कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को खतरा,नागपुर के मेडिट्रिना हॉस्पिटल को मिली वैक्सीन ट्रायल की अनुमति

नागपुर: बढ़ते कोरोना संक्रमण और कोरोना की तीसरी लहर का खतरे भांपते हुए जल्द ही बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल नागपुर में किया जाएगा।नागपुर के मेडिट्रिना हॉस्पिटल को क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति मिल गई है।इसके मुताबिक ये ट्रायल तीन कैटेगरी में होंगे। हर ग्रुप में 25 बच्चे होंगे।जिनकी उम्र 17 साल से कम की होगी

18 तारीख को परमिशन मिल गई एवम हॉस्पिटल को एक ऑफिशियल लेटर मिल गया है।हॉस्पिटल कमेटी अब क्लीनिकल ट्रायल की तैयारियों पर डिस्कस करेगी। उसके बाद जैसे ही समिति निर्णय करेगी, 2 से 18 के बीच के तीन ग्रुप में से प्रत्येक में 25 बच्चों को शामिल किया जाएगा। समिति 2 से 6, 6 से 12 एवम 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों का अच्छे स्वास्थ्य वालों का चयन करेगी।

किंतु वास्तविक नैदानिक ​​परीक्षण शुरू होने में कम से कम एक माह का वक्त लगेगा।पलतेवार ने कहा मेडिट्रिना हॉस्पिटल ने पहले कोवैक्सीन का परीक्षण किया है। 

नागपुर के डॉ. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वसंत खडतकर के मार्गदर्शन में आनंद राठी, डॉ आशीष ताजने नैदानिक ​​परीक्षण इनकी निगरानी में पांच सदस्यीय टीम द्वारा की जाएगी।

क्लीनिकल ट्रायल को परमिशन मिलने के बाद भारत बायोटेक द्वारा वैक्सीन की डिमांड पूरी की जाएगी।वैक्सीन कैप्सूल मिलने के बाद हॉस्पिटल को क्लिनिकल ट्रायल की सूचना दी जाएगी। वैक्सीनेशन ट्रायल में भाग लेने के इच्छुक लोगों का प्रोसेस के थ्रू रजिस्ट्रेशन किया जाएगा एवम उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।उसके पश्चात यह ट्रायल कंपनी के प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी सहमति से किए जाएंगे।

अब नागपुर में ब्लैक फंगस मचा रहा आतंक,10 पीढ़ितों के जबड़ों की हुई सर्जरी

नागपुर: अब तक तो कोरोना ने जनता का परेशान किया हुआ था लेकिन अब ये नई बीमारी आ गई जिसे ब्लैक फंगस भी कहते हैं।पोस्ट-कोविड फंगल इन्फेक्शन(म्यूकोर माइकोसिस) के सिम्टम्स वाले मरीजों की संख्या दिनो दिन बढ़ती जा रही है। सिर्फ सरकारी चिकित्सा और अस्पताल नागपुर में 49 पेशेंट ब्लैक फंगस से पीड़ित है। इसमें से 19 ने यहां मैक्सिलोफेशियल सर्जरी डिपार्टमेंट में जबड़े की सर्जरी करवाई है। उनमें से 10 के जबड़े की सर्जरी हुई है।

हालांकि,स्पेशलिस्ट का कहना है कि शुरुआती निदान के साथ, पेशेंट पूरी तरह से ठीक हो जाता है।कोरोना संक्रमण के बाद कमजोर इम्यून सिस्टम पर फंगस का बहुत असर पड़ रहा है। राजकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के मैक्सिलोफेशियल डिपार्टमेंट में फंगल इनफेक्टिव पेशेंट के लिए लगभग 49 लोगों का उपचार किया जा चुका है।

अप्रैल महीने से अभी तक 19 लोगों के जबड़े निकाले जा चुके हैं। उनमें से नौ ने पहले चरण में अपने जबड़े की सर्जरी की एवम पूरी तरह से ठीक हो गए। दूसरे चरण में फंगस के घुसने के बाद 10 लोगों के ऊपरी एवम निचले जबड़े की सर्जरी की गई। पहली लहर में कोरोना पेशेंट्स में रेमेडिविर या स्टेरॉयड का उपयोग कम किया गया था।जिसके परिणामस्वरूप उस समय म्यूकोरिया के पेशेंट्स की संख्या कम थी।

