वाहतुक पोलीस आता स्विकारणार नाहित चालानची रक्कम! वाचा का बर?

नागपूर: कोरोना विषाणू संक्रमणाचा वाढता फैलाव व प्रभाव लक्षात घेता दैनंदिन कामकाजांत व व्यवहारांत ऑनलाइन देवानघेवान प्रथेची संख्या सर्वत्र वाढली आहे. या संक्रमणात नोटांच्या अदलाबदली मधूनही कोरोना विषाणूचा प्रसार होण्याची संभावना बळावली असते यासाठीच नागपूर वाहतूक पोलिसांनीही चालान भरण्याच्या नियमात बदल केला आहे, गेले दोन दिवसांपासून वाहतूक नियम मोडणा-्यांचे चालान ऑनलाइन पद्धतीने सुरू आहे. या कारणाशिवाय वाहतूक संदर्भात नियम मोडणाऱ्यांना भर रस्त्यावर चलान भरतांना रोख रक्कम घेतानाचे व्हिडिओ खोडसाळपणे चुकीच्या रीतीने मांडून पोलिसांची बदनामी केली जायची त्यामुळे यासंदर्भात यापुढे अशाप्रकारे रोख रक्कमेस जागेवरच भरता येणार नाही तर यासाठी पेटीएम, गुगल पे, या ॲपद्वारे वा नेटबँकिंगने ऑनलाइन पद्धतीने चालान रक्कम भरता येईल अशी माहिती उपआयुक्त विक्रम साळी यांनी दिली
सद्ध्या कोरोना संक्रमणाचा कमाल प्रादुर्भाव वाढलेला आहे आणि पोलीस दल विशेषत: याबाबतीत रडारवर आहे, पोलीस दलात बहुसंख्य कर्मचाऱ्यांना कोरोनाची लागन झाली आहे, त्यामुळे वाहतूक विभाग दक्षता उपाययोजनांवर विशेष भर देत आहे अशी माहिती उपायुक्तांनी यावेळी दिली.
ते म्हणाले, लोकांच्या सर्वात जास्त संपर्कात वाहतूक विभागच असतो व त्यांचे विशेष डिव्‍हाइस द्वारे चालान भरण्याची जी पद्धत होती ती बदलण्याचा निर्णय घेतला गेला आहे, चालान केले असलेल्यास ट्रॅफिक विभाग सदर संबंधिची लिंक पाठवेल, त्या लिंक वरूनच त्या चालानची भरपाई करु शकतील अशी व्यवस्था केली गेलेली आहे.
ज्यांच्याकडे ऑनलाइन बँकिंग सुविधा नाही अथवा पेमेंट ॲप्स असलेला एण्ड्रॉईड मोबाईल नाही अश्यांच्या करिता “पेमेंट अनपेड” अशी सुविधाही त्यात ठेवलेली आहे ज्याचे साह्याने सदर ईसम ती रक्कम घरी गेल्यावर अथवा नंतर भरू शकेल त्यासाठीचा कालावधीही निश्चित करण्यात आलेला आहे. अशी माहिती विक्रम साळी यांनी यावेळी दिली.

