लगभग 85 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई यह परियोजना यह भी बताती है कि महामारी के जल्द ही खत्म होने की संभावना नहीं है।

राउत ने रविवार को एक बैठक की और परियोजना को अंतिम रूप दिया।”एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जल्द ही मंगाई जाएगी। संभागीय खेल परिसर में उपलब्ध खुली जगह में निजी एजेंसी द्वारा कोविद अस्पताल विकसित किया जाएगा।डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, स्वच्छता कर्मचारियों और अन्य सहायक श्रमशक्ति को निजी एजेंसी द्वारा प्रदान किया जाएगा। ” ( Image is just for representation)

परियोजना के लिए छह स्थानों को शॉर्टलिस्ट किया गया था – संभागीय खेल परिसर,राधा सौमी सत्संग ब्यास,शालिनीताई मेघे अस्पताल,यशवंत स्टेडियम, पटवर्धन ग्राउंड और वीसीए स्टेडियम।

राउत ने कहा, “कोविद अस्पताल पूरे विदर्भ के रोगियों को भी सहायता देगा।इसे इस तरह से विकसित किया जाएगा कि एयरोसोल बूंदों में वायरस नष्ट हो जाए। ” मंत्री ने यह भी कहा कि कोविद अस्पताल मध्यम और महत्वपूर्ण कोविद -19 रोगियों के लिए होगा। “इसमें आईसीयू और सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी,” उन्होंने कहा।

राउत ने मुंबई में अवधारणा के सफलतापूर्वक लागू होने के बाद शहर के जंबो कोविद अस्पताल के लिए योजना बनाई है। मुंबई में पांच जंबो कोविद अस्पताल कथित तौर पर ऑपरेशन में हैं। राज्य की राजधानी की तर्ज पर, पुणे तीन ऐसे अस्पताल विकसित कर रहा है – दो शहर में और एक पिंपरी-चिंचवाड़ में – जो अब अंतिम चरण में हैं।

संभागीय आयुक्त संजीव कुमार, नगर निगम आयुक्त तुकाराम मुंढे, कलेक्टर रवींद्र ठाकरे और स्वास्थ्य विभाग और सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया और कथित तौर पर जंबो कोविद अस्पताल के लिए सहमति प्रदान की।जिले ने अगस्त की शुरुआत से कोरोनवायरस मामलों में रिकॉर्ड स्पाइक देखना शुरू कर दिया है।11 मार्च से 31 जुलाई के बीच 143 दिनों में 5,392 मामले सामने आए। अगस्त के 16 दिनों में जिले में 10,527 मामले दर्ज किए गए। बढ़ती संख्या में लक्षणात्मक और गंभीर रोगियों के प्रवेश और उपचार में बाधा आ रही है।

शनिवार को, हृदय रोगी  एक 14 वर्षीय लड़के को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।जब उसने पॉजिटिव परीक्षण किया, तो अस्पताल ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और वहां के अधिकारियों को सूचित किए बिना आईजीजीएमसीएच भेज दिया। वेंटिलेटर सपोर्ट पर मौजूद मरीज को एम्बुलेंस में करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि IGGMCH ने वेंटिलेटर के साथ बेड उपलब्ध नहीं होने का हवाला दिया।हालांकि बाद में लड़के को भर्ती कर लिया गया, लेकिन रविवार सुबह उसकी मौत हो गई।

ऐसी ही स्थिति अन्य पाँच निजी DCH पर भी है। लक्षणों से पीड़ित एक 74 वर्षीय महिला को ट्रस्ट द्वारा संचालित अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसने रविवार की उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया। शाम 6 बजे तक मरीज को निजी DCH में प्रवेश नहीं मिला। मरीज के बेटे को उसे वापस घर ले जाना पड़ा।

देरी से शुरू होने के बाद, जिला प्रशासन ने रविवार को हिंगना के लता मंगेशकर अस्पताल में कोविद रोगियों को भर्ती करना शुरू किया, जो मध्यम लक्षणों वाले रोगियों के लिए एक समर्पित कोविद स्वास्थ्य केंद्र के रूप में काम करेंगे। एक अन्य ट्रस्ट-संचालित संस्थान – शालिनीताई मेघे अस्पताल – स्पर्शोन्मुख रोगियों के लिए कोविद केयर सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है, लेकिन अपनी पूर्ण क्षमता के लिए नहीं।