गवर्नमेंट डेंटल हॉस्पिटल में मिला एक फंगल पेशेंट ठीक होकर घर जा रहा है। कुछ पेशेंट्स में विशेष रूप से, इन्फेक्शन फेफड़ों में फैल गया है एवम आगे के उपचार के लिए सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीवीटीएस डिपार्टमेंट में भेजा गया है।एक पेशेंट के तो मस्तिष्क पर फंगस ने अटैक कर दिया है ।उन्हें सुपर स्पेशलिटी के मनोरोग वार्ड में रेफर कर दिया गया है, जैसे के बताया जा रहा है।

हालांकि फंगस सांस एवम त्वचा के जरिए बॉडी में प्रवेश करता है, लेकिन कोरोना के दौरान इलाज के दौरान वेंटिलेटर की सफाई न हो तो यह सीधे बॉडी में प्रवेश कर जाता है। इससे मसूड़ों में सूजन आ जाती है।पेशेंट को जबड़े की की असहनीय समस्या हो जाती है।किसी में तेज सिरदर्द होता है, या दांत दर्द असहनीय पीड़ा होती है।

विधायक रोहित पवार ने नागपुर एनएमसी को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स डोनेट कर दिया सहयोग

कोरोना वायरस के इस दहशत काल में एनएमसी को राज्य के अन्य भागों से सहायता मिल रही है।इसी कड़ी में एनसीपी विधायक रोहित पवार ने अपने बारामती एग्रो की तरफ से एनएमसी को 20 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर भेंट किए हैं। एनसीपी समूह के नेताओं, नगरसेवकों एवम नगर पदाधिकारियों ने आज नगर आयुक्त राधाकृष्णन बी को ऑक्सीजन कंसेंटेटर सौंपा। 

दरअसल विधायक रोहित पवार की तरफ से भेजे गए कुल 38 ऑक्सीजन कंसंटेटरों में से 20 नगर आयुक्त को सौंपे गए। विधायक रोहित पवार ने पिछले वर्ष  एक ट्रक सैनिटाइजर की आपूर्ति की थी।वह सतत नागपुरवासियों की मदद कर रहे हैं।एनएमसी शेष 18 कंसंट्रेटर को संभागीय आयुक्त डॉ. संजीव कुमार को सुपुर्द किया गया। ज्ञात हो की बारामती एग्रो द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में पांच सौ आक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे गए हैं।

निगम प्रशासन की सहायता के लिए यह सराहनीय कदम था। नगर आयुक्त राधाकृष्णन ने यह उल्लेख करते हुए कि 20 ऑक्सीजन संकेंद्रक कई पेशेंट को राहत देंगे, ‘बारामती एग्रो’, विधायक रोहित पवार एवं सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया।

राहत भरी खबर: पिछले 80 दिनों के बाद कोरोना मामले एक दिन में 1000 से कम ,मृत्यु दर भी कम

पिछले वर्ष जिले में अगस्त, सितंबर 2020 में कोरोना वायरस की पहली लहर में कोरोना का प्रकोप काफी बड़ गया था ।हालांकि इसके बाद स्थिति फिर से सामान्य हो गई। लेकिन फरवरी 2021 के मध्य से जिले में कोरोना की दूसरी लहर आ गई।उसके बाद जिले में हर दिन पीड़ितों के साथ कोरोना ने मौत का मंजर दिखाया। और स्थिति बहुत भयानक हो गई।

रिकॉर्ड देखें तो फरवरी के मध्य से अप्रैल के अंत तक नागपुर शहर एवम ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण की दर 32 फीसदी तक पहुंच गई थी।

जिले में एक ही दिन में साढ़े आठ हजार संक्रमित एवम 113 मौतें दर्ज की गईं। लेकिन अब राहत भरी खबर यह है की दूसरी लहर का प्रकोप थोड़ा कम हो गया है। मरने वालों की संख्या भी कम हो गई है।

