लॉकडाऊनकाळातही जातपडताळणी प्रमाणपत्र प्रक्रिया वेगाने राबविण्याचे पटोले यांचे निर्देश

नागपूर:- अनुसूचित जमाती प्रमाणपत्र तपासणी समितीने इयत्ता दहावी तसेच बारावीच्या विद्यार्थ्यांना पुढील शैक्षणिक सत्रात प्रवेश घेण्यासाठी आवश्यक असणारी जात पडताळणी प्रमाणपतत्रे वितरित करण्यासाठी अशी प्रकरणे तातडीने निकाली काढावी, असे निर्देश विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले यांनी आज दिले.

येथील मुख्यमंत्री सचिवालयाच्या समिती कक्षात नागपूर, गडचिरोली व अमरावती अनुसूचित जमाती प्रमाणपत्र तपासणी समितीद्वारे गोवारी (गोंड गोवारी) जात वैधता प्रमाणपत्र मिळण्यात येणाऱ्या अडचणींबाबत श्री. पटोले यांच्या अध्यक्षतेखाली आढावा बैठक घेण्यात आली, त्यावेळी ते बोलत होते.

निवासी उपजिल्हाधिकारी रविंद्र खजांजी, अनुसूचित जमाती प्रमाणपत्र तपासणी समितीचे उपसंचालक तथा सदस्य सचिव मनोज चव्हाण,आदिवासी गोवारी संघर्ष कृती समितीचे संयोजक दामोदर नेवारे, तक्रारदार नारायण सहारे, मारोतराव वाघाडे, वासुदेव नेवारे, गजाना कोहळे तसेच संबंधित अधिकारी यावेळी उपस्थित होते.


इयत्ता दहावी व बारावीच्या विद्यार्थ्यांना पुढील इयत्तेत प्रवेशासाठी नोंदणी केल्यानंतर दिलेल्या मुदतीत जातपडताळणी प्रमाणपत्र सादर सादर करणे गरजेचे आहे.

लॉकडाऊन काळात प्रमाणपत्र मिळविणे विद्यार्थ्यांना गैरसोयीचे होत असल्याने विद्यार्थ्यांसमोर प्रवेशाचा मोठा पेच निर्माण झालेला आहे. ही परिस्थिती लक्षात घेता समितीने तातडीने जात पडताळणी प्रमाणपत्रे विद्यार्थ्यांना उपलब्ध करून द्यावे. कोणत्याही परिस्थितीत विद्यार्थ्यांचे नुकसान होता कामा नये. तसेच जातपडताळणी प्रमाणपत्रांबाबत ज्यांच्या तक्रारी आहेत, त्या़ प्रकरणांची खात्री करून लवकरात लवकर निर्णय घ्यावा, अशा सूचना श्री. पटोले यांनी यावेळी दिल्या.

कोरोनामुळे उद्भवलेल्या परिस्थितीत मराठा समाजातील विद्यार्थ्यांसह अनुसूचित जाती जमाती, इतर मागासवर्गीय, विमुक्त जाती व भटक्या जमाती अशा सर्व घटकांतील विद्यार्थ्यांनाही जात पडताळणी प्रमाणपत्र मिळविण्यासाठी अनेक अडचणी येऊ शकतात हे लक्षात घेऊन मराठा समाजासह अनुसूचित जाती जमाती, इतर मागासवर्गीय, विमुक्त जाती व भटक्या जमाती अशा सर्व घटकांतील सर्व विद्यार्थ्यांना सूट देण्याचा महत्वपूर्ण निर्णय शासनाने घेतला आहे. याबाबत उपस्थित संघटनेच्या पदाधिकाऱ्यांना सूचित करण्यात आले. अमरावती अनुसूचित जमाती प्रमाणपत्र तपासणी समितीने प्रमाणपत्राची प्रकरणे त्वरित निकाली काढावी, अशी सूचनाही त्यांनी यावेळी केली.

Two more MLC’s including Pravin Datke get MLA funds

Mumbai: The state government has recently approved a sum of Rs 90 lakh for the MLA fund of three newly appointed members of the Legislative Council. As per this directive, MLA fund of Rs 30 lakh each will be provided to Legislative Council member and Shiv Sena leader CM Uddhav Thackeray apart from BJP leaders Pravin Datke and Ranjitsinh Mohite Patil. On Tuesday, the planning department of the state government issued a mandate in this regard. For the first time, the MLA fund has been sanctioned to three members of the Legislative Council, including the Chief Minister.

