नवरात्री: मंदिर बंद होने से निराश भक्तों ने किए ऑनलाइन दर्शन

नागपुर: शारदेय नवरात्र उत्सव शनिवार से शुरू हो गया। नागपूर के प्रसिद्ध कोराडी मंदिर में श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान की ओर से शनिवार को नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हुई। कोरोना संक्रमण के फैलने के कारण भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। परंपरा के अनुसार सुबह चार बजे से दस बजे तक स्वयंभू दर्शन और उस के बाद माता का शृंगार चढ़ाया जाता है और ग्यारह बजे घटस्थापना मुहूर्त पर की जाती है।

शनिवार को इन सभी घटनाओं को देखने भक्तों को ऑनलाइन रहने का सहारा लेना पड़ा। संस्थान की घोषणा के बाद भी कुछ भक्त मंदिर परिसर में आ गए, किसी को भी क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि सार्वजनिक नवरात्र उत्सव स्थगित कर दिया गया था। सो परिसर से ही उन्हें संतोष करना पड़ा। मंदिर के पास किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है क्योंकि इलाके में पुलिस और सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। शाम 5 बजे, मंदिर के मुख्य पुजारी केशवराव महाराज फुलझेले ने अखंड सामूहिक मनोकामना ज्योति जलाई।

इस साल 350 ज्योति प्रज्ज्वलित कि गईं। मंदिर के बगल में नहर पर एक विशेष पेंडॉल बनाया गया । अशोक महाराज, रामदास महाराज, राजू महाराज, मुकेश महाराज, संस्थान के ट्रस्टी दत्तू समरितकर, अशोक खानोकर, दीपक बजाज प्रबंधक पंकज चौधरी, गणेश राउत, रूपेश परिहार आदि इस समय उपस्थित थे। पर सामान्य भाविको को यहां पहुंच से वंचित कर दिया गया था।‌‌

उच्च न्यायालयाच्या निर्णयानुसार धम्म चक्र प्रवर्तन दिन अंमलबजावणी: पालक मंत्री

नागपूर: लाखो भाविक धम्मचक्र प्रवर्तन दिनास दीक्षाभूमी दर्शनासाठी येतात, परंतु यावर्षी कोरोना साथीच्या दृष्टीने धार्मिक स्थळांवर शासनाने लादलेल्या मनाईच्या नियमांचे पालन करणे आवश्यक आहे.

या संदर्भात मुंबई उच्च न्यायालयात दाखल केलेल्या याचिकेवरील उच्च न्यायालयाच्या निर्णयानुसार कार्यक्रम आयोजित केले जातील. पालकमंत्री नितीन राऊत यांनी ही माहिती दिली. आंबेडकर महाविद्यालयात या संदर्भात आयोजित बैठकीत ते बोलत होते.

ते म्हणाले की कोविद 19 मुळे 25 सप्टेंबर रोजी स्मारक समितीने धम्मचक्र प्रवर्तन दिन कार्यक्रम आयोजित न करण्याचा निर्णय घेतला होता.

कोणत्याही प्रकारचे यात्रा महोत्सव व धार्मिक स्थळे न उघडण्याचा निर्णय सरकारने घेतला आहे. ज्यामुळे समितीचा निर्णय शासन व प्रशासनाकडे आहे. परंतु प्रशासन उच्च न्यायालयाच्या निर्णयाला बांधील असेल. तोपर्यंत पूर्वतयारी ठेवण्याविषयी ते म्हणाले.

विभागीय आयुक्त संजीव कुमार, जिल्हादंडाधिकारी रवींद्र ठाकरे, मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी, पोलिस आयुक्त अमितेश कुमार, स्मारक समिती अध्यक्ष भंते आर्य नागार्जुन सुरई ससाई, सचिव सुधीर फुलझेले, विलास गजघाटे आदींची यावेळी उपस्थिती होती.