जिले में 81 दिन बाद सोमवार (17 तारीख) को रोजाना कोवीड पेशेंट्स की संख्या में एक हजार से भी कम मामले सामने आए हैं।पिछले 24 घंटे में 971 नए कोरोना मामले मिले एवम 30 लोगों की मौत हुई। (नागपुर में एक हजार कोरोना मरीजों के भीतर 80 दिन बाद)

कोरोना का जानलेवा कहर कुछ हद तक कम हुआ। 27 फरवरी, 2021 को जिले में 13,027 टेस्ट किए गए तथा 984 कोरोना मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद जिले में कोरोना ने कहर बरपाया था। जिले में अब तक 8,580 कोरोना पीड़ितों की मौत हो चुकी है।इसमें शहरी इलाकों में 5,137 तथा ग्रामीण इलाकों में 2,184 मौतें शामिल हैं।उसके साथ ही जिले के बाहर से आए 1,259 लोगों को नागपुर रेफर करने के बाद मौत हो गई।नतीजतन, उनकी मृत्यु नागपुर में दर्ज की गई थी।

अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जिले में मरीजों की संख्या में कमी आई है। पीड़ितों की दर में भी थोड़ी कमी हुई है। 

सोमवार को शहरी इलाकों में 9 हजार 818 एवम ग्रामीण इलाकों में 3443 टेस्ट किए गए। इनमें से केवल 4.87 प्रतिशत या शहरी क्षेत्रों में 487 लोग और ग्रामीण क्षेत्रों में 13.77 प्रतिशत या 474 लोग प्रभावित पाए गए।

कोरोना काल में टेलरिंग व्यवसाय और सिलाई कामगार जूझ रहे बड़े आर्थिक संकट से

नागपुर कई दशकों से मध्य भारत का प्रमुख कपड़ा मार्केट रहा है।और कपड़ा व्यवसाय के साथ ही नागपुर में सिलाई का व्यवसाय भी फला-फूला।बहुत से टेलर्स ने अपने क्षेत्र में अच्छी पहचान बना ली थी। कोरोनावायरस के चलते लगातार दो साल से अपनी कमाई का सीजन गंवा चुके है यहां के टेलर्स।

नागपुर में बहुत अच्छे से चलने वाला सिलाई व्यवसाय भी अब ठप हो गया है। सिलाई कामगारों को भी घर चलाने और जीवित रहने के लिए संघर्ष करने करना पड़ रहा है।बहुतों से लोग तो उधार लेकर जीवन की गाड़ी खींचने का काम कर रहे है।

पहले तो यहां कारीगरों के साथ-साथ मालिकों के लिए भी एक अच्छा वक्त था।लेकिन फिर अचानक रेडीमेड चल पड़ा और टेलरिंग का धंधा बद से बदतर हो गया। शहर में टेलर और कारीगरों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन, आपको हर चौक पर एक टेलर की दुकान और हर मोहल्ले में एक शिल्पकार मिल जाएगा। कुछ समय पहले तक यही स्थिति थी।

हालांकि लोग दिवाली पर रेडीमेड पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, लग्नसराय और रमजान ईद दोनों फसल के मौसम हैं। लेकिन, कोरोना ने दोनों सीजन को लगातार दो साल तक डुबाया।मूल रूप से कम आय वाले कारीगरों ने किसी तरह अपना जीवन यापन किया। हालांकि, अब हस्तशिल्प और सिलाई पेशेवर स्थिति पर अपना दुख व्यक्त कर रहे हैं कोरोना काल और लॉक डाउन ने उनकी कमर तोड़ कर रख दी है। ऐसी स्थिति में अब उनका जीवन यापन कैसे हो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है।

तौकते चक्रवात:नागपुर के कई हिस्सों में बारिश,पश्चिमी विक्षोभ के कारण 3-4 दिनों तक बारिश की संभावनाएं

क्षेत्रीय मौसम विभाग ने बताया है कि अरब सागर से उठे चक्रवात ‘तौकते चक्रवात लाइव अपडेट’ से फिलहाल विदर्भ को कोई खतरा नहीं है।किंतु विदर्भ में अगले तीन-चार दिनों तक बेमौसम बारिश होने की पूरी संभावनाएं है। 