Earlier, on 8 July, the government approved Rs 104 crore 2 lakh for a total of 349 members of both houses of the Legislature. In which 288 Legislative Assembly and 61 members of the Legislative Council were provided MLA funds of Rs 30 lakh each. The state government has made a provision of Rs 1101 crore for the MLA fund during the financial year 2020-21, which will be distributed in a phased manner.

किसके इशारे पर साहील सैयद रच रहे हैं साजिश? : दयाशंकर तिवारी

नागपुर:- एक वायरल हो रहे ऑडियो क्लिप के कारण नागपुर महानगर पालिका में राजनीति गरमा रही है. इस क्लिप ने शहर में खलबली मचा दी है. स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गंटावार एलेक्सिस हॉस्पिटल में कार्रवाई करने के लिए महानगर पालिका के कर्मचारियों को साथ न लेते हुए साहील सैयद जैस गुंडे को अपने साथ ले गए. डॉक्टर गंटावार और साहील सैयद के बीच क्या संबंध है, निर्देश पाने के बाद भी मनपा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने गंटावार के ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की, ऐसे कई सवाल वरिष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी ने उठाए.

तिवारी ने कहा ऑडियो क्लिप में महापौर संदीप जोशी और मुझ पर हनी ट्रैप करने के बारे में साहील अपने साथियों के साथ बातचीत कर रहे हैं. इस क्लिप में उसने और भी नेताओं के नाम का ज़िक्र किया. इतना ही नहीं न्याय व्यवस्था को बदनाम करने वाला वक्तव्य भी इस क्लिप के ज़रिए सामने आया है. इस क्लिप में साहील सैयद ने डॉ गंटावार के नाम का स्पष्ट ज़िक्र किया है. इस मामले में डॉ गंटावार के साथ और कौन कौन है इसकी जांच पार्षद तिवारी ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर शुरू कर दी है. इस जांच में कई चौंका देने वाली बातें सामने आ रही हैं. इस बारे में तिवारी ने कहा कि जांच प्रक्रिया और भी बारीकी से की जाएगी जिससे इस बात पर प्रकाश पड़ेगा कि साहील सैयद कौन है और किसके इशारे पर काम कर रहा है. जांच प्रक्रिया खत्म होते ही यह सारी बातें दुनिया के सामने आ जाएंगी.

पिछले 27 वर्षों से मैं नगरसेवक हूं और जनप्रतिनिधि के रूप में काम कर रहा हूं. लेकिन आज तक मुझ पर इस तरह का गलत इल्जाम नहीं लगाया गया है. कोई मुझे गुंडा या भ्रष्ट कहता तो भी मैं सहन कर लेता. लेकिन जिस प्रकार साहील ने मुझ पर गलत इल्जाम लगाए हैं उससे न ही केवल मेरे विरोधी बल्कि मेरे शत्रु भी असहमत होंगे और विश्वास नहीं करेंगे. इस क्लिप के ज़रिए साहील के काले करतूत और गंटावार के साथ उसके संबंधों का खुलासा किया गया है. साहील की धोखाधड़ी के कई मामले अब सामने आ रहे हैं. पुलिस उसकी तलाश भी कर रही है.

सूत्रों के अनुसार, वह महा विकास आघाडी गठबंधन के एक पार्टी के वरिष्ठ नेता के घर में छुपा हुआ है. यह मामले की जांच पुलिस कर रही है. आज नहीं तो कल वह पुलिस के हाथ ज़रूर लगेगा. ऐसे लोग किसी भी पार्टी के नहीं होते हैं. इसीलिए उसका संबंध कौन सी पार्टी से है यह मुद्दे की बात नहीं है. लेकिन ऐसे गुंडे के साथ संबंध रखनेवाले गंटावार को बचाने का प्रयत्न मनपा आयुक्त मुंढे क्यों कर रहे हैं, यह मेरे लिए आश्चर्य की बात है, तिवारी ने कहा.

