तुकाराम मुंढे के उसूलों , आदर्शों ने बनाया उन्होंने असाधारण व्यक्त्तिव , उन्हें समझना आसान नहीं

तुकाराम मुंढे, जिन्होंने तेरह से चौदह साल के अपने करियर में इसी तरह के बदलाव का अनुभव किया है। गुलाबी ठंड के कारण पुणे जमी हुई है, मूसलाधार बारिश के कारण मुंबई जाम है, नागपुर हीटस्ट्रोक से पीड़ित है। अब किधर यही सब है इस व्यक्ति के लिए।

साधारण लोग अपनी बुद्धिमत्ता को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि मैं एक ऐसा आदमी हूँ जिसने बारह गाँवों का पानी पिया था। लेकिन मुंढे उनसे भी बेहतर हो सकते हैं। हर बार, उनके ट्रांसफर के लिए अलग-अलग कारण बताए जाते हैं। लेकिन यह लेख उनके व्यक्तित्व के बारे में इतना असाधारण है कि किसी भी पार्टी नेता के लिए उन्हें मना पाना असंभव लगता है।

कोई राजनीति नहीं है और न ही बदलाव के तात्कालिक कारण हैं।केवल और केवल उसका स्वभाव,शायद इन बातों को पढ़ने के बाद, आपने यह भी कहा कि एक अधिकारी के रूप में एक आदमी को पचा पाना वास्तव में मुश्किल है।

अब, इस बारे में क्या खास है? विशेष रूप से, कारण वे मांसाहार छोड़ा हुआ है। लेकिन अधिकारी बनने के बाद, उन्होंने बाहर भोजन नहीं करने का फैसला किया। किसी होटल या किसी रिश्तेदार के घर डिनर के लिए निमंत्रण जाने के बाद, उसके साथ बंधन अपने आप बढ़ जाता है। “काम से संबंधित” स्थिति में फंसने का भी खतरा है। ऐसा मुंढे का कहना है।

ऐसे समय में, उन्होंने खुद के लिए बाहर खाना बंद करने का नियम बनाया। उसी से उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया। यह एक ऐसा आदमी है जिसने कभी दूसरे का नमक नहीं खाया है ताकि वह किसी के मुंह से यह गलती से न निकले कि आपने हमारा नमक खाया है।