मध्य रेलवे जल्द ही ले सकता है निर्णय , शुरू हो सकती है राज्य अन्तर्गत रेलवे सेवा

ट्रैन में सफर करने वालों के लिए खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने सोमवार से फैसला लिया है और राज्य सरकार ने ई पास रद्द कर दिया है ।अब महाराष्ट्र में यात्रियों को एक ही राज्य में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पास की जरूरत नहीं होगी। साथ ही रेलवे को लेकर भी बड़ा निर्णय हुआ है ।
एक ही राज्य में आवागमन के लिए मध्य रेलवे ने 2 सितंबर से बुकिंग की भी शुरुआत करने का फैसला लिया है।ज्ञात हो कि लॉकडाउन में रेलवे सेवा बंद कर दी गई थी और सिर्फ कुछ विशेष रेलवे सेवा दी जा रही थी।
बहरहाल एक ही राज्य के एक जिले से दूसरे जिले में जाने के लिए ई पास की अब जरूरत नहीं है।
इसके साथ ही मध्य रेलवे ने फिर से सेवा शुरू करने और सीट आरक्षण पद्धति से बुकिंग प्रारंभ करने का फैसला लिया है।
राज्य सरकार के मिशन बिगिन अगेन के अन्तर्गत लॉकडाउन के वक़्त बंद हुई बहुत सी सेवाओं को अब फिर से शुरू किया जाएगा लेकिन इसके साथ राज्य में लॉकडाउन 30 सितम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
क्या क्या शुरू होगा –
  • सामान्य दुकान,शराब दुकाने चालू रहेगी।
  • होटेल , लॉज पूरी तरह से फिर से चालू रहेंगे।
  • अंतरजिला प्रवास करने के लिए अब बिना ई पास के आवागमन हो सकेगा।
  • सरकारी ऑफिसेज कैपेसिटी के हिसाब से चालू रहेंगे।
  • निजी बस सेवाएं , मिनी बस सेवाएं आदि को परमिशन दे दी गई है।
  • टैक्सी -1+ 3 यात्री , रिक्शा – 1 + 2 यात्री , दोपहिया – 1 + 1 हेलमेट और मास्क के साथ परमिटेड है।
क्या क्या बन्द रहेगा –
  • स्कूल कॉलेज , इंस्टीट्यूट व क्लासेज बन्द लेकिन ऑनलाइन लर्निंग चालू रहेगी।
  • सिनेमा हॉल , स्विमिंग पूल , पार्क , थिएटर ,बार , ऑडिटोरियम आदि पहले कि तरह ही बन्द रहेंगे।
  • सामाजिक ,राजकीय, खेल , मनोरंजन ,सांस्कृतिक कार्यक्रम बंद रहेंगे।
  • मेट्रो सेवा भी बन्द रहेगी।
  • अंतरराष्ट्रीय विमान आवागमन बन्द रहेगा।

अनलॉक फेज 4 : राज्य की ठाकरे सरकार ने कई गतिविधियों पर लिए फैसले , होटलों की ऑक्युपेंसी में बढ़ोतरी

मुंबई अपडेट
कोरोना संक्रमण के चलते केंद्र सरकार ने कंटेनमेंट जोन के बाहर कई अन्य एक्टिविटीज को मंजूरी दे दी है।इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री ठाकरे ने भी प्रदेश के अंदर और बाहर कई एक्टिविटीज से प्रतिबंध हटाने का फैसला ले लिया है।इसके अनुसार प्रदेश में आने  या बाहर जाने के लिए किसी तरह के पास की जरूरत अब नहीं होगी।
सरकारी दफ्तरों, विद्यालयों और होटल्स में लोगों की अटेंडेंस बढ़ाने की मंजूरी भी सरकार की ओर से दी गई है।
महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सूत्रों के अनुसार,राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अनलॉक फेज 4.0 के अनुसार होटलों में ऑक्युपेंसी में बढ़ोतरी कर उसे 33 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है।इसके साथ ही सरकारी दफ्तरों में आईएएस लेवल के स्टाफ की शत-प्रतिशत उपस्थिति को भी मंजूरी मिल गई है। सब-ऑर्डिनेट स्टाफ की ऑफिसों में मौजूदगी को 15 से 30 फीसदी कर दिया गया है।और इसके साथ ही लोकल ट्रेनों के आवागमन को भी बढ़ाने का फैसला  ठाकरे सरकार ने किया है।
स्कूली छात्रों को भी छूट
आदेश अनुसार, 21 सितंबर से अपने सब्जेक्ट्स के डाउट्स क्लियर कराने के लिए क्लास 9 से 12 तक के स्टूडेंट्स स्व इच्छा से अपने स्कूल जा सकेंगे। स्कूलों में अटेंडेंस को लेकर राज्यों की सरकार केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का अनुकरण करेगी। इसके आधार पर माता-पिता की परमिशन के बाद क्लास 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को टीचर्स से परामर्श के लिए स्कूल जाने की अनुमति होगी।
अधिकारियों के अनुसार अनलॉक फेज 4.0 के दौरान मुख्यमंत्री कई अन्य मामलों में भी छूट देने का मन बना रहे थे परन्तु वह प्रदेश में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमणों को लेकर चिंता में हैं।इसी कारणवश बहुत से क्षेत्र अभी भी छूट मिलने की उम्मीद में है।