ऑडियो क्लिप है गंटावार, एलेक्सिस और महापौर से संबंधित

मनपा तुकाराम मुंढे के काम करने के तरीके और उनकी नीतियों से यह पता चलता है कि वे जनप्रतिनिधियों के महत्व को कम करना चाहते हैं. उन्होंने अपने अधीन काम कर रहे अधिकारियों को किसी भी समस्या को तुरंत हल करने के निर्देश दिए हैं. लेकिन फिर भी तकरीबन सभी विकास कार्य रुके हुए हैं. चाहे लोगों के घरों के सामने गड्ढों की मरम्मत हो या फिर नाली साफ करना, विकास कार्यों के लिए धनराशि वितरित नहीं की जा रही है. सत्रह वर्षों से मैं सत्ता तथा विरोधी पक्ष में रहा हूँ और कई आयुक्तों के साथ मेरा विवाद हुआ है. एक दूसरे पर आरोप भी लगाए. लेकिन सभा समाप्त होने के बाद कोई इन आरोपों पर ध्यान नहीं देता है क्योंकि हम लोगों की सुविधा और शहर के विकास के लिए काम कर रहे हैं. यह पहली बार है जब हमने मुंढे जैसे अधिकारी को देखा है जो अपने महत्व को बढ़ाने के लिए हर किसी को अपने अधीन करना चाहता है. गंटावर, एलेक्सिस, महापौर मामले की सीआईडी ​​जांच और हनी ट्रैप क्लिप के बीच संबंध के बारे में तिवारी ने कहा कि दोनों बातों के बीच कनेक्शन होने की संभावना सौ प्रतिशत है.

मुंढे पर टीप्पणी: खोपड़े हुए नेट पर ट्रोल

नागपुर:- भाजपा के विधायक कृष्णा खोपड़े ने कल मांग की थी कि नागपुर के पुलिस आयुक्त को नगर आयुक्त मुंढे को गिरफ्तार करे। नतीजतन, मुंढे समर्थकों ने सोशल मीडिया पर विधायक की खोपडे को जमकर ट्रोल कीया। कुछेक ने तो अभद्र भाषा भी इस्तेमाल कि। उल्लेखनीय है कि विधायक खोपड़े के पक्ष में एकभी टिप्पणी नहीं की गई।

सत्तापक्ष भाजपा और आयुक्त मुंढे के बिच नागपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के सीईओ पद पर पिछले कुछ दिनों से घमासान जारी हैं। परसो, अध्यक्ष प्रवीण परदेशी ने “आप स्मार्ट सिटी के सीईओ नहीं थे” कह विवाद को थाम लिया। आयुक्त ने सीईओ पद अवैध रूप से जब्त कर लिया था। मेयर संदीप जोशी ने पुलिस स्टेशन में कमिश्नर के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसलिए, अब पुलिस आयुक्त मुंढे को गिरफ्तार करें, यह मांग विधायक खोपड़े ने की। उसपर, नेटिज़न्स ने विधायक खोपड़े की जमकर खबर ली।‌‌

नेटिज़न्स मुंढे के समर्थन में कहते हैं कि उनको गिरफ्तार करने में दम चाहिए, वे भ्रष्टाचारियो के काल है, मुंढे को छूओंगे तो लोग सड़कों पर उतरे बिना नहीं रहेंगे, मुंढे लोगों के दिलोपर राज़ करते है, देश को उनके जैसे केवल 100 अधिकारियों की जरूरत है, महाराष्ट्र सरकार मुंढे को कानूनी समर्थन दे।

हिम्मत है तो आज़माओ, उनपर हाथ उठाया, तो महाराष्ट्र में तांडव मचेगा, ऐसी और इस तरह की सैकड़ों टिप्पणियां कमिश्नर के समर्थन में की गई हैं। इससे राज्यभर में मुंढे के समर्थकों की संख्या का अंदाजा लगता है। इसके अलावा, कुछ लोग उनके के समर्थन में नागपुर में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। नेटिज़ेंस ने यह भी चेताया कि मुंडे के खिलाफ बोलने वाले राजनीतिक नेताओं को संयम से बात करनी चाहिए।

विधायक खोपड़े को परसो आयोजित स्मार्ट सिटी बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। इसलिए, कहा जा रहा है कि वह पहले ही मुंढेपर चिढ़े है। उन्होंने इस संबंध में अध्यक्ष प्रवीण परदेशी को एक पत्र भी भेजा था। बैठक में, सब कुछ कमिश्नर मुंढे के खिलाफ चला गया और वह अब सीईओ नहीं होंगे, बल्कि केवल समन्वयक होंगे। इसलिए विधायक खोपड़े ने उपरोक्त मांग की। लेकिन उन्होंने शायद नहीं सोचा होगा कि इस मांग के नतीजे क्या होंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्तारूढ़ भाजपा और विधायक खोपड़े कमिश्नर मुंढे के बारे में क्या भूमिका निभाएंगे।‌‌