इस चक्रवात के दौरान कुछ जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी एवम गरज के साथ हल्की या मध्यम बारिश होने की संभावना है।आज शाम को नागपुर के भी कुछ हिस्सों में बारिश हुई। कई जगह तो मूसलाधार बारिश भी हुई।और अगले दो दिन मौसम का यही हाल रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अधिकारियो के हिसाब से , तटीय कोंकण, गुजरात एवम दमन दीव क्षेत्रों के साथ उत्तर की ओर बढ़ने पर तेज गति से चलने वाले चक्रवात के कमजोर होने की संभावनाएं है। और इसलिए इस तूफान का विदर्भ पर कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा।किंतु ‘पश्चिमी विक्षोभ’ के चलते तीन-चार दिनों तक बारिश तथा बादल रहेंगे।

अनुमान है की सोमवार और मंगलवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे।अगले सप्ताह से उन्हें भीषण गर्मी का एहसास होने वाला है।

क्या आपने कोरोना वैक्सीन का दुसरा डोज ले लिया है या इंतजार है? जानिए वैक्सीनेशन सेंटर्स की डिटेल

नागपुर: नागपुर में कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर्स पर नागपुर के लोगों द्वारा कई वाक्य आपको सुनने मिलेंगे जैसे अरे वैक्सीन खत्म हो गई क्या ? फिर कब स्लॉट मिल सकता है आदि।सब लोग महीनों से चल रहे टीकाकरण केंद्रों पर टीकाकरण के लिए नजरें लगाकर बैठे है। पहला डोज लेने वाले नागरिक इस उलझन में हैं कि वैक्सीन का दूसरा डोज कहां से लें।
कई केंद्र वैक्सीन की कमी के कारण बंद हैं।यहां उन नागरिकों को प्राथमिकता दी जाती है जिनके पास ऑनलाइन अपॉइंटमेंट (वैक्सीन के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट) है। इससे कई नागरिकों को परेशानी भी हो रही है।
लेकिन अब आप चिंता मत करो। हम आपको आपके घर के पास के कुछ वैक्सीनेशन सेंटर्स के नाम बताएंगे। (दूसरी खुराक के लिए नागपुर में कोरोना टीकाकरण केंद्रों की सूची)
टीकाकरण के लिए जाते समय अपने साथ आधार कार्ड ले जाना न भूलें। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर टीकाकरण केंद्र पर भी जाएं। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेते समय यदि आपको स्लॉट नहीं मिलता है या आपको केंद्र का नाम नहीं दिखता है, तो केंद्र पर जाएं और पूछताछ करें। अपने साथ पानी की बोतल ले जाना न भूलें।
कोविशिल्ड वैक्सीन
लक्ष्मीनगर जोन
खामला आयुर्वेदिक
संत जगन्नाडे महाराज समाज भवन राजीव नगर
खेल परिसर बैडमिंटन हॉल, विवेकानंद नगर
समाज भवन गजानन नगर
गायत्री नगर स्केटिंग हॉल
महात्मा गांधी समाज भवन
सोनेगांव समाज भवन
म्युनिसिपल स्कूल जयताल
दादा दादी पार्क
गणेश मंदिर पुस्तकालय
सुर्वे नगर, एन.आई.टी. गार्डन सोसाइटी बिल्डिंग
सीआरपीएफ अस्पताल
धरमपेठ क्षेत्र
इंदिरा गांधी अस्पताल
केटी नगर यूपीएचसी
जगदीश नगर समाज भवन
दाभा म्युनिसिपल स्कूल
आयुर्वेदिक औषधालय
हनुमान नगर जोन
ईएसआईएस अस्पताल
नरसाला यूपीएचसी
आजमशाह स्कूल कॉर्पोरेशन
दुर्गा नगर स्कूल
जानकी नगर स्कूल
मालवी नगर स्कूल
मानेवाड़ा यूपीएचसी
धंतोली क्षेत्र
अलगाव अस्पताल
बाबुलखेड़ा डिस्पेंसरी
सनेगुरुजी स्कूल
गजानन मंदिर समाज भवन
आकर्षक मैदान नरेंद्र नगर
महात्मा फुले हिंदी स्कूल
भीम नगर, मराठी प्राइमरी हिंदी स्कूल, भीम नगर
लकड़गंज जोन
बाबुलबान आयुर्वेदिक औषधालय
पारदी नगर अस्पताल
पारदी कोंडवाना स्कूल
भारतवाड़ा स्कूल
मिनमाता
डिप्टी सिग्नल यूपीएचसी सेंटर
कलमाना प्राथमिक विद्यालय
काछविसा भवन, सतनामी नगर
संतराजीपुरा क्षेत्र
मेंहदीबाग यूपीएचसी
लालगंज आयुर्वेदिक औषधालय
सतरंजीपुरा हेल्थ पोस्ट
जगन्नाथ बुधवार प्राइमरी स्कूल
कुडनलाल गुप्ता नगर पालिका स्कूल
बिनकी महिला औषधालय
मुदलियार हॉल