अब बात करते हैं उनके कुछ साहस भरे उसूलों और निर्णयों की –

  • मुंढे ने तहसील कार्यालय की दीवार को हटाकर यह कार्रवाई की थी। जैसा कि यह एक सरकारी कार्यालय था किन्तु, उन्होंने कोई राहत नहीं दी। तुकाराम मुंढे सरकार पर सीधे अतिक्रमण करने वाले एकमात्र अधिकारी रहे होंगे। तुकाराम मुंडे को जानने वाले लोग कहते हैं कि वे केवल दो चीजों को जानते हैं। एक नियम के अनुकूल नहीं है, और दूसरा नियम के अनुकूल है। इसके अलावा वे काम नहीं करते हैं। यदि नियमों का पालन किया गया, तो काम किया जाएगा। इसलिए, वे उन अधिकारियों के रूप में जाने जाते हैं जो रिकॉर्ड समय में फ़ाइल को पूरी करते हैं।
  • तुकाराम मुंडे के अनुसार, मैं किसी समुदाय का सदस्य नहीं हूं, लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी हूं। और काम सबके सामने करता हूं।वह यूपीएससी के माध्यम से देश में 20 वें स्थान पर थे। वह मसूरी में प्रशिक्षण अवधि के दौरान आयोजित घुड़सवारी प्रतियोगिताओं में देश भर से नए भर्ती किए गए IAS प्रशिक्षुओं के बीच पहले स्थान पर आए।
  • कई लोगों ने अलग-अलग प्रलोभन दिखाए कि कैसे यह अधिकारी तैयार नहीं था। ऐसे ही एक अवसर पर, एक व्यक्ति ने उनसे कहा कि भले ही आपकी ज़रूरतें कम हों, आपके बच्चों को अच्छी अंग्रेजी माध्यम सीखना चाहिए। क्या आपको नहीं लगता कि उसे एक बड़े स्कूल से बड़ा होना चाहिए? उन्होंने कहा
  • “मैं जिला परिषद स्कूल से सीखने के बाद एक अधिकारी बन गया। मेरे बच्चे भी सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करके अपने जीवन के लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं ”
  • उन्होंने कुछ दिनों पहले एक साक्षात्कार में जवाब दिया था। तुकाराम मुंढे कहते हैं कि मैं अपने बड़े भाई से डरता हूं। तुकाराम मुंढे के भाई अशोक मुंढे। बचपन से एक बड़े भाई के रूप में, उन्हें अपने बड़े भाई का सम्मानजनक भय है। और वे खुले तौर पर इसे स्वीकार करते हैं।
  • मुंडे लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान राज्य सेवा आयोग की परीक्षाएं भी हुईं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और उन्हें कक्षा दो अधिकारी के रूप में चुना गया। इस बीच, उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय लोक सेवा आयोग की तैयारी फिर से शुरू की। साक्षात्कार देने के बाद, उन्होंने अपने करीबी लोगों को बताना शुरू कर दिया कि वह कम से कम 20 वर्षों में देशसेवा में आ सकते हैं।
  • राज्य में सूखा पड़ा था और टैंकर द्वारा पानी की आपूर्ति के लिए प्रशासन जिम्मेदार था। इस दौरान, एक गाँव का दौरा करते समय, तुकाराम मुंढे ने सड़क के एक तरफ हरे रंग के खेत और पानी के अपव्यय को देखा। मुंडे ने तुरंत शेष कुओं को सरकार को सौंप दिया, उन्हें कृषि उद्देश्यों के लिए छोड़ दिया, और टैंकरों ने क्षेत्र में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी।
  • कुछ दिनों पहले, मीडिया ने तुकाराम मुंढे के घर पर स्थापित किए गए गणनारायण के दर्शन को दिखाया था। यदि आप इसे देखते हैं और किसी को बताते हैं कि आप नास्तिक है, तो कोई भी आम तौर पर सहमत नहीं होगा। लेकिन मजेदार बात यह है कि मुंढे नास्तिक हैं। लेकिन नास्तिकता की उनकी व्याख्याएं अलग हैं।
  • एक करीबी दोस्त का भाई दीवाली के लिए उससे मिलने आया था। उस समय, उन्होंने दिवाली उपहार के रूप में अपने सिर के लिए एक अखरोट का पैकेट लिया था। मुंढे ने लेने से इनकार कर दिया। इसलिए लड़के ने उन्हें कम से कम एक अखरोट खाने के लिए गले लगाया। मुंशी ने न केवल उपहार लेने से इनकार कर दिया, बल्कि एक अखरोट खाने से भी इनकार कर दिया। एक ही सिद्धांत किसी भी उपहार पर लागू नहीं होता है। उन्होंने भोजन को अपने बैग में रखा लेकिन कोई उपहार नहीं लिया ।अब, अगर इतने सीधे, सरल और राजसी व्यक्ति का स्वभाव किसी के रास्ते में खड़ा होना है, तो कोई भी उसके लिए कुछ भी नहीं कर सकता है। क्या अधिक हो सकता है, आपको खुद को थोड़ा बदलना होगा, लेकिन यह बेहतर होगा

कार्यालय से नदारद सरकारी कर्मचारी! क्या है वजह?

नागपुर:- नगर निगम और नागपुर पुलिस ने संयुक्त रूप से सभी सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को शहर के नागरिकों के ऑक्सीजन परीक्षण प्रक्रीया में भाग लेने का आदेश दिया है। नतीजतन, कर्मचारियों की कमी के कारण शुक्रवार को लगभग सभी सरकारी कार्यालय के कामकाज बंद थे।

कोरोना के कारण, पहले ही केवल 15 प्रतिशत कर्मचारियों को काम करने की अनुमति है। उसपर ऑक्सीजन परीक्षण के लिए उन्हें काम में लगाया जा रहा है। परिणामस्वरूप, दिनभर लोक निर्माण विभाग में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। सभी को फोन करके थाने बुलाया जा रहा है।

लगातार फोन आने के कारण कर्मचारियों को अपना काम छोड़कर थाना पहुँचना पड़ा। शहर में कुल 28 पुलिस स्टेशन हैं। सुबह, सरकारी कार्यालयों में किसको कौनसा थाना मिला यही चर्चाए हुई। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को भी बुलाया गया है। उन लोगों के लिए भी आदेश जारी किए गए हैं, जो स्थानांतरित हुए उनके बदले जो आए उन्हें ऑक्सीजन परीक्षण के लिए बुलाया गया है।

कोरोना की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि के साथ वरिष्ठ नागरिकों को की ऑक्सीजन स्तर का परीक्षण किया जाएगा। नगर निगम, जिला कलेक्टर कार्यालय और गैर-सरकारी संगठनों  के प्रतिनिधि घर-घर जाकर जांच करेंगे।

सुरक्षा का क्या?