कलेक्टर, पुलिस आयुक्त सत्तापक्ष के साथ : मुंडे का समर्थन वापस लिया

नागपुर:- प्रशासन में चार्टर्ड अधिकारी की छवि जनता मे ज्यादा घुलमिल वाली नहीं लेकिन जनहित में काम करनेवाली होती है, राजनीति से उनका कोई सीधा संबंध नहीं होता है। लेकिन आजकल यह सब राजनीति का हिस्सा बन रहे है। अक्सर यह सुना जाता है कि आयुक्त को फलाने पार्टी द्वारा भेजा है, पुलिस आयुक्त को एक फलाने पार्टी द्वारा भेजा है। आदी आदी, स्मार्ट सिटी के सीईओ के रूप में परसो के घटनाक्रम ने अधिकारियों के बीच राजनीतिक विभाजन को स्पष्ट रेखांकित करवा दिया।

नगर आयुक्त ने नागपुर स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के खुद सीईओ बन स्मार्ट सिटी चलाने की कोशिश की। मेयर द्वारा उनका कड़े विरोध के बाद, आयुक्त और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच जारी संघर्ष, जो पहले से ही चल रहा था, तेज हो गया। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न आरोप लगाए गए हैं।

परसो तक, कमिश्नर कह रहे थे कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के चेयरमैन प्रवीण परदेशी ने उन्हें सीईओ पद संभालने के लिए फोन पर बताया था। पर परसो की बैठक में, परदेसीने जोर देकर कहा कि “आप स्मार्ट सिटी के सीईओ नहीं थे”। वहा मुंढे अकेले पड़ गए, भरी सभा में उनपर कठिन घड़ी आ गई। सभा में सब कानूनन जो लिखा है वह किया जाये इसपर सहमत थे पर मुंढे अकेले क्यों पड़े? गहराई से देखें तो इससे कुछ तथ्य सामने आए।‌‌

निगम में बीजेपी सत्ता में है और जब से मुंढे कमिश्नर के रूप में आए, उन्होंने सत्ता पक्ष के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने कई परियोजनाओं को रोक दिया। धन की कमी का कारण बताते स्वीकृत कार्य रुक गए। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने स्मार्ट सिटी के सीईओ का पद ईसी के लिए हथिया लिया था। राज्य में सत्ताधारी दल शिवसेना द्वारा हर बार कमिश्नर द्वारा किए गए कार्यों पर ध्यान दिया गया। फिर चाहे नदियों की सफाई मामला हो, या कोरोना लड़ाई में कोविद केयर सेंटर का निर्माण। पर्यावरण मंत्री ठाकरे ने हमेशा ट्विटर पर कमिश्नर की प्रशंसा की।

स्मार्ट सिटी के अध्यक्ष प्रवीण परदेशी को भाजपा का करीबी कहा जाता है। कमिश्नर को शिवसेना हलकों से लगातार समर्थन मिल रहा है। परसो की बैठक में भी, शिवसेना के एकमात्र नगरसेवक मंगला गवरे ने मुंढे के समर्थन में बात की थी। बैठक में, परदेशी ने नगरपालिका अधिकारियों कि साईड मे हामी भरी। इसलिए, कहा जा रहा है कि परदेशी प्रशासन में अधिकारियों होते हुए भी भाजपा के करीबी होने से उन्होंने मुंडे विरोधी रुख अपनाया।

शिवसेना ने परदेशी को मुंबई नगर आयुक्त के पद से हटा दिया था। यह भी एक वजह चर्चा में है। इसके अलावा जिला कलेक्टर रविंद्र ठाकरे और पुलिस आयुक्त डॉ भूषण कुमार उपाध्याय भी निदेशक के रूप में बैठक में शामिल हुए। दोनों चार्टर्ड ऑफिसर होकर भी उन्होंने बहुत सतर्कता और अप्रत्यक्ष रूप से मुंढे का विरोध किया। इसके पीछे भी दलगत राजनीति की वजह कही जा रही है।‌‌

मनमानी वीज बिलाला विरोध: भाजपचे नगारा आंदोलन

नागपूर:- लॉकडाऊनच्या कालावधीत लोक बंदिस्त राहिले. खासगी क्षेत्रातील नोकरदारांच्या पगारात मोठी कपात झाली. संसर्गाच्या भीतीमुळे लोकांनी उन्हाळ्यात एसी-कुलर वापरला नाही, मात्र महावितरणद्वारे लोकांना तीन महिन्यांच्या बिलातून हजारो रुपये द्यावे लागतायत. ही बिले रद्द करून सुधारित बिले पाठविण्याच्या उद्देशाने भाजपने शहराच्या चौकाचौकांत आंदोलन केले. गोळीबार चौकात शहराध्यक्ष प्रवीण दटके यांच्या नेतृत्वात झालेल्या आंदोलनात मोठ्या संख्येने अधिकारी व कार्यकर्ते सहभागी झाले होते.