आता कोव्हिड नियमांसह रहायला शिका: तज्ञांचा सल्ला

नागपूर: कोरोना संक्रमणाची भितीदायक परिस्थिती आणि कोरोना व्हायरसमधील सतत बदल लक्षात घेऊन, चालू कालावधी मोठा कठीण ठरतो आहे. लवकरच यातून मुक्त होण्याची कुठलीच आशा तुर्त तरि दिसत नाही. इकडे लॉकडाउनही कायम टिकू शकत नाही. म्हणून, कोव्हीडच्या नियमांचे अनुसरण करत जगणे शिकावे लागणार आहे.

सामाजिक अंतर, हँड सेनेटायझर आणि मास्क आता जीवनाचा अविभाज्य भाग बनवाना लागणार असा सल्ला तज्ञांनी दिला आहे. मनपा व आयएमए संयुक्त विद्यमाने फेसबुक लाईव्ह कार्यक्रम आयोजित होतो, ज्यामध्ये डॉ. निलेश अग्रवाल आणि डॉ. नितीन शिंदे यांनी लोकांचे प्रश्नांचीही उत्तरे दिली.

द्वितीय लाटेचा कहर: ‘कोरोनाबरोबर कसे राहावे’, डॉ. निलेश अग्रवाल यांनी सांगितले की, कोरेना आता कुणाला होणार नाही हे सांगने कठीण आहे. दुसरी लाट सर्व मानवजातीवर भयानक ठरली आहे. लाखो लोक पॉजिटिव आहेत. हे संक्रमण टाळता येऊ शकते. आता प्रत्येकाला त्यांचे जीवनशैली बदलणे आवश्यक आहे. सोशल डिस्टेंसिंगनंतर, हँड सॅनिटाइजर मास्किंगची सवय असणे आवश्यक आहे. संसर्ग टाळण्यासाठी मास्क हा सर्वात चांगला उपाय आहे. नेहमीच सर्व अनुसरण केले पाहिजे. जर कोणात लक्षणे दिसत असतील किंवा पॉजिटिव व्यक्तीशी संपर्कात आल्यास ताबडतोब टेस्ट केली पाहिजे. अशा प्रकारे जलद उपचार केले जाऊ शकतात.

संसर्ग टाळण्याचा हेतू: डॉ. शिंदे म्हणाले की जर कोरोना पॉजिटिव आला किंवा लक्षणे दिसतील तर विलगीकरण केले जावे. विलगीकरण म्हणजे कोरोना पॉजिटिव चा शिक्का नाही. परंतु जर संक्रमण झाले असेल तर इतरांना संसर्ग होऊ नये म्हणून हे जरूरी आहे. चाचणी अहवालापर्यंत विशेष काळजी घ्यावी. याशिवाय, क्वारंटाइन्सच्या मदतीसाठी कोणी असतं.

जर संपूर्ण परिवार पॉजिटिव आढळला तर त्यास कोणत्याही प्रकारची मदत केली जाऊ शकत नाही, असा गैरसमज काढून टाकला पाहिजे. येथे सर्व नियम पालन करून क्वारंटाईन व्यक्तीला मदत केली जाऊ शकते. आता दुस-या लाटे नंतर तिसऱ्या लाटेची शक्यता व्यक्त केली जात आहे. म्हणून लसीकरण शक्य तितक्या लवकर केले पाहिजे. हाच रामबाण उपाय असल्याचा सल्ला दिला.