एक और निजी अस्पताल ने रविवार को कोविद -19 प्रवेश शुरू किया, जिसमें कोरोनोवायरस रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों की संख्या छह थी, हालांकि 10 निजी अस्पतालों के लिए नागपुर महानगर पालिका द्वारा तय की गई समयसीमा एक पखवाड़े पहले ही समाप्त हो गई है।

नागपूर जिल्हयात रेमडीसीव्हर औषधीचा तुटवडा पडणार नाही : जिल्हाधिकारी

नागपूर:- नागपूर जिल्ह्यातील शासकीय व खासगी हॉस्पिटलमध्ये कोरोना आजारासाठी महत्त्वपूर्ण असणाऱ्या रेमडीसीव्हर या औषधांचा तुटवडा पडता कामा नये, असे निर्देश आज जिल्हाधिकारी रविंद्र ठाकरे यांनी पुरवठादार कंपन्यांना दिले आहेत. हॉस्पिटलने अशा पद्धतीचा तुटवडा असल्यास प्रशासनाची मदत घ्यावी, असे आवाहनही जिल्हाधिकाऱ्यांनी केले आहे.

नागपुर मधील काही खासगी हॉस्पिटलनी रेमडीसीव्हर औषधांचा तुटवडा जाणवत असल्याचे जिल्हा प्रशासनाच्या लक्षात आणून दिले होते. जिल्हाधिकारी रविंद्र ठाकरे , जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश कुंभेजकर, अन्न व औषधी प्रशासन विभागाचे उपायुक्त गडेकर यांनी ही बाब लक्षात आल्यानंतर रेमडीसीव्हर पुरवठा करणाऱ्या सिप्ला, हेटेरो, मायलन, गायडस या कंपन्यांच्या नागपूर येथील स्थानिक प्रतिनिधींना याबाबत अवगत केले.

अन्न व औषध प्रशासन विभागाने कोरोना संदर्भातील कोणत्याही औषधा बाबतची कृत्रिम टंचाई जाणवत कामा नये. तसेच नागपूर जिल्ह्यातील शासकीय व खासगी रुग्णालयांमध्ये आवश्यक असणाऱ्या रेमडीसीव्हर औषधांचा नियमित व सुलभ पुरवठा कोवीड रूग्णालयांना प्राधान्याने व्हावा, असे या पुरवठादारांना निर्देशित केले आहे.
औषधांचा तुटवडा असल्याबाबत कोरोना बाधित यांच्या नातेवाईकांना काही ठिकाणी सांगण्यात येत आहे. अशा पद्धतीने औषधांचा तुटवडयाबाबत नागरिकांमध्ये गोंधळ उडवून देऊ नये, अशी सूचनाही जिल्हा प्रशासनाने केली आहे. रुग्ण संख्या वाढत असताना या पद्धतीच्या औषधांचा तुटवडा जाणवणार नाही, यासाठी प्रशासन लक्ष ठेवून आहे.

यापूर्वी ऑक्सिजनच्या पुरवठयाबाबतही अशाच पद्धतीच्या अफवा उडत होत्या. मात्र नागपूर येथील शासकीय व खासगी रुग्णालयांसाठी आवश्यक असणारा पुरेसा ऑक्सिजनचा साठा जिल्हयात उपलब्ध असल्याचे जिल्हाधिकाऱ्यांनी स्पष्ट केले. यासंदर्भातील गठित समिती ऑक्सिजनच्या तुटवड्याचा दररोज आढावा घेत असल्याचे त्यांनी सांगितले आहे. ऑक्सिजन पुरवठा संदर्भात अतिरिक्‍त जिल्‍हाधिकारी श्रीकांत फडके हे नोडल अधिकारी असून तुटवडा संदर्भात O712-2562668 या क्रमांकावर संपर्क साधावा, असे आवाहन करण्यात आले आहे.

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