ते म्हणाले की ऊर्जामंत्री नितीन राऊत यांनी चुका सुधारण्याऐवजी, नागरिकांना दिलासा देण्याऐवजी केंद्र सरकारकडे बोट दाखवले. राज्यातील शेतकर्‍यांचे शेतमाल खरेदीसाठी राज्य सरकार केंद्राकडे पाहत आहे. जर असे प्रत्येकच गोष्टीसाठी केंद्राकडे टक लावून बसले असाल तर सरकारने राज्यपालांकडे राजीनामा द्यावा. या वेळी महापौर संदीप जोशी, आमदार गिरीश व्यास, अनिल सोले, कृष्णा खोपडे, विकास कुंभारे, मोहन मते, मंडळाचे अध्यक्ष किशोर पलांदुरकर, विनोद कान्हेरे, संजय अवचट, देवेन दस्तूर, संजय चौधरी, भोजराज डुंबे, संजय ठाकरे, संजय बंगाले, राम अंबूलकर, सुनील मित्रा उपस्थित होते.

सत्तेवर बसण्याचा हक्क नाही: दटके म्हणाले की अशा सरकारला सत्तेवर बसण्याचा अधिकार नाही, जे संकटाच्या वेळीही नागरिकांना लुबाडण्याचे काम करतेय. चुकीचे बिल रद्द करत दुरुस्त करून ते पाठवा. या बिलांत एप्रिलमध्ये वाढविण्यात आलेला 7 टक्के वीज दर, एक वर्षासाठी रद्द करावा, अधिभार व व्याज रद्द करा, ऑनलाईन भरलेली रक्कम दुरुस्तीची बिले पाठवा. अन्यायकारक बिलं दुरुस्त होईपर्यंत जनआंदोलन सुरूच राहणार आहे.

दुकाने, कार्यालय बंद, मग इतके बिलं कसे?

भाजयुमो अध्यक्ष व्हेरायटी चौकात शिवानी दानी यांच्या नेतृत्वात ढोल वाजवून सरकारचा विरोध केला गेला. त्यांचेनूसार तीन महिने लॉकडाऊनमध्ये सर्वच दुकाने, कार्यालये, कारखाने व उद्योग बंद राहिले, परंतु या काळातले बिलं हजारो रुपयांचे, वाढिव महावितरणने पाठविले आहे. दुकाने बंद, वीज वापर नाही, तरीही विजेचे बिल सामान्यपेक्षा कित्येक पटीने अधिक पाठविले गेले. हे कसे शक्य आहे, उर्जामंत्री शहराचे आहेत, परंतु नागरिकांची दखल घेतली जात नाहीय हे दुर्दैव आहे. कान उघाडणीसाठीच नगारा आंदोलन ​​केले जात आहे. यावेळी राहुल खंगर, कमलेश पांडे, सारंग कदम, आलोक पांडे, दिपांशु लिंगायत, वैभव चौधरी, सचिन करारे, नेहल खानोरकर, रितेश रहाटे, सुबोध आचार्य, जितेंद्र सिंग ठाकूर उपस्थित होते. कार्यकर्त्यांनी राज्य सरकार आणि ऊर्जामंत्री यांच्याविरोधात घोषणाबाजीही केली.

जनतेवर अन्याय: भाजपा अजा मोर्चाचे वतीने कमाल चौक येथे धर्मपाल मेश्राम यांचे नेतृत्वात नगारा बजाओ चळवळ करण्यात आली. ते सांगतात कोरोना संकटात एकीकडे मध्यमवर्गीय आणि गरीब कुटुंबांसमोर गंभीर आर्थिक परिस्थिती उद्भवली आहे. अशा संकटाच्या वेळी दिलासा देण्याऐवजी सरकारतर्फे जनतेला लुबाडण्याचे काम केले जात आहे. मनमानी वीजबिल पाठवून नागरिकांवर अन्याय होत आहे. मुख्यमंत्र्यांनी लॉकडाऊन कालावधीच्या 3 महिन्यांचे वीज बिल पाठवले जाणार नाही सांगीतले परंतु हे सरकार तर लूट करीत आहे. मिलिंद माने, संदीप जाधव, अशोक मेंडे, सुभाष पारधी, भोजराज डुंबे, संजय चौधरी, प्रभाकर येवले, अमर बागडे, संदीप गवई, विजय चुटेले, लखन येरवार, महेंद्र धनवीजय, हरीश दिकोंडवार, उषा पॅलेट, निरंजन पाटील, सतीश शिरसवान, राहुल जांबरे, विशाल लारोकार, मनीष मेश्राम, राहुल मेंढे, शंकर मेश्राम, अजय करोसिया, संदीप बेले, बंडू गायकवाड, इंद्रजित वासनिक,विजय फुलसुंगे यांच्यासह मोठ्या संख्येने कार्यकर्ते सहभागी झाले होते.