संत हजरत बाबा ताजुद्दीन यांचा वार्षिक उर्स यावेळी साधेपणाने होणार

नागपूर: सर्व देशभर प्रसिद्ध असलेलं संत हजरत बाबा ताजुद्दीन यांचं समाधीस्थळ नागपूरातील ताजबाग येथे देशभरातला मोठा उर्स भरविला जात असतो. मात्र यंदा कोरोनाव्हायरस प्रकोपामुळे जमावबंदीमुळे नियंत्रित राखता यावे यासाठी सरकारच्या कोरोना विषयक गाईडलाईन अनुषंगाने हा वार्षिक उर्स मर्यादित प्रमाणात औपचारिक रीत्या साजरा करण्यात येणार आहे, हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्टने सरकारच्या मार्गदर्शक सूचनांचे अनुसरण करून हा कार्यक्रम औपचारिक कमी करण्याचा निर्णय घेतला आहे.

यावर्षी दर्गा आवारात भाविकांना प्रवेश मिळणार नाही, असे स्पष्ट करण्यात आले आहे. ताजुद्दीन बाबांच्या या वार्षिक उर्समधे मुंबई मध्य प्रदेश, तेलंगणा, कर्नाटक, छत्तीसगड, पश्चिम बंगाल, काश्मीर, बिहार, असे संपूर्ण देशभरातील भाविकच, नन्हे तर परदेशातूनही भक्त येतात. ताजुद्दिन बाबा यांचा हा 98 वा वार्षिक उर्स 11 सप्टेंबर पासून 18 सप्टेंबर या दरम्यान होईल.

श्रीगणेश विसर्जन: कडेकोट सुरक्षा व्यवस्था, अडिच हजाराहून अधिक पोलिस तैनात

नागपूर: गणेशोत्सवानिमित्त शहरातील दहा ठिकाणी विसर्जन व्यवस्था करण्यात आली आहे. यावेळी परिस्थिती हाताळण्यास शहर पोलिस आयुक्त डॉ.भूषणकुमार उपाध्याय यांचे मार्गदर्शनाखाली सुरक्षा व्यवस्था मजबूत केली जाईल. बंदोबस्तात एकूण 2528 पोलिस अधिकारी आणि कर्मचारी तैनात असतील. त्यापैकी 7 डीसीपी, 14 एसीपी, 63 पीआय, 193 एपीआय आणि एएसआय, 1445 पुरुष आणि 229 महिला पोलिस कर्मचारी, 580 पुरुष आणि महिला होमगार्डही तैनात असतील.

फुटाळा, गांधीसागर वर खास लक्ष: यावेळी सुमारे 377 सार्वजनिक गणपतींचे विसर्जन करण्यात येणार आहे. त्याचबरोबर स्थानिकांचे घरचे गणपतीमध्येही मोठ्या संख्येने विसर्जन केले जाणार आहे. यासाठी शहर पोलिसांनी विसर्जन मार्गावर 1 ते 12 सेक्टर तयार केले आहेत. त्यापैकी फुटाळा तलाव, गांधीसागर, नाईक तलाव, कळमना तलाव, सक्करदरा कृत्रिम टँक, सोनेगाव तलाव, कोराडी तलाव, महादेव घाट कामठी, वेना नदी, हिंगणा इत्यादी जागा निश्चित करण्यात आल्या आहेत.

याशिवाय 31 महत्त्वाच्या विसर्जन स्थळांचे व्हिडिओ रेकॉर्डिंगही केले जाईल. दरवर्षीप्रमाणे फुटाळा तलावावर कडक बंदोबस्त ठेवण्यात आला आहे. यात 2 डीसीपी, 2 एसीपी, 6 पीआय, 12 एपीआय आणि एएसआय, 130 पुरुष आणि 45 महिला पोलिस, 65 महिला आणि पुरुष होमगार्ड आणि एसआरपीएफचे 2 सेक्शन तैनातीवर असतील. 27 महिला व पुरुष गृहरक्षकांव्यतिरिक्त क्यूआरटी आणि आरसीपी पथकही राखीव ठेवण्यात आले आहे.