तुकाराम मुंढे के उसूलों , आदर्शों ने बनाया उन्होंने असाधारण व्यक्त्तिव , उन्हें समझना आसान नहीं

तुकाराम मुंढे, जिन्होंने तेरह से चौदह साल के अपने करियर में इसी तरह के बदलाव का अनुभव किया है। गुलाबी ठंड के कारण पुणे जमी हुई है, मूसलाधार बारिश के कारण मुंबई जाम है, नागपुर हीटस्ट्रोक से पीड़ित है। अब किधर यही सब है इस व्यक्ति के लिए।

साधारण लोग अपनी बुद्धिमत्ता को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि मैं एक ऐसा आदमी हूँ जिसने बारह गाँवों का पानी पिया था। लेकिन मुंढे उनसे भी बेहतर हो सकते हैं। हर बार, उनके ट्रांसफर के लिए अलग-अलग कारण बताए जाते हैं। लेकिन यह लेख उनके व्यक्तित्व के बारे में इतना असाधारण है कि किसी भी पार्टी नेता के लिए उन्हें मना पाना असंभव लगता है।

कोई राजनीति नहीं है और न ही बदलाव के तात्कालिक कारण हैं।केवल और केवल उसका स्वभाव,शायद इन बातों को पढ़ने के बाद, आपने यह भी कहा कि एक अधिकारी के रूप में एक आदमी को पचा पाना वास्तव में मुश्किल है।

अब, इस बारे में क्या खास है? विशेष रूप से, कारण वे मांसाहार छोड़ा हुआ है। लेकिन अधिकारी बनने के बाद, उन्होंने बाहर भोजन नहीं करने का फैसला किया। किसी होटल या किसी रिश्तेदार के घर डिनर के लिए निमंत्रण जाने के बाद, उसके साथ बंधन अपने आप बढ़ जाता है। “काम से संबंधित” स्थिति में फंसने का भी खतरा है। ऐसा मुंढे का कहना है।

ऐसे समय में, उन्होंने खुद के लिए बाहर खाना बंद करने का नियम बनाया। उसी से उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया। यह एक ऐसा आदमी है जिसने कभी दूसरे का नमक नहीं खाया है ताकि वह किसी के मुंह से यह गलती से न निकले कि आपने हमारा नमक खाया है।