आंदोलनात मोठा जमाव: शहरातील अनेक मुख्य चौकांमध्ये मोठ्या संख्येने जमावात कार्यकर्त्यांनी नगारा बजाओ आंदोलन केले. गोळीबार चौकातील श्याम चांदेकर, लॉ कॉलेज चौकात कल्पना पांडे, प्रदिप बिबटे, अवस्थी चौकात अजय पाठक, गिट्टीखदान चौकात माया इव्हनाते, शेखर येटी, नंदनवन चौकात रमेश वानखेडे, दोसर भवन चौकात लाला कुरेशी, शहिद चौकात भाजपा व्यवसाय आघाडीचे शहराध्यक्ष संजय वाधवानी, बैद्यनाथ चौकात जयसिंग कच्छवाह, प्रतापनगर चौकात भोलेनाथ सहारे, कॉटन मार्केट चौकात राम कोरपे, पुंडलिक सावंत, सक्करदरा चौकात संभाजी भोसले, पियुष अंबुलकर, गड्डीगोदाम चौकात विकास फ्रांसीस, रामनगर चौकात पीएसएन मूर्ती, संदीप पिल्ले, तर संविधान चौक येथे नचिकेत व्यास यांनी जनआंदोलनाचे नेतृत्व केले.

प्रवीण परदेशी ने मुंढे को चौका दिया! कहा, आप सीईओ थे ही नहीं!

नागपुर:- नगर आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्मार्ट सिटी के संबंध में निविदाएं, कर्मचारियों का निलंबन और उनके द्वारा किए गए अन्य कार्य अवैध थे ऐसा मेयर संदिप जोशी ने कहा। नागपुर स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशक मंडल ने आज स्मार्ट सिटी कार्यालय में बैठक की।

इसमें, अध्ब प्रवीण परदेसी ने आज की बैठक के बाद, “आप स्मार्ट सिटी के सीईओ नहीं थे”, यह कहते हुए उन्हें चौंका दिया। बैठक के बाद विगत माह भर से जारी पद का विवाद अब थम गया और अब इसे सत्तापक्ष की जित माना जा रहा है।

जैसा कि स्मार्ट सिटी परियोजना नागपुर नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में है, मैंने आपको इसकी बैठकों और गतिविधियों की निगरानी करने का मौखिक निर्देश दिया था। मैंने आपको कभी भी आपके द्वारा कर रखे कार्य के बारे में नहीं बताया। सीईओ की नियुक्ति अध्यक्ष नहीं करता है। वह निदेशक मंडल की बैठक में ही तय होती है ऐसा प्रविण परदेशी ने आयुक्त से कहा।

नियमप्रिय और कर्तव्यनिष्ठ आयुक्त कल की बैठक में सबके सामने झूठे ठहरे। आयुक्त ने जो भी कार्य उनके द्वारा किए सभी बैठक के दौरान सामने रखे गए, जो नियम के परे है उस बारे में सरकार से अधिकृत व्यक्ति द्वारा सलाह मशविरा कर बाद में बैठक में सबके सामने रखे जाएंगे एवं यथायोग्य कारवाही की जाएगी कहकर महापौर ने सभी निदेशकों को धन्यवाद दिया।‌‌