हमें घर-घर जाकर ऑक्सीजन की जांच करने कहा गया है । यह अपील की जा रही है कि कोरोना के समय आवश्यक कार्यों के अलावा कोई भी घर से बाहर नहीं निकले। दूसरी ओर, लोगों को समूह बनाकर घर घर जाने के लिए कहा जा रहा है। इसके लिए कोई सुविधाए भी नहीं दी जा रही है। स्टाफ सवाल कर रहा है कि इस बीच, अगर कोई कोरोना से संक्रमित होता है तो कौन जिम्मेदार होगा।‌‌

गणेशोत्सव: तलावांमध्ये विसर्जनावर निर्बंध: मूर्ती घरीच विसर्जित कराव्यात~ महापौर

नागपूर:- कोरोना साथीच्या संकटाकाळामध्ये गणेशोत्सव साजरा केला जातो आहे. महामारी कायदा लागू आहे, रोगप्रसार रोखण्यास्तव जमावबंदी आहे त्यामुळे महापौर संदीप जोशी यांनी लोकांना त्यांच्या घरी मूर्तींचे विसर्जन करण्याचे आवाहन केले. ते म्हणाले की, नागपूरातील सर्व तलावांमध्ये विसर्जन करण्यास बंदी घालण्यात आली आहे. आवश्यकतेनुसार कृत्रिम तलावांची व्यवस्था मनपाने जागोजागी केली आहे.

शुक्रवारी त्यांनी या व्यवस्थेचा आढावा घेतला. फुटाळा, सोनेगाव, सक्करदरा आणि गांधीसागर तलाव येथे जाऊन अधिका-यांकडून याबाबत व्यवस्थेची व यंत्रणेची माहिती घेतली. उपमहापौर मनीषा कोठे, स्थायी समिती सभापती पिंटू झलके, संदीप जाधव, वीरेंद्र कुकरेजा, प्रकाश वराडे, हरीश राऊत, किरण बगडे, आदी याप्रसंगी उपस्थित होते.

कृत्रिम तलावांची संख्या 50 टक्क्यांनी कमी: 

कोरोना संसर्गामुळे विसर्जनस्थळावर गर्दी होऊ नये, यास प्राधान्य दिले जात आहे. दरवर्षीच्या तुलनेत कृत्रिम तलावांची संख्या यंदा 50 टक्क्यांनी कमी केली गेली आहे. आवश्यकतेनुसारच कृत्रिम तलाव वापरण्याचे आवाहनही त्यांनी यावेळी सर्वांना केले आणि विसर्जनाच्या वेळी फक्त 2 जणांनाच परवानगी असेल असे सांगीतले.

सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळांनाही तलावांवर विसर्जन करण्यास येऊ नये, संबंधित जवळचे जागेत मूर्तीचे विसर्जन करावे, असे आवाहन करण्यात आले. यावर्षी “विसर्जन तुमच्या दारात” ही संकल्पना मनपाद्वारे राबविली जात आहे. 10 झोनमध्ये विसर्जन रथाची व्यवस्था करण्यात आली आहे. त्याचे संपर्क क्रमांकही मनपाच्या अधिकृत सोशल मीडियावर प्रसिद्ध करण्यात आले आहेत.

व्यक्तिश: नव्हे तात्विक विरोध, बदलीमागे सरकारच : महापौर जोशीं

नागपूर:- काल आयुक्त मुंढे यांची बदली झाली त्यानंतर सर्वसामान्य जनतेत अनेक प्रश्नचिन्ह उमटले, ते सोशल मीडियाद्वारे सहज प्रतिक्रिया रूपांत पाहायलाही मिळाले. मुंडे हे “राजकारणाचा बळी’, ‘जोशी जिंकले’ वगैरे आरोप-प्रत्यारोपांच्या फैरीही झडल्या पण या दरम्यान महापौर जोशी यांचेवर सतत विचारणांचा पाऊस पडत होता, अशातच त्यांनी जनसंवादाद्वारे काही प्रश्नांची उत्तरे दिली. त्यातील पहिला प्रश्न अर्थातच मुंडेंना हलवण्याबाबत च्या “राजकी खेळी”चा होता. पण जोशी यांनी त्यास सपशेल नकार देत या मुद्द्यात काही तथ्य असल्याचे नाकारले.