अब बात करते हैं उनके कुछ साहस भरे उसूलों और निर्णयों की –

  • मुंढे ने तहसील कार्यालय की दीवार को हटाकर यह कार्रवाई की थी। जैसा कि यह एक सरकारी कार्यालय था किन्तु, उन्होंने कोई राहत नहीं दी। तुकाराम मुंढे सरकार पर सीधे अतिक्रमण करने वाले एकमात्र अधिकारी रहे होंगे। तुकाराम मुंडे को जानने वाले लोग कहते हैं कि वे केवल दो चीजों को जानते हैं। एक नियम के अनुकूल नहीं है, और दूसरा नियम के अनुकूल है। इसके अलावा वे काम नहीं करते हैं। यदि नियमों का पालन किया गया, तो काम किया जाएगा। इसलिए, वे उन अधिकारियों के रूप में जाने जाते हैं जो रिकॉर्ड समय में फ़ाइल को पूरी करते हैं।
  • तुकाराम मुंडे के अनुसार, मैं किसी समुदाय का सदस्य नहीं हूं, लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी हूं। और काम सबके सामने करता हूं।वह यूपीएससी के माध्यम से देश में 20 वें स्थान पर थे। वह मसूरी में प्रशिक्षण अवधि के दौरान आयोजित घुड़सवारी प्रतियोगिताओं में देश भर से नए भर्ती किए गए IAS प्रशिक्षुओं के बीच पहले स्थान पर आए।
  • कई लोगों ने अलग-अलग प्रलोभन दिखाए कि कैसे यह अधिकारी तैयार नहीं था। ऐसे ही एक अवसर पर, एक व्यक्ति ने उनसे कहा कि भले ही आपकी ज़रूरतें कम हों, आपके बच्चों को अच्छी अंग्रेजी माध्यम सीखना चाहिए। क्या आपको नहीं लगता कि उसे एक बड़े स्कूल से बड़ा होना चाहिए? उन्होंने कहा
  • “मैं जिला परिषद स्कूल से सीखने के बाद एक अधिकारी बन गया। मेरे बच्चे भी सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करके अपने जीवन के लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं ”
  • उन्होंने कुछ दिनों पहले एक साक्षात्कार में जवाब दिया था। तुकाराम मुंढे कहते हैं कि मैं अपने बड़े भाई से डरता हूं। तुकाराम मुंढे के भाई अशोक मुंढे। बचपन से एक बड़े भाई के रूप में, उन्हें अपने बड़े भाई का सम्मानजनक भय है। और वे खुले तौर पर इसे स्वीकार करते हैं।
  • मुंडे लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान राज्य सेवा आयोग की परीक्षाएं भी हुईं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और उन्हें कक्षा दो अधिकारी के रूप में चुना गया। इस बीच, उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय लोक सेवा आयोग की तैयारी फिर से शुरू की। साक्षात्कार देने के बाद, उन्होंने अपने करीबी लोगों को बताना शुरू कर दिया कि वह कम से कम 20 वर्षों में देशसेवा में आ सकते हैं।
  • राज्य में सूखा पड़ा था और टैंकर द्वारा पानी की आपूर्ति के लिए प्रशासन जिम्मेदार था। इस दौरान, एक गाँव का दौरा करते समय, तुकाराम मुंढे ने सड़क के एक तरफ हरे रंग के खेत और पानी के अपव्यय को देखा। मुंडे ने तुरंत शेष कुओं को सरकार को सौंप दिया, उन्हें कृषि उद्देश्यों के लिए छोड़ दिया, और टैंकरों ने क्षेत्र में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी।
  • कुछ दिनों पहले, मीडिया ने तुकाराम मुंढे के घर पर स्थापित किए गए गणनारायण के दर्शन को दिखाया था। यदि आप इसे देखते हैं और किसी को बताते हैं कि आप नास्तिक है, तो कोई भी आम तौर पर सहमत नहीं होगा। लेकिन मजेदार बात यह है कि मुंढे नास्तिक हैं। लेकिन नास्तिकता की उनकी व्याख्याएं अलग हैं।
  • एक करीबी दोस्त का भाई दीवाली के लिए उससे मिलने आया था। उस समय, उन्होंने दिवाली उपहार के रूप में अपने सिर के लिए एक अखरोट का पैकेट लिया था। मुंढे ने लेने से इनकार कर दिया। इसलिए लड़के ने उन्हें कम से कम एक अखरोट खाने के लिए गले लगाया। मुंशी ने न केवल उपहार लेने से इनकार कर दिया, बल्कि एक अखरोट खाने से भी इनकार कर दिया। एक ही सिद्धांत किसी भी उपहार पर लागू नहीं होता है। उन्होंने भोजन को अपने बैग में रखा लेकिन कोई उपहार नहीं लिया ।अब, अगर इतने सीधे, सरल और राजसी व्यक्ति का स्वभाव किसी के रास्ते में खड़ा होना है, तो कोई भी उसके लिए कुछ भी नहीं कर सकता है। क्या अधिक हो सकता है, आपको खुद को थोड़ा बदलना होगा, लेकिन यह बेहतर होगा