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कमिश्नर मुंढे की जगह डिप्टी सीईओ महेश मोरोने को नियुक्त करने का फैसला किया है, चेयरमैन प्रवीण परदेसी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में हिस्सा लिया। निदेशक और मेयर संदीप जोशी, स्थायी समिति के अध्यक्ष पिंटू झलके, सत्तारूढ़ दल के नेता संदीप जाधव, विपक्ष के नेता तानाजी वनवे, बसपा समूह नेता वैशाली नारनवरे, सेना पार्षद मंगव गवरे, जिला कलेक्टर रविंद्र ठाकरे, पुलिस आयुक्त डॉ भूषण कुमार उपाध्याय, नासुप्र स्पीकर शीतल उगले, सीए अनिरुद्ध शेनवई, सीए जयदीप शाह उपस्थित थे। केंद्र सरकार के दीपक कोचर ने भी ऑनलाइन भाग लिया था।

बैठक के बाद, महापौर संदीप जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में निदेशक मंडल की बैठक के बारे में जानकारी दी। जोशी ने कहा कि आयुक्त ने नगर आयुक्त को ही सीईओ नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है। हमने प्रस्ताव का विरोध किया और वोट से चुनाव करने की मांग थी। हालांकि, अध्यक्ष प्रवीण परदेसी ने मतदान के बजाय सभी की राय जानने का फैसला किया।

प्रारंभ में, उन्होंने कलेक्टर, पुलिस आयुक्त, नासुप्र वक्ताओं के राय मांगी। सभी ने एच आर नियम से चलने का सुझाव दिया, मेरे साथ संदीप जाधव, पिंटू झलके, तानाजी वनवे और वैशाली नारनवरे ने मांग की कि एचआर नीति के अनुसार नए पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त होने तक डिप्टी सीईओ को सीईओ का पदभार दिया जाना चाहिए। मेयर ने कहा कि यह चार्ज डिप्टी सीईओ महेश मोरोन को बहुमत से सौंपा गया है।‌‌

बीजेपी कलेक्टर विरोध मे आदित्य ठाकरे का अलग समर्थन

नागपुर:- कोरोना के प्रकोप के बाद से नागपुर में मृत्यु दर सबसे कम है। अन्य शहरों की तुलना में रोगियों की संख्या भी नियंत्रण में है। इसके लिए शुरू से ही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर जोर दिया गया। उपचार का एक तेज़ तरीका अपनाया गया था।

आयुक्त तुकाराम मुंडे ने 5,000 बेड की क्षमता वाला एक केंद्र भी स्थापित किया। राज्य के पर्यावरण, पर्यटन और शिष्टाचार मंत्री आदित्य ठाकरे ने निगम की सराहना की और आयुक्त के काम की प्रशंसा की।

पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नागपुर, नासिक और औरंगाबाद के आयुक्तों के साथ चर्चा की। कमिश्नर मुंढे ने कर्मठ भूमिका और नवीन उपायों के साथ नागपुर में कोरोना पर कड़ा नियंत्रण किया। उन्होंने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, परीक्षण और शीघ्र उपचार की व्यवस्था की। ठाकरे ने कहा कि अब राज्य के अन्य हिस्सों में भी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि निगम को घर-घर सर्वेक्षण और समूह अलगाव की रणनीति पर अधिक जोर देना चाहिए। ठाकरे ने निगम द्वारा कलमेश्वर में राधास्वामी सत्संग ट्रस्ट में 5,000 बेड के कोविड केयर सेंटर की भी सराहना की।

500 बेड तैयार हैं और यदि आवश्यकता हो, तो क्षमता को 5,000 तक और बढ़ाया जा सकता है, आयुक्त ने बताया और कोरोना को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। केंद्र सरकार की टीम ने भी नागपुर महानगर पालिका द्वारा किए गए उपायों की प्रशंसा की है।

निगम के अधीन अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 500 कर दी गई है। घरेलू सर्वेक्षण, गर्भवती महिलाओं, टी.बी. पेशंट, कुष्ठ रोगियों और कैंसर रोगियों की विशेष जांच और विशेष देखभाल की जाती है। आयुक्त मुंधे ने राज्य सरकार से एक अद्यतन एम्बुलेंस (लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस) प्रदान करने का अनुरोध किया। ठाकरे ने इस मांग पर उचित निर्णय लेने का वादा किया‌‌.

विधायक खोपड़े: बैठक का बुलावा मुझे क्यों नहीं?