11नंतरही नो-लॉकडाउन: बँका, पॅथोलॉजी आणि निदान केंद्रे दिवसभर गर्दीयुक्त

नागपूर: प्रशासनाने 11 नंतर सर्वबंद केले तेव्हापासूनच सकाळी रेशन, भाज्या, दुग्ध डेयरी दुकानांत गर्दि असते, त्याआधी ज्याला जेव्हा वेळ असेल तेव्हा जाऊन तो खरेदी करे. लॉकडाउनच्या काळानंतरही, काही दुकाने 12 पश्चात ही दुपारी बंद होत नाहीत, असं बर्याच भागात पाहिलं जात आहे.

मानेवाडा सिमेंट रोडवर, एका सरकारी राशन दुकानात, सकाळपासून लोकांची गर्दी आणि सर्व नियमांचे उल्लंघन होत आहे. सामाजिक अंतर पालन होत नाही आणि देखरेखसाठीही कोणी नाही. असेच जवळच्या एका बँकचं देखील आहे. ग्राहकांची गर्दी बँके बाहेरही तुंबलेली आढळते. इथेही सामाजिक अंतर पालन अनुसरण केले नाही.

नंदनवन रोडवर बॅकेसमोर गर्दी असते. वृद्ध त्यांची पेंशन काढण्यासाठी गर्दी करत आहेत. भाज्या विकत घेण्यासाठी बर्याच ठिकाणी गर्दी होत आहे. दुग्ध डेयरी वर तर मोठ्या प्रमाणात खरेदिदारांची झुंबड दिसून येते. असे दिसते की लोक पुन्हा बेपर्वा होत आहेत. आवश्यक सेवांव्यतिरिक्त, सर्व दुकाने बंद आहेत परंतु जे उघडतात त्यांना 11 पर्यतच परवानगी आहे. परंतु बर्याच भागात आणि वस्तिंत दुकाने दुपारपर्यंत उघडल्या जातात. अशा दुकानांवर कोणतीही कारवाई केली जात नाही.

दुपारीही वर्दळ: सकाळी 11 नंतर अत्यंत महत्त्वाच्या कामाने बाहेर पडायलाच अनुमति आहे परंतु गेल्या 4-5 दिवसांपासून दिसतेय की रस्त्यांवर वर्दळ वाढलीय. वाटेल तसा जो फिरत आहे. नियम असा आहे की जे लोक बाहेर पडतात ते आरटी-पीसीआर चाचणीत निगेटिव असले पाहिजे परंतु कोणतीही तपासणी केली जात नाही. काही चौकांत मोजक्या लोकांस थांबवून असे केले जायचे परंतु आता त्याचीही संख्या कमी झाली आहे. 11 वाजता, कठोर लॉकडाउनमुळे सर्व पूर्णपणे निर्जन व्हासला पाहिजे परंतु तसे दिसत नाही. प्रशासन व पालक मंत्र्यांचे अपिलचा असर कमी होऊ लागला आहे. नागरिक घरांमध्ये कंटाळले आहेत आणि जबरदस्तीने बाहेर पडताहेत. त्यांच्याकडे अनेक प्रकारचे कारणं आहेत आणि पोलिसांद्वारे थांबविल्यास बहुतेक वैद्यकीय कारणं असतात.

सर्वांचे आपले कारणं: काही लोक म्हणतात की कोरोना पासून जीवीतास धोका आहे, परंतु त्यांच्या स्वत:च्याही काही सिमा आहेत. लोक प्रशासनास सहकार्य करण्यास तयार आहेत आणि ते करताहेत, परंतु दुकाने बंदमुळे कमाई थांबली आहे. टेलर, बूटीक, सलून, चहा-नाश्ता, कपडे, होसियरी, बूट चप्पल, इतर वस्तू विकणार्या लहान हॉकर्स, काम थांबल्याने बेरोजगार होतायत. अशांना आता लॉकडाउन मानवत नाहीय, ज्यामुळे काही चहा विक्रेत्यांनी तर सकाळी सायकलवर केटली ठेवून चहा विकताहेत. नाश्ता त्याच प्रकारे विकला जात आहे. अनेक ठिकाणी भिंतींच्या मागे लपून खर्रा-सिगारेट देखील विकल्या जात आहेत. त्यांच्याकडे या शिवाय उपायही नाही. पुन्हा कारवाईची सतत भीती टांगती आहे.