जनसंवाद माध्यमातून महापौर जोशी यांनी जनतेच्या प्रश्नांना उत्तरे दिली त्यावेळी त्यांनी स्पष्ट केले की मुंढे यांचे बदली संदर्भात त्यांचेवतीने कसलाही राजकीय दबाव वा वजन वापरले नाहीय, प्रत्यक्षात अशा बदलीचे अधिकार स्थानिकांना नाहीत.

राज्य सरकार अशा बदली करते व मुंढे हे एकमेव बदली झालेयत का? महाराष्ट्रात काल रोजी १६ प्रशासकीय अधिका-यांची हालवाहालव झाली आहे, पर्यायाने ती मुख्यमंत्र्यांचे अखत्यारीत येते माझा व त्यांचा राजकीय पक्ष निराळा, पक्षीय ध्येयधोरणं निराळी. अशात आम्ही म्हणू ते होईलच का? हे सा-यांनी समजून घ्यावे

दुसरा मुद्दा म्हणजे सर्व व्यापा-यांची कोरोना तपासणी बंधनकारक यास माझा विरोध का? तर अशी तपासणी करवून घ्यायला हा विरोध नव्हता, फक्त मुदतीत सगळ्याच म्हणजे तब्बल पाच लाख व्यापारी कर्मचारी या सर्वांची कोरोना तपासणी हे काही तडकाफडकी होणारे काम नाही ना! मग यावर ज्यांना लक्षणे आहेत त्यांनीच ही तपासणी करावी असा उतारा आला.

पण ते ही सहज आहे का? व्यापाऱ्याला दिवसभरात कित्येक ग्राहक भेटीस येत असतात तपासणी केल्यानंतर २ तासांनी पुन्हा तो बाधित होऊ शकतो, तपासणीत तो बाधीत नाही पण दिवसभरात होणारच नाही याची खात्री आहे का? याशिवाय व्यापाऱ्यांनी तपासणी खाजगी मध्येच करावी आहे हा आग्रह चुकीचा नाही का? पाच लाख लोक ₹1900 तपासणी म्हणजे 95 कोटी खाजगी लॅबोरेटरीजना देणे ही भूमिका योग्य होती का?

आधीच लॉकडाउन ने खचलेला पिचलेला हा वर्गच भुर्दंड का भरेल, सोसेल अशी माझी भूमिका होती, त्या भूमिकेस धरून मी हा खुलासा दिला होता. हा चुकीचं वाटत असेल तर काय बोलावे

व्यक्तिश: नव्हे तात्विक विरोध, बदलीमागे सरकारच : महापौर जोशीं

नागपूर: काल आयुक्त मुंढे यांची बदली झाली त्यानंतर सर्वसामान्य जनतेत अनेक प्रश्नचिन्ह उमटले, ते सोशल मीडियाद्वारे सहज प्रतिक्रिया रूपांत पाहायलाही मिळाले. मुंडे हे “राजकारणाचा बळी’, ‘जोशी जिंकले’ वगैरे आरोप-प्रत्यारोपांच्या फैरीही झडल्या पण या दरम्यान महापौर जोशी यांचेवर सतत विचारणांचा पाऊस पडत होता, अशातच त्यांनी जनसंवादाद्वारे काही प्रश्नांची उत्तरे दिली. त्यातील पहिला प्रश्न अर्थातच मुंडेंना हलवण्याबाबत च्या “राजकी खेळी”चा होता. पण जोशी यांनी त्यास सपशेल नकार देत या मुद्द्यात काही तथ्य असल्याचे नाकारले.