नागपुर:- विधायक कृष्णा खोपड़े ने कंपनी के चेयरमैन प्रवीण परदेसी को पत्र लिखकर पूछा है कि उन्हें स्मार्ट सिटी कंपनी की बैठक में क्यों नहीं बुलाया गया। क्या यह जानबूझकर अनियमितताओं और घोटालों को छिपाने के लिए है? उन्होंने यह भी मांग की है कि इसका खुलासा किया जाए।

मेयर संदीप जोशी ने पहले ही आरोप लगाया है कि नगर आयुक्त तुकाराम मुंडे ने स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ का पद अवैध रूप से हड़प लिया है। उन्होंने सदर पुलिस स्टेशन में भी इस की शिकायत दर्ज कराई है।

वर्तमान में स्मार्ट सिटी के सीईओ पद को लेकर घमासान जारी हैं। उयपर विधायक कृष्णा खोपड़े को नहीं बुलाया गया तो उन्हें नाराजगी है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि बैठक से पहले क्या क्या होता है। स्मार्ट सिटी कंपनी की बैठक आज, शुक्रवार के लिए बुलाई गई है। इससे पहले नगर निगम में हुई स्मार्ट सिटी कंपनी की बैठक में तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामदास सोनवणे ने मुझे व्यक्तिगत रूप से फोन कर बुलाया था।

यही नहीं, बैठक का विषय पत्रिका को भी वह घर भेजते थे। लेकिन अबकी बार कल की ऑनलाइन मीटिंग का सरल नोटिस भी नहीं दिया गया है। दो दिन पहले, परदेसी से फोन पर संपर्क किया करने पर बताया गया कि बैठक में बुलाया जाएगा। हालांकि, कोई भी निमंत्रण आज तक नहीं बढ़ाया गया है।

मुंढे, जो स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ होने का दावा करते हैं, ने निदेशक मंडल की बैठक के अभाव में और प्रस्ताव के अभाव में वित्तीय फैसले लिए। यह एक बड़ी अनियमितता को दर्शाता है। खोपड़े ने यह भी संदेह व्यक्त किया कि उनके पूर्व नागपुर विधानसभा क्षेत्र में घोटालों और अनियमितताओं के बारे में सवालों से बचने के लिए उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया।

कृष्णा खोपड़े ने यह भी अनुरोध किया है कि यदि विधायकों को बैठक में आमंत्रित नहीं किया जाता है, तो उन्हें लिखित रूप में यह भी बताना चाहिए कि उन्हे पहले बैठक में किस प्रारूप पर भाग लिया जाने देते थे।

मुंढे ने लिया बदला? पढ़े क्या है मामला

नागपुर:- नगर आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बैठक आयोजित करने सुरेश भट सभागृह से इनकार करने पर जिला परिषद में बदला लेने की चर्चा छिड़ गई है।

आयुक्त जिला परिषद के सीईओ थे। वह फरवरी 2008 में सीईओ के रूप में शामिल हुए। लगभग एक सवा साल के लिए कार्यभार था। यहां भी उनकी कार्यशैली वही थी। आरोप भी यही लगाए गए कि वे पदाधिकारियों, सदस्यों को विश्वास में नहीं लेते, उनका सम्मान नहीं करते और समितियों पर विश्वास किए बिना निर्णय लिया करते।

इसलिए, अगस्त 2008 में आयोजित आम बैठक में, उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया था। उस समय, भाजपा और शिवसेना जिला परिषद में सत्ता में थे। रमेश मानकर अध्यक्ष थे। एवं विद्यमान कृषि सभापति तपेश्वर वैद्य उपाध्यक्ष थे।

उनकी प्रतिमा को भी तत्कालीन सदस्यों ने जिला परिषद के परिसर में जला दिया था। बैठक काफी तूफानी रही थी। तत्कालीन सीईओ मुंढे ने लगभग 40 मिनट तक भाषण दिया। इसमें उन्होंने पदाधिकारियों और सदस्यों के सभी आरोपों का खंडन किया। हालांकि, सदस्य संतुष्ट नहीं थे और अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया था।

यह लगभग सभी सदस्यों द्वारा समर्थित था। बैठक में उपस्थित पंचायत समिति सभापति ने अपना वोट नहीं डाला। यही कडी मुंढे ने पकड मामला सरकारी स्तर तक ले गए। सरकार ने मुंडे की बात मान ली और अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया। चूंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री का समर्थन था, इसलिए प्रस्ताव को अस्वीकार करने की बाते चली।

अब नगर निगम ने भट सभागृह नकारने के लिए कोई कारण नहीं दिया, लेकिन फिर भी जिला परिषद में चर्चाए जारी है कि बैठक के लिए हॉल प्रदान करने से इनकार अविश्वास प्रस्ताव के कारण ही था। ऐसी भी चर्चा है कि मुंडे ने सदन नकार कर अविश्वास प्रस्ताव का बदला लिया है।

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