कोव्हीन अँप्लिकेशन: मोबाइलवर, लॅपटॉप, यश नाही

नागपूर: कोरोना लसिकरणा बद्दल तरुणां मध्ये उत्साह आहे. पण हा मावळतो नोंदणीसाठी लॉग इन करताना, सर्व माहिती दिल्यानंतर जेव्हा ओटीपी तासंतास आणि बरेच दिवस येत नाही. ओटीपी न आल्याने स्लॉट बुक होत नाही आणि युवकांना लसिकरणासाठी अनेक दिवस प्रतीक्षा करावी लागते. शहरातील हजारो युवकांचा लसीकरणाचा उत्साह असा धक्कादायकपणे मावळतो आहे आणि ते निराश होत आहेत. अशाप्रकारे अंती सारी तरुणाई सरकारलाच जबाबदार धरत आहे.

नोंदणीच्या जाळामध्ये अडकलेल्या युवकांचे लसीकरव होत नाही. लसीची आशा निराशेत बदलते. कोव्हीन आरोग्य सेतु अॅप डाउनलोड करण्यासाठी ओटीपी लागतो, प्रथम तर या ओटीपीला येण्यासाठी बरेच दिवस लागत आहेत. काही मिनिटांचे काम दिवसांवर जातेय समजा जर पहिला ओटीपी आला तर युवक त्यांची स्वतःची माहिती भरतो. हे कंफर्म करण्यासही ओटीपी पाठविण्याची पुन्हा प्रक्रिया आहे, परंतु येथे देखील बहुतेक लोक प्रतिक्षेत/ रांगेत आहेत आणि पुढचे अनेक दिवस तसेच राहावे लागत आहे.

बरेच केंद्र रिक्त: एका बाजूला जेथे बर्याच केंद्रांवर प्रचंड गर्दी आहे, तर काही केंद्रे रिकामे आहेत. याचं मुख्य कारण नोंदणी प्रक्रिया आहे. हा विरोधाभास नोंदणी नसल्यामुळे व्युत्पन्न होत आहे.

मे पूर्ण फूल: कोव्हीिनमध्ये उपलब्धता पाहता मे पुर्ण फूल दाखवत आहे. 15 जून नंतर काही केंद्रात स्लॉट उपलब्ध आहेत. ही प्रक्रिया चालू राहिल्यास, युवकांचे लसीकरण करणे कठीण जाईल. ही प्रक्रिया पारदर्शी नाही म्हणून हे संकट आहे. खरं तर केंद्र इतके कमी झाले आहेत की लोकांना समस्या येत आहेत. पेड सेंटर देखील मर्यादित बनले आहे. म्हणून तेथेही बंदीचा संदेश येत आहे.

कॅप्चा भरण्यामध्ये विलंब आणि स्लॉट पूर्ण: लस स्लॉट्स बुक करण्यासाठी काही दिवसांपासून लॅपटॉपवर रोज काही तास घालवले जात आहेत. तक्रार एकच की कोव्हीन वेबसाइटवर स्लॉट बुक करणे कठीण आहे. हे लोक दररोज वेबसाइट रीफ्रेश करत आहेत. समस्या काय आहे की जेव्हा लस स्लॉट मिळते तेव्हा कॅप्चा भरावा लागतो. तो भरतानाच स्लॉट भरलेला दाखवतो आहे.

गावांमध्ये मिळतो स्लॉट: शहरात राहणा-यांस गावांत रिक्त स्लॉट दर्शविले जात आहे. नागपूरच्या एका कोपऱ्यात रहाणा-यास नागपूरच्या दुसऱ्या बाजूला असलेल्या गावाचे केंद्र रिक्त दर्शवले जाते. काही लोक लसिकरणास्तव त्या केंद्रावर हजरही होत आहेत परंतु बहुतांश निराशाच हाती येत आहे.

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