आयुक्त मुंढे ठरले राजकारणाचे बळी: आपचे बदलीविरोधात आंदोलन

नागपूर:- शहरात साफसफाई ते कोरोना साथीशी निगडीत कामे उत्तमपणे करणे, तसेच आर्थिक क्षमतेसह शिस्तीचा विकास करण्यापर्यंत आयुक्त मुंढे यांनी प्रयत्न केले, परंतु विरोधी पक्ष, नगरसेवक, आमदार, मनपाच्या सत्तापक्षाच्या राजकारणामुळे त्यांची बदली झाली आहे. असा आरोपी आम आदमी पक्षाने काल केला.

संविधान चौकात गुरुवारी झालेल्या बदलीविरोधात प्रदर्शन विदर्भ राज्य समितीचे सदस्य संयोजक देवेंद्र वानखेडे यांचे नेतृत्वात झाले. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांनी त्वरित बदली रद्द करण्याची मागणी करत आंदोलकांचा असा विश्वास आहे की ब-याच दिवसानंतर या शहराला कर्तव्यनिष्ठ आणि प्रामाणिक अधिकारी सापडला. पण इथल्या राजकीय लोकांना असा अधिकारी पसंत पडला नाही.

षडयंत्र रचल्याचा आरोप:

आंदोलकांनी सांगितले की, मुंढे यांची बदली रद्द करण्यासाठी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांना निवेदनही पाठविण्यात आले आहे. या निवेदनात ते म्हणाले की सत्ताधारी पक्षाने आणि मनपाच्या विरोधकांनी आयुक्तांविरूद्ध कट रचले आणि त्यांना त्रास दिला. शहराला एक प्रामाणिक आयएएस अधिकारी मिळाला. ज्यामुळे स्वच्छता बाबी व कोरोनावर नियंत्रण मिळविण्यात बरेच यश मिळाले. शहरास स्मार्ट सिटीमध्ये बदलण्यासाठी तत्सम अधिका-याचीच गरज आहे. मनपा रुग्णालयांचे नूतनीकरण, गटारे स्वच्छ करणे, भ्रष्टाचार कमी करणे, आर्थिक शिस्त लादणे आणि मनपाचे उत्पन्न वाढविणे यासाठी मुंढे यांच्यासारख्या आयुक्तांची गरज आहे.

अन्यथा रस्त्यावर मोठ्या प्रमाणात निदर्शनं:

लोकप्रतिनिधी मुंढेंवर शहर व शहरातील जनतेच्या प्रश्नांची जाणीव नसल्याचा आरोप करीत असल्याचा आरोप आंदोलकांचा होता. पण आता असे दिसते की इथल्या लोकप्रतिनिधींनाच जनतेला काय हवे आहे हे माहित नाही. तत्काळ प्रभावाने ही बदली रद्द केली गेली नाही तर आंदोलन करण्यासाठी रस्त्यावर येण्याचा इशाराही आंदोलकांनी दिला. निषेध करणार्‍यांमध्ये जगजितसिंग, अशोक मिश्रा, भूषण ढाकुलकर, शंकर इंगोले, निलेश गोयल, कृतल वेलेकर, पियुष आकरे, गिरीश तितरमारे, हरीश गुरानी, ​​संजय सिंह, आकाश कावळे, राहुल कावडे, विवेक चापले, जय चव्हाण, दयानंद सट्टा, आकाश काळे, अलका पोपटकर, अरविंद बिसन, शंकर इंगोले, सुरेश खर्चे, रवींद्र कुथे, अजय धरम, अमोल हाडके, सुरेंद्र मेश्राम, सचिन लोणकर, संतोष वैद्य, प्रशांत निलटकर, बनते पंजासीम. रवींद्र शेळकर धैर्य आगाशे, प्रतीक बावनकर, सुनील गोरेडकर, अरुण सनन, राकेश उराडे, निलेश सिंग गहलोत, गिरीश तीतरमारे, पियुषा आकरे, कृताल वेलेकर, अखिल भगत, दीपक भटकारे, रोशन डोंगरे, नितीन रामटेके, सुशांत बोरकर, राकेश खोबागडे, निशांत मेश्राम, रवींद्र घिडौडे, नरेश साखरे, उमेश बेंडेकर, मनोज वरघट, सचिन पारधी, निखिल मेडवडे, चंद्रशेखर ढोभले, इम्तियाज अली, नरेंद्र चौधरी यांचा समावेश होता.