नागरिकांनी गर्दी वाढवू नका: शहर पोलिस आयुक्त डॉ. उपाध्याय यांनी शहरातील रहिवाशांना कोरोना संसर्गाच्या पार्श्वभूमीवर विसर्जनस्थळी गर्दी वाढवू नये, असे आवाहन केले आहे. विसर्जनादरम्यान, नागरिकांनी तोंडाला मास्क, सॅनिटायझर वापर हे उपाय देखील वापरावेत. महाराष्ट्र सरकार आणि पोलिसांनी दिलेल्या माहितीचे अनुसरण करा.

गणेश उत्सव के लिए मंडलियों की तैयारियां शुरू , शहरभर से आई 110 अर्जी

कोरोना की छाया इस बार गणेश उत्सव पर भी पड़ी है इसके चलते इस बार पंडालों में गणेश स्थापना को लेकर प्रशासन द्वारा कुछ नियमों की सूची बनाई गई है जिनका पालन गणेश पंडालों को करना होगा। शहर की बड़ी बड़ी मंडलियों ने तो गणेश उत्सव की तैयारियां 2 महीने पहले से ही करना शुरू कर दी थी।

गणेश मंडलियों ने पूरी कोशिश की है के सुरक्षा के पूरे नियमों का पालन किया जाए इसके साथ ही फिलहाल गणेश मंडलियां गणेश स्थापना की तैयारियां पूरे उत्साह से कर रही,स्थापना में आने वाले आयोजकों का इंतजाम,साज सज्जा,महाप्रसादी आदि पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।इसी के साथ संती गणेशोत्सव मंडली की संयोजक संजय चिंचोले मलहने का कहना है के “इस बार पिछले साल जैसा माहौल नहीं है। गणेश प्रतिमा की ऊंचाई भी निर्धारित कर दी गई है।

ऐसा लग रहा है सिर्फ एक औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।इस बार तो इतना काम ही नहीं है कार्यकर्ताओं को क्या काम बताएं ये भी समझ नहीं आता। लेकिन हर बार गणेश स्थापना करने की परम्परा खंडित ना हो इसलिए हम गणेश स्थापना जरूर करेंगे” इसके अलावा इस बार कई मंडलों ने ऑनलाइन स्पर्धा रखने का मन बनाया है ताकि लोगों में उत्साह बना रहे इसके साथ ही कोरोना को लेकर जन जागृति अभियान भी चलाया जाएगा जिसमें लोगों को हैंड सेनिटाइजर,मास्क वितरित किए जाएंगे इसके साथ ही रक्तदान शिविर और आरोग्य शिविर भी लगाया जाएगा।

इस बार शहर भर की 110 गणेश मंडलियों ने सार्वजनिक गणेश स्थापना की अर्जी पेश की है जबकि गत वर्षों लगभग 1138 अर्जियां आयी थी। जिसमे एमआईडीसी , वाडी , इमामबाड़ा , प्रताप नगर , हिंगना , सोने गांव , सीताबर्डी , गिट्टीखदान , अंबाझरी , कोतवाली , तहसील , मनकापुर , गणेश पेठ, लकड़ गंज , शांतिनगर ,बजाज नगर , धांतोली ,सक्करदरा , नंदनवन , बेलत रोड़ी , हुडकेश्वर ,नवीन कामठी , पचपवली , जरीपटका, यशोधरा , सदर , जुनी कामठी , कल्मना , अजनी , कोराडी आदि को शामिल कर 1138 सार्वजनिक गणेश स्थापना अर्जी थी।

तेरह दशकों से चली आ रही मारबत-बड़ग्या के जुलूस परंपरा इस साल हुई खंडित

नागपुर:- मराठी श्रावण के खत्म होते ही तान्हा पोला के दिन ‘इडा-पीडा घेऊन जा गे मारबत’ यह शब्द कानों में गूंजते है। कोरोना संक्रमण के चलते इस साल सार्वजनिक आयोजनों पर बैन लगा हुआ है। इस वजह से तेरह दशकों से चली आ रही मारबत-बड़ग्या के जुलूस परंपरा इस साल टूट गई।