जनसंवाद माध्यमातून महापौर जोशी यांनी जनतेच्या प्रश्नांना उत्तरे दिली त्यावेळी त्यांनी स्पष्ट केले की मुंढे यांचे बदली संदर्भात त्यांचेवतीने कसलाही राजकीय दबाव वा वजन वापरले नाहीय, प्रत्यक्षात अशा बदलीचे अधिकार स्थानिकांना नाहीत. राज्य सरकार अशा बदली करते व मुंढे हे एकमेव बदली झालेयत का? महाराष्ट्रात काल रोजी १६ प्रशासकीय अधिका-यांची हालवाहालव झाली आहे, पर्यायाने ती मुख्यमंत्र्यांचे अखत्यारीत येते माझा व त्यांचा राजकीय पक्ष निराळा, पक्षीय ध्येयधोरणं निराळी. अशात आम्ही म्हणू ते होईलच का? हे सा-यांनी समजून घ्यावे

दुसरा मुद्दा म्हणजे सर्व व्यापा-यांची कोरोना तपासणी बंधनकारक यास माझा विरोध का? तर अशी तपासणी करवून घ्यायला हा विरोध नव्हता, फक्त मुदतीत सगळ्याच म्हणजे तब्बल पाच लाख व्यापारी कर्मचारी या सर्वांची कोरोना तपासणी हे काही तडकाफडकी होणारे काम नाही ना! मग यावर ज्यांना लक्षणे आहेत त्यांनीच ही तपासणी करावी असा उतारा आला. पण ते ही सहज आहे का? व्यापाऱ्याला दिवसभरात कित्येक ग्राहक भेटीस येत असतात तपासणी केल्यानंतर २ तासांनी पुन्हा तो बाधित होऊ शकतो, तपासणीत तो बाधीत नाही पण दिवसभरात होणारच नाही याची खात्री आहे का? याशिवाय व्यापाऱ्यांनी तपासणी खाजगी मध्येच करावी आहे हा आग्रह चुकीचा नाही का? पाच लाख लोक ₹1900 तपासणी म्हणजे 95 कोटी खाजगी लॅबोरेटरीजना देणे ही भूमिका योग्य होती का?

आधीच लॉकडाउन ने खचलेला पिचलेला हा वर्गच भुर्दंड का भरेल, सोसेल अशी माझी भूमिका होती, त्या भूमिकेस धरून मी हा खुलासा दिला होता. हा चुकीचं वाटत असेल तर काय बोलावे

जनसामान्य के “हीरो” मुंढे , 15 वर्ष के कार्यकाल में 14 ट्रांसफर

प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंढे जो कि जनता की सेवा में तत्परता से लगे रहते हैं।इस शासन सेवा में उन्हें लगातार 15 वर्ष हो गए लेकिन इन 15 वर्षों में उनके 14 बार ट्रांसफर हो चुके हैं।
तुकाराम मुंढे का जन्म एक सामान्य परिवार में महाराष्ट्र के बीड में हुआ था।सत्र 2005 में उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में आईएएस पद प्राप्त किया।वह 15 वर्ष की प्रशासनिक सेवा के रिकॉर्ड में 14 बार ट्रांसफर देख चुके हैं।वैसे तो प्रशासनिक सेवाओं में अधिकारियों का हर 2 वर्ष के बाद तबादला होता है किन्तु आईएएस तुकाराम मुंढे ने अपने 15 वर्ष के कार्यकाल में 14 बार ट्रांसफर देख लिए है। इनके बारे में कुछ तय नहीं कहा जा सकता के ये एक पद पर कितने समय तक रहेंगे।
खैर जल्द ही वो नागपुर मनपा आयुक्त का पदभार छोड़ महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण में सहसचिव पद ग्रहण करने वाले हैं।उनकी कार्यशैली के पैटर्न के बारे में सब अलग अलग बात करते हैं, जनसामान्य के लिए “हीरो”और राजकिय पटल के लिए”विलेन” के किरदार में समझे जाते हैं।उन्होंने प्रशासनिक सेवा में ज्वाइनिंग प्रशिक्षणार्थी उप जिलाधिकारी सोलापुर के रूप में अगस्त 2005 में की थी।
उसके बाद अलग अलग विभागों में अलग अलग पद पर रहते हुए उन्होंने शासकीय सेवा में योगदान दिया।ज्ञात हो कि उन्होंने इस वर्ष जनवरी में नागपुर मनपा आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था और सिर्फ 8 महीने में ही उनका ट्रांसफर हो रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी के अगस्त 2020 में सदस्य सचिव महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण , मुंबई में कब तक कार्यरत रहते हैं?