Mundhe ‘s lack of realistic approach won 15 transfers in 15 years

The 15-year journey of fourty-five-year – old Tukaram Mundhe in the bureaucracy was marked by 15 transfers. For the notorious bureaucrat, his longest stay was on completing a two-year stint as a joint commissioner in the sales tax department. He hadn’t even spent a year elsewhere.

In power corridors, assignment in the sales tax department, particularly as joint commissioner, is considered to be the most negligible. Many officers posted as joint commissioners see it as a stop gap assignment before they get a selection posting. “We call it a car-park. Bureaucrats who don’t win plum assignment take the job for a brief time in the sales tax department and then resign, “a senior bureaucrat said.

A 2005 batch IAS officer, Mundhe was Municipal Commissioner of Nagpur and was suddenly transferred on Wednesday without offering any reasons. He had spent less than seven months in Nagpur. His batchmates described Mundhe as the most truthful and upright officer, but the realistic approach was lacking.

“We have always advised him during our conversation with him not to stick out too long on other topics. He has not listened to our advice and now he is paying the price. We live in a democratic set-up, so we can not neglect elected officials. Transfer is part of the Indian bureaucracy but 15 transfers seem poor in 15 years of service,’ one of them said.

तुकाराम मुंढे यांची अचानकपणे मुंबई येथे बदली

नागपूर:- शिस्तप्रिय कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी म्हणून ओळखले जाणारे नागपूरचे आयुक्त तुकाराम मुंढे यांची अचानकपणे सदस्य सचिव महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण या रिक्त पदावर मुंबई येथे बदली करण्यात आलेली आहे. या संबंधितचे बदली आदेश पत्रकाची प्रत एव्हाना सर्वत्र व्हायरल झालेली आहे. व्हाट्सअप वर व्हायरल होत असलेली या प्रतीची शहानिशा केल्या जात आहे. त्यांना राधाकृष्णन बी. यांचेकडे पदाचा प्रभार सोपविण्याचे सदर आदेशात अंकित आहे

नागपूर महानगरपालिकेत सत्ता पक्षासह सतत होत असलेल्या संघर्षांमुळे मुंढे नेहमीच नागरिकांच्या चर्चेचा विषय होते तर नुकतेच कोरोना काळातील उपाय योजना संदर्भात न्यायालयाने प्रशासनाच्या कामकाजांत सुधारणा विषयीचे मुंढेना निर्देश दिले होते त्यातच

काल मुंढे स्वत: कोरोना अहवालात पॉझिटिव असल्याचे निष्पन्न झाले होते व पुढील 14 दिवस होम काॅरंटाइन राहून आपले कार्य करण्यावर त्यांनी भर दिला होता. याच पार्श्वभूमीवर आता बदली मुळे त्यांचे पुढचे पाऊल काय असणार याकडे सर्वांचे लक्ष लागून आहे

शहरातील सर्व सिनेमागृह चालू करण्याची व्यवस्थापक व संचालकांची मागणी

नागपूर:- कोरोना प्रसार रोखथामासाठी लादलेला लॉकडाऊन दोनच महिन्यात अनलॉकमध्ये बदलला गेला बरेच उद्योगधंदे व सार्वजनिक स्थळांना मोकळीकही दिली गेलीय परंतु सिनेमागृह अद्याप बंद आहेत, सर्व सिनेमागृह चालकांची, कर्मचा-यांची दैनावस्था तब्बल सहा महिने उलटूनही अद्याप संपलेली नाही. यामुळे शहरातील सिनेमागृह संचालकांनी सिनेमागृह उघडण्यास प्रशासनाने परवानगी द्यावी हि मागणी लावून धरली आहे.