मारबत व बड़ग्ये के द्वारा दिए जाने वाले संदेशों के साथ निकलने वाले जुलूस को देखने हर साल बड़ी तादात में लोग इकट्ठा होते हैं।
पीली मारबत का इस साल 136वां साल व काली मारबत का यह 140वां साल था।परंपरा न टूटे इसी वजह से पीली मारबत उत्सव कमेटी, तरहाने तेली समाज, मारबत नागोबा देवस्थान, जागनाथ बुधवारी द्वारा निकाली जाने वाली पीली मारबत का दहन नाईक तालाब परिसर व काली मारबत उत्सव कमेटी की काली मारबत का नेहरू पुतला के पास मैदान में दहन किया गया।
बुराई के प्रतीक के रूप में पोले के पाड़वे के दिन नगर में निकलने वाला पारम्परिक मारबत-बड़ग्या का जुलूस बुधवार को नहीं निकला।

 

कोरोना इफेक्ट- सादगी से मना पोला घर,आज मनेगा तान्हा पोला

नागपूर:- कोरोना संक्रमण के चलते मंगलवार को बैलों का त त्यौहार पोला घरों में ही सादगी पूर्ण मनाया गया।सालभर खेती में काम करने वाले बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने लिए ही यह त्यौहार मनाया जाता है।ग्रामीण इलाकों में यह त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। नगर में पारडी, जूनी शुक्रवारी, काछीपुरा सक्करदरा सहित कई जगहों पर शाम को बड़ा पोला रहता है ,लेकिन इस बार जिलाधिकारी रवीन्द्र ठाकरे द्वारा पोले को सार्वजनिक रूप से मनाने पर रोक लगाए जाने से कहीं भी यह आयोजन नहीं हुआ।उनकी अपील पर लोगों ने बैलों की पूजा आदि अपने घरों पर ही रहकर की ।हर वर्ष पोले पर दिखने वाली रौनक इस बार दिखाई नहीं दी।

तान्हा पोला 

बड़े पोले के पाड़वे पर बुधवार को शहर में छोटे बच्चों का तान्हा पोला भी सादगी से बिना कोई ताम-झाम के घरों में ही मनाया जाएगा।वैसे तान्हा पोला सिर्फ विदर्भ में ही मनाया जाता है।तान्हा पोला की शुरुआत वर्ष 1806 में राजे रघुजीराव भोसले (द्वितीय) ने कि थीं इसका लक्ष्य यह था कि छोटे बच्चे भी अन्न पकाने में महत्वपूर्ण बैलों की महत्ता जानें।इसे करीब 215 वर्ष हो गए हैं।

इस साल पारम्परिक मारबत-बड़ग्या का जुलूस नहीं निकलेगा

कोरोना प्रभाव के चलते बुराई के प्रतीक के रूप में पोले के पाड़वे के दिन शहर में निकलने वाला पारम्परिक मारबत-बड़ग्या का जुलूस भी बुधवार को नहीं निकलेगा।पहली बार 13 दशकों से चली आ रही मारबत-बड़ग्या के जुलूस की परंपरा खंडित होगी।पीली मारबत का दहन नाईक तालाब परिसर व काली मारबत का नेहरू पुतला के निकट स्थित मैदान में दहन किया जाएगा।

नागपूर में देश का एकमात्र मारबत उत्सव: क्यो मनाया जाता है, क्या है इतिहास?