Including Covid-19 as top priority: New civic leader

Nagpur:- IAS officer Radhakrishnan B, who on Friday would take over as the new municipal commissioner, said it had Covid-19 at the top of its priority list. A host of challenges present the new civic chief; unfinished schemes, poor roads, a lack of funds, weak account management, besides spiraling Covid-19.

“With news of an increase in Covid-19 cases in Nagpur, my first priority will be to supervise infection control management and planning,” Radhakrishnan told. After taking over as the civic chief he can focus on other tasks once he gets to know the situation.

“I ‘m going to evaluate the situation, and work accordingly,” he said. Radhakrishnan also convoked a meeting of all department heads on Friday at 9.45 am. Radhakrishnan had been called Wednesday to succeed Tukaram Mundhe. The grapevine has it that, at the insistence of city MP Nitin Gadkari and NCP chief Sharad Pawar, Mundhe was moved.

नागरिकांची ऑक्सीजन पातळी तपासणी: २८ ठिकाणी तपासणी केंद्रे

नागपूर: कोरोनाशी लढा देताना मनपासह संपूर्ण आरोग्य विभाग व्यस्त आहे, त्यातच आता पोलिस ठाण्यांमधूनही लोकांच्या ऑक्सिजन पातळीची तपासणी करण्याचा निर्णय घेण्यात आला आहे. गुरुवारी विभागीय आयुक्त संजीव कुमार, सीपी भूषणकुमार उपाध्याय, जिल्हा दंडाधिकारी रवींद्र ठाकरे, अति. आयुक्त जलज शर्मा यांच्या संयुक्त बैठकीत हा निर्णय घेण्यात आला.

कोरोनाचे सतत वाढणारे दुष्परिणाम रोखण्यासाठी ज्येष्ठ नागरिकांची ऑक्सिजन पातळी, विशेषत: साखर, बीपी आणि इतर आजारांनी ग्रस्त असणा-यांची मनपा आणि पोलिस विभाग संयुक्तपणे तपासणी करेल. शुक्रवारी सकाळी 10.30 वाजता स्थानिक नगरसेवक व पोलिस निरीक्षक यांच्या उपस्थितीत शहरातील 28 पोलिस ठाण्यांमध्ये याची सुरूवात होईल. ज्यामध्ये काही स्वयंसेवी संस्था देखील सहभागी होतील.

मृत्यूचे आकडे कमी होऊ शकतात: चर्चेवेळी असे सांगितले गेले की शहरात कोरोनाचा संसर्ग सतत वाढत आहे. मृत्यूची संख्याही वाढत आहे. कोरोना रूग्णांमध्ये जेव्हा ऑक्सिजनचे प्रमाण कमी होते तेव्हा रुग्णांचे आरोग्य अधिक खराब होते. भविष्यासाठी धोका निर्माण होतो. त्यामुळे रुग्णांच्या ऑक्सिजन पातळीची तपासणी केली जाईल. या अभियानामधे मनपाचे कर्मचारी, स्वयंसेवी संस्था यांचे प्रतिनिधीदेखील पोलिसांसह लोकांच्या घरी जाऊन चौकशी करतील. नगरसेवकांच्या सहकार्याची अपेक्षा करीत महापौर संदीप जोशी म्हणाले की, प्राणवायूच्या पातळीचे परीक्षण केल्यास मृत्यूची संख्या कमी करण्यात यश मिळू शकते. लोकांना जवळच्या पोलिस ठाण्यात जाऊन तपासणी करण्याचे आवाहनही त्यांनी यावेळी केले.

तुकाराम मुंढे यांची अचानकपणे मुंबई येथे बदली

नागपूर:- शिस्तप्रिय कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी म्हणून ओळखले जाणारे नागपूरचे आयुक्त तुकाराम मुंढे यांची अचानकपणे सदस्य सचिव महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण या रिक्त पदावर मुंबई येथे बदली करण्यात आलेली आहे. या संबंधितचे बदली आदेश पत्रकाची प्रत एव्हाना सर्वत्र व्हायरल झालेली आहे. व्हाट्सअप वर व्हायरल होत असलेली या प्रतीची शहानिशा केल्या जात आहे. त्यांना राधाकृष्णन बी. यांचेकडे पदाचा प्रभार सोपविण्याचे सदर आदेशात अंकित आहे