सर्वच सार्वजनिक उपक्रम जवळपास मोकळे केले गेलेले आहेत. प्रवास व परिवहन व्यवस्थाही सोशल डिस्टेंसींग पाळत सुरू आहे, अशात सिनेमागृहांतच गर्दि होईल हा समज दूर सारणे गरजेचे आहे, गर्दिस आवर घालण्यास सोशल डिस्टेंस काटेकोरपणे थेटरलाच शक्य आहे, प्रत्येक सिनेमागृहांना प्रशस्त आवार आहेत, दोन ते तीन खुर्च्यांआड प्रेक्षक बसवण्याची सोय येथे शक्य आहे.

दारातच येणा-याचे सॅनिटाईजेशन सहज आहे, मधल्या काळात हॉल सॅनिटाईजेशन तत्व राबविले जाईल, पार्किंग प्रशस्त आहे, ऑनलाईन तिकीट बुकिंगने सुरूवातीची गर्दीही होणार नाही. ईत्यादी सर्व उपाय योजना करण्यास तयार सज्ज असुनही थेटरच्या सुरू होण्याबाबत प्रशासन दुर्लक्ष करित आहे.

सिनेमागृहावर अवलंबित असणारे चालक, कर्मचारी रोजगाराच्या संधीस मुकत आहेत, त्यांचे परिवाराची आबाळ होत आहे, या बाबीकडेही व्यवस्थापकांचे शिष्टमंडळाने लक्ष वेधून दिले. व लवकरात लवकर शहरातील सर्व सिनेमागृह चालू करावी अशी यावेळी विनंती केली.

मुख्यमंत्री मदत निधीतून कोविड 19 साठी नागपूरला मिळाले 1 कोटी 20 लाख

नागपूर:- 28 मार्च रोजी कोरोना साथीच्या आपत्कालीन परिस्थितीशी लढण्यासाठी मुख्यमंत्री मदत निधी कोविड 19 ची स्थापना केली गेली. याद्वारे 3 ऑगस्टपर्यंत मुख्यमंत्री मदत निधी कोविड -19 च्या बँक खात्यातून 132,25,89,610 रुपये या आजारावर खर्च झाले आहेत. शहरातील आरटीआय कार्यकर्ते अभय कोलारकर यांनी माहिती अधिकारांतर्गत मुख्यमंत्री मदत निधी कोविड -19 च्या बँक खात्यात जमा केलेली रक्कम व खर्चाबाबत सरकारकडे माहिती मागितली होती.

माहितीच्या अधिकारात या निधीतून नागपूरला किती पैसे पुरवले गेले याचीही माहिती त्यांनी मागितली. त्याला उत्तर म्हणून सहाय्यक लेखापाल आणि मुख्यमंत्री मदत निधीचे जन माहिती अधिकारी मिलिंद काबडी म्हणाले की, रिलीफ फंड कोविड -19 च्या बँक खात्यात 15 जून पर्यंत 427,28,24,023 रुपये जमा झाले आहेत तर 3 ऑगस्टपर्यंत 541,18,45,751 रुपये जमा झाले आहेत. कोरोना साथीच्या रोगाचा सामना करण्यासाठी नागपूर जिल्हाधिकारी कार्यालयाला या खात्यातून 1 कोटी 20 लाख रुपयांचा निधी प्रदान करण्यात आला आहे. काबडी म्हणाले की, कोविड फंडकडून सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल (मुंबई) यांना २० कोटी, जिल्हा रुग्णालय रत्नागिरी 1,07,06,920 तर जिल्हा रुग्णालय जालना यांना समान रक्कम प्रदान करण्यात आली आहे.