नागपुर:- समाज में व्याप्त कुरीतियों, भ्रष्टाचार और अत्याचारों के खिलाफ देश का एकमात्र मारबत उत्सव पर कोरोना के बादल मंडराए है, पिछले 140 वर्षों के इतिहास में पहली बार, पीली, काली रंग की मारबत और बडगा जुलूस रद्द कर दिया गया। यद्यपि संचारी रोग निवारण अधिनियम केवल दाह संस्कार की अनुमति देता है, लेकिन नागरिकों की संभावित भीड़ के कारण इसे प्राप्त करने की संभावना नहीं है। न केवल विदर्भ और महाराष्ट्र में, बल्कि पूरे देश में, मारबत का चलन केवल नागपुर में है। हालांकि इस वर्ष यह प्रथा टूट रही है, लेकिन मारबत का इतिहास और इसके पीछे की किंवदंती भी रोजक है।

बैल पोला के दूसरे दिन, तान्हा (छोटा) पोला पर शहर में काले और पीले रंग की मारबत के साथ शहर में बडगा जुलूस निकाला जाता है। शहर की संस्कृति के प्रतीक, मारबत त्योहार का आनंद इस बार नगरवासी नहीं ले पाएंगे। शहर में संक्रामक रोग निवारण अधिनियम लागू है। इसलिए, नागरिकों को एक साथ आने की अनुमति नहीं है।

नगर आयुक्त मुंढे शहर की सीमा के भीतर शहर के बारे में निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार हैं। वह शहर के नागरिकों से अपील कर रहा है कि वे भीड़ से बचने के लिए एक साथ न आएं। इसलिए वे इस त्योहार की अनुमति नहीं देंगे। जिससे, सड़क के दोनों किनारों पर भीड़, ज़ोर से संगीत, विभिन्न नृत्यों पर ठेका रखने वाले युवा, इस बार इस रोमांचक समारोह की घड़ी पर सिर्फ पुरानी यादे जगाना होगा।

समाज में बुरी प्रथाओं और मानदंडों पर हमला करने के साथ, बीमारी के देवता के रूप में मारबत की पूजा की जाती है। लेकिन इस बार जुलूस की अनुमति नहीं है। पीली मारबत को बनाने वाले त-हाने समुदाय ने पुलिस उपायुक्त से मारबत को जलाने की अनुमति मांगी, लेकिन नगर आयुक्त को शहर पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है। कमिश्नर ने दहन की अनुमति नहीं दी है। कई वर्षों की परंपरा खंडित ना हो इसलिए, नाईक तालाब क्षेत्र में पीले मारबत को जलाने का निर्णय लिया गया है।

‌‌इस हुई स्थापना: ब्रिटिश शासन के अत्याचार से तंग आकर, हर धर्म और समाज के युवा और वयस्क सोचते थे कि इस देश से अंग्रेजों को कैसे निकाला जाए। हालांकि, अंग्रेजों की अत्याचारी और दमनकारी नीति के कारण, लोगों को एक साथ आने की अनुमति नहीं थी। हालाँकि, धार्मिक गतिविधियों की अनुमति थी।

इसका लाभ उठाते हुए तेली समुदाय के नागरिकों ने अंग्रेजों को देश से भगाने की ठानी। उन्होंने भारत में ब्रिटिश कीट से छुटकारा पाने के लिए समाज के लोगों को एक साथ लाने के साथ सामाजिक कार्य किया। उन्होंने धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से ब्रिटिश सरकार पर हमला करने के इरादे से मारबत के माध्यम से अंग्रेजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसी उद्देश्य के लिए, नागपुर के बारदाना बाजार से काली मारबत 1880 में शुरू हुई, यानी 140 साल पहले। मस्कासाथ में त-हाने तेली समुदाय के पीले मारबत का जुलूस 1884, यानी 136 वर्षों से चल रहा है। आज तक, किसी भी कारण से त्योहार रद्द नहीं किया गया है।

रह गया “कोरोना ले जा गे मारबत” नारा: नागपुर, जो हर साल  “घेऊन जा गे मारबत” के नारों से गूंजता रहा है, और जो लोग इन नारों की घोषणा सुन रहे हैं, उन्हें अगले साल ही यह दोबारा सुनने मिलेगी। समाज में मौजूदा प्रथाओं, वर्तमान बीमारी के साथ, दूरदर्शी प्रवृत्ति को जगाने के लिए यह घोषणाए की जाती है। इस बार, कोरोना के मद्देनजर मारबत रस्ते तक आने की संभावना नहीं बची।