नागपूर महानगरपालिकेत सत्ता पक्षासह सतत होत असलेल्या संघर्षांमुळे मुंढे नेहमीच नागरिकांच्या चर्चेचा विषय होते तर नुकतेच कोरोना काळातील उपाय योजना संदर्भात न्यायालयाने प्रशासनाच्या कामकाजांत सुधारणा विषयीचे मुंढेना निर्देश दिले होते त्यातच

काल मुंढे स्वत: कोरोना अहवालात पॉझिटिव असल्याचे निष्पन्न झाले होते व पुढील 14 दिवस होम काॅरंटाइन राहून आपले कार्य करण्यावर त्यांनी भर दिला होता. याच पार्श्वभूमीवर आता बदली मुळे त्यांचे पुढचे पाऊल काय असणार याकडे सर्वांचे लक्ष लागून आहे

10 दिवसांत हटणार साई मंदिर परिसरातील अतिक्रमण: मनपाने हायकोर्टात दिली माहिती

नागपूर:- वर्धा रोडवरील साई मंदिर परिसरात बर्‍याच दिवसांपासून अतिक्रमण करून असलेल्या दुकानांवर तातडीने कारवाई करण्यासाठी मुंबई हायकोर्टाच्या नागपूर खंडपीठातील श्री साईबाबा सेवा मंडळाच्या वतीने याचिका दाखल केली होती. या याचिकेवरील सुनावणीदरम्यान मनपाने दहा दिवसांत अतिक्रमण हटविण्याबाबत माहिती दिली.

मनपाच्या वतीने अॅडव्होकेट जेमिनी कासट या केसची मांडणी करीत आहेत, या अतिक्रमणास हटविण्यासाठी पोलिस बंदोबस्त मागविण्यात आला असल्याचे जेमिनी कासट यांनी कोर्टाला सांगितले. तो मिळताच त्वरित कारवाई सुरू केली जाईल. नुकतेच हायकोर्टाने मनपा आयुक्त, लक्ष्मीनगर झोनचे सहाय्यक आयुक्त, प्रन्यासचे सभापति आणि मंदिर परिसरातील अतिक्रमण करणार्‍यांना नोटीस बजावली आहे.

याचिकाकर्ता वतीने तुषार मांडलेकर यांनी बाजू मांडली. ते म्हणाले की श्री साईबाबा मंडळाने  10894 चौरस फूट जमीन (खसरा क्रमांक 21/4) दिली होती 31 डिसेंबर 1974 रोजी पी.के. बॅनर्जींकडून 35000 रुपये आणि शिवानी बॅनर्जींकडून 4500 चौरस फूट (खसरा क्र. 43/6) 93,500 रुपयात विकत घेतली. या दोन्ही जमिनी विवेकानंदानगरच्या आहेत.

9 जणांनी या जमिनीवर अतिक्रमण करून बेकायदेशीरपणे दुकाने बांधली आहेत. 19 मार्च 1999 रोजी प्रन्यासने बेकायदा बांधकाम केल्याबद्दल दोषींना नोटीस पाठविली होती. यानंतर अतिक्रमण करणार्‍यांनी जमीनीवर दिवाणी कोर्टात हक्क सांगितला पण सुनावणी दरम्यान त्यांना त्या जागेची मालमत्ता सिद्ध करता आली नाही.

पार्किंगची मोठी समस्या: कायदेशीर प्रक्रियेनंतर मंडळाच्या वतीने मनपाकडे तक्रार केली गेली. 1 जानेवारी 2020 रोजी मनपाने सर्व अतिक्रमणधारकांस जमीन रिकामी करण्यासाठी नोटीस पाठविली होती, परंतु त्यानंतर प्रशासनाने कोणतीही कारवाई केली नाही. याचिकेत असे सांगितले गेलेय की दर गुरुवारी मंदिरात साईबाबांच्या दर्शनासाठी दर गुरुवारी 50,000 हून अधिक भाविक येतात. अशा परिस्थितीत अतिक्रमणामुळे नागरिकांना पार्किंगच्या समस्येला तोंड द्यावे लागत आहे. अतिक्रमणामुळे पार्किंगची व्यवस्था करणे शक्य नाही.

Exit mobile version