मात्र, अद्याप नागपुरात कोणत्याही रुग्णालयाला निधी मिळालेला नाही. कोलारकर यांनी या निधीसाठी दिलेल्या पैशावरील प्राप्तिकराबाबत प्रश्नाला उत्तर देताना, माहिती अधिकारी म्हणाले की सर्व राशी 100 टक्के करमुक्त होती. आरटीआय द्वारे विचारणा झालेल्या औरंगाबाद अपघातात मृत व स्थलांतरित लोकांसाठी मुख्यमंत्री मदत निधी कोविड 19 फंडातून खर्च रकमेचीही माहिती मागितली गेली.

जिला परिषद 30 अगस्त तक बंद- मुख्यालय के सभी कार्यालय होंगे सैनिटाइज

नागपुर:- दरअसल जिला परिषद मुख्यालय में लगातार कोरोना मामले बढ़ते जा रहे हैं। संक्रमण का फैलाव देखते हुए अब इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी कार्यालयों का सेनेटाईजेशन करने के लिए 30 अगस्त तक मुख्यालय बंद रखने के आदेश सीईओ योगेश कुंभेजकर की ओर से जारी किए गए।

जारी किए गए आदेश के हिसाब से सोमवार से शुरू होगा  सेनेटाईजेशन का काम। जिसके तहत कार्यालय कामकाज के लिए बंद रहेंगे।कोविद-19 व जरूरी सेवा से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों को छोड़कर निर्धारित समयावधि में सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग को मुख्यालय की पूरी बिल्डिंग सेनेटाईज करने के निर्देश दिए गए। सभी डिपार्टमेंटल हेड्स को कार्यालय सेनेटाईज करने के लिए एक जिम्मेदार कर्मचारी और सहयोगी की नियुक्ति करने के आदेश दिए गए हैं।

कोरोना सिम्पटम्स पाए जाते ही विभाग प्रमुख से करें सम्पर्क।सीईओ की तरफ से जारी किए गए निर्देशानुसार निर्धारित समय के भीतर सभी विभागों के कार्यालय सेनेटाईज करने होंगे। जिसके तहत रोज़ सेनेटाईजेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जारी किए गए आदेशों से भले ही 30 तक कार्यालय बंद रहे, लेकिन जरूरी कामों के विषय में कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय में उपस्थित रहना होगा।

सीईओ के निर्देशों में कहा गया कि जरूरी कामों के लिए महाराष्ट्र नागरी सेवा नियम 1981 के नियम 34 के अनुसार किसी भी कर्मचारी को बुलाए जाने पर उसे तुरंत उपस्थित रहना होगा। साथ ही अधिकारी और कर्मचारी को दिए गए जरूरी सरकारी कामकाज को खत्म करने के लिए इस समय ई-मेल या वाट्सअप के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों के कॉन्टैक्ट में रहने के आदेश भी दिए।दरअसल कि एक हफ्ते पहले ही 3-4 डिपार्टमेंट्स में कर्मचारियों के कोरोना इंफेक्टेड निकलने के बाद सीईओ ने मुख्यालय में अधिकारियों, पदाधिकारियों व जिप सदस्यों व कर्मचारियों को छोड़कर शेष किसी के भी प्रवेश पर रोक लगा दी थी।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन विभाग में कर्मचारियों के कोरोना पाजिटिव मिलने के बाद से ही बाकी कर्मचारियों में इस बात को लेकर रोष था कि कार्यालय में जो बाहरी लोग अपने कामों के लिए बड़ी तादात में आ रहे हैं उससे उन्हें भी खतरा है। कुछ डिपार्टमेंट्स के कर्माचारियों में तो इस बात को लेकर गुस्सा था कि सरकार ने 15 फीसदी या 15 कर्मचारियों को ही रोटेशन में ड्यूटी पर बुलाया जाना चाहिए लेकिन 1-2 विभागों में उससे ज्यादा लोगों की ड्युटी लगाई जा रही थी।

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