बीमारीयो की देवता: बरसात के दिन बीमारीयो के होते हैं। मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ जाता है। छोटे बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं का विकास होता है। श्रावण खत्म होते ही बारिश की तीव्रता कम हो जाती है, ऐसे में खांसी, जुकाम और बुखार से जा मारबत घोषणाए की जाती हैं। बहुत से लोग अपने नवजात शिशुओं को मारबत के दर्शन करने जाते हैं। देवी के स्तन पर बच्चे के मुंह को रखने की भी प्रथा है।

घरीच पोळा साजरा करा: जिल्हा न्यायदंडाधिका-यांची अपील

नागपूर:- जिल्ह्यातील ग्रामीण भागात पोळ्याचा सण जत्रेच्या स्वरूपात साजरा केला जातो. मात्र यावर्षी कोरोनाचा धोका टाळण्यासाठी जिल्हाधिकारी रवींद्र ठाकरे यांनी जिल्ह्यातील नागरिकांना त्यांच्या घरीच बैलांची पूजा करण्याचे आवाहन केले आहे. जत्रा आयोजित करू नका आणि उत्सव साधेपणाने साजरा करा.

असे आवाहन त्यांनी केले आहे, मोठा पोळा आणि तान्हा पोळा जाहीरपणे साजरा करण्यास बंदी घातली आहे. सांस्कृतिक कार्यक्रमांऐवजी रक्तदान, प्लाझ्मा दान शिबिरांचे नियोजन करावे, असे आवाहनही त्यांनी यावेळी केले. बैलांची रॅली काढू नका. बैलांची वैयक्तिकरित्या पूजा करा. कोठेही गर्दी करू नका.

कोरोना नागपुर की 136 साल की गौरवशाली परंपरा तुटेगी: बैल पोला, तान्हा पोला सार्वजनिक मनाने पर प्रतिबंध

नागपुर: राज्य की उप-राजधानी की एक विशेषता और संस्कृति वाले मारबत-बडग्या जुलूस को इस साल प्रतिबंधित कर दिया गया है। कोविड नियमों का पालन करते केवल पांच लोगों को ही मारबत दहन की अनुमति दी जाएगी। पीली मारबत के 136 साल के इतिहास में पहली बार जुलूस की परंपरा खंडित होने जा रही है।

विदर्भ की सांस्कृतिक गरिमा में काली-पीली मारबत और उनके मिलन का क्षण इस बार तान्हा पोलाको अनुभव नहीं कर सकेंब। इस साल मारबत जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कोविड स्थिति के कारण, आयुक्त मुंढे ने कोरोना प्रसार को रोकने के हेतु उक्त जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया है। परंपरा के अनुसार, मारबत जलाने की अनुमति कोविड नियमों का पालन करते हुए पांच लोगों को दी गई। पीली मारबत के 136 साल के इतिहास में पहली बार, मारबत का जुलूस नहीं निकलेगा। पीली मारबत उत्सव कमेटी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह कोविड संबंध में सभी नियमों का पालन करेगी।

कृष्ण हत्या की कोशिश करनेवाली पूतना मौसी का प्रतीक जागनाथ बुधवारी से पीली मारबत, और अंग्रेजों का समर्थन करने वाली बाकाबाईके प्रतीक के रूप नेहरू पुतला से काली मारबत जुलूस निकाला जाता है, समाज में अवांछनीय प्रथाओं को मिटाने के लिए, यह इनमें बडग्या भी जुड़ते हैं, तान्हा पोला के दिन प्रतीकात्मक व्यंग्य संदेश लिखे जुलूस सभी का ध्यान आकर्षित करता है। हालांकि, कोविड ने इस साल मारबत-बडगा जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया है और साथ ही तान्हा पोला को सार्वजनिक रूप से मनाए जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।‌‌

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