आयुक्त मुंढे के कक्ष क्यों पहुंचे सत्तापक्ष वालें?

नागपुर:- जल कर वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं ऐसा कहने वाले आयुक्त के कक्ष के बाहर लगभग 70 नगरसेवकों ने भौतिक दूरी का पालन करते हुए एक आंदोलन किया, और आयुक्त को चेताया। हाल के दिनों में यह पहली बार है जब सभी आयुक्त के खिलाफ आंदोलन कर रहे है।

कोरोना ने शहर के नागरिकों की आर्थिक स्थिति को गंभीर बना दि है। इसलिए, नगरसेवकों ने अब मांग की है कि इस साल वार्षिक जल कर नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। मेयर जोशी ने बुधवार को प्रशासन को 20 अगस्त को होने वाले निगम के सभा में इस संबंध में एक प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। हालांकि, आयुक्त कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए, नगरसेवकों ने आज अगले तूफानी सभा का संकेत दिया।

वर्तमान में कोरोना युग के दौरान कईयो की नौकरियां चली गई हैं। जो नौकरी पेशा हैं उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल रहा। बिजली कंपनी ने बिल को तीन गुना कर दिया। इसलिए मध्यम वर्ग और गरीबों मे परेशानिया है। हर साल टैरिफ के 5 प्रतिशत बढ़ाने के निर्णय होने के बावजूद, वरिष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी और सत्तारूढ़ दल के नेता संदीप जाधव के नेतृत्व में लगभग 70 नगरसेवकों ने सिविल लाइंस स्थित नगर आयुक्त कार्यालय के सामने आंदोलन किया कि इस विपदा अवधि के दौरान ऐसा नहीं किया जाना चाहिए यही उनकी मांग रही।‌‌

इस समय, कुछ ने डिमांड बोर्डों पर लिखी घोषणाएं भी पकड़ी हुई थी। इसलिए, संकेत हैं कि आयुक्त और पार्षदों के बीच संघर्ष तेज होगा। आंदोलन में परिवहन समिति के अध्यक्ष बाल्या बोरकर, विधी सभापति अॅड धर्मपाल मेश्राम, वरिष्ठ पार्षद डॉ छोटू भोयर, सभापति अभय गोटेकर, पार्षद वर्षा ठाकरे, प्रगति पाटिल, दिव्या धुरडे आदि उपस्थित थे।

हाल के दिनों में आयुक्त के खिलाफ अधिकारियों द्वारा आंदोलन की यह पहली ही घटना है। इससे पहले टी चंद्रशेखर जब कमिश्नर थे, तब उन्होंने खेल सामान घोटाले में सत्तापक्ष को जेल का रास्ता दिखाया था ऐसा ही आंदोलन हुआ था।

कमिश्नर का बयान गलत: मेयर जोशी कहते हैं

आयुक्त का कहना गलत है कि जल कर को कम नहीं किया जा सकता है। कोरोना ने सभी की वित्तीय स्थिति को बदतर बना दिया है। आयुक्त को मूल्य वृद्धि पर जोर नहीं देना चाहिए। टैक्स का फैसला एक साल के लिए टाल दिया जाना चाहिए। हाउस टैक्स कम करने का फैसला करेगा। आयुक्त को यह प्रस्ताव सरकार से मंजूर करवाना चाहिए। सरकार दरबार में अपने वजन का लाभ उठा उसका फायदा नागपुर के लोगों को देना चाहिए।‌‌

अधिकारियों ने कमिश्नर के खिलाफ क्यों बिगुल फूंका?

नागपुर:- आयुक्त मुंढे के उल्लेख के बाद की अब जल कर वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं, बिल बांटे जा चुके हैं, अधिकारियों ने अब उनके खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। आर्थिक रूप से परेशान नागरिकों पर जल कर बढ़ाने का आयुक्त का निर्णय गलत है। अगले तीन दिनों में फैसला वापस नहीं लिया गया, तो सभी 108 भाजपा पार्षद 13 अगस्त से आयुक्त कार्यालय के सामने आंदोलन करेंगे, यह चेतावनी सत्ता पक्ष के नेता संदीप जाधव ने दी।

मेयर संदीप जोशी ने भी कमिश्नर को निर्देश दिए थे कि वे पानी चार्ज न बढ़ाएं। लेकिन आयुक्त ने इसकी सुध नहीं ली। प्रशासन द्वारा स्थायी समिति को भेजे गए प्रस्ताव को स्थायी समिति द्वारा वापस भेज दिया गया। हालांकि, आयुक्त ने विपरीत जवाब दिया। यह प्रस्ताव केवल पंजीकरण के लिए भेजा गया था। आयुक्त ने बताया था कि स्थायी समिति के पास इसे अनुमोदित करने या न करने का अधिकार नहीं। वर्तमान में कोरोना काल के दौरान कई नौकरियां चली गई हैं। जो नौकरी पेशा हैं उन्हें पूरा वेतन नहीं मिलता है।‌‌

बिजली कंपनी ने बिल को तीन गुना कर दिया। इसने मध्यम वर्ग और गरीबों की कमर तोड़ दी है। हालांकि हर साल 5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है, पर यह इस कठिन अवधि के दौरान नहीं किया जाना चाहिए था, सत्तारूढ़ पार्टी के नेता संदीप जाधव ने यह मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 13 अगस्त को शाम 4 बजे 108 भाजपा पार्षद आयुक्त कार्यालय के सामने आंदोलन करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन का पहला चरण होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के बाद भी निर्णय नहीं लिया जाता है, तो जनआंदोलन बुलाना होगा और पूरी जिम्मेदारी वर्तमान पालक मंत्री, आयुक्त और प्रशासन पर होगी।

पालक मंत्री डाॅ राउत पर भी टिप्पणी कर कहा गया, यदि शहर में पानी की दरों में वृद्धि की जा रही है, तो पालक मंत्री पुरणत: जिम्मेदार रहेंगे। आयुक्त विरोधाभासी फैसले लेते हैं, लेकिन पालक मंत्री हस्तक्षेप नहीं करते हैं। यहां तक ​​कि कांग्रेस के नगरसेवक भी चुप हैं, इसलिए मुंढे को सामने रखकर कि गईं यह कांग्रेस पार्टी की साजिश है।

गुडधे ने कहा, भाजपा ने बढ़ाई दरें: पानी की दरों में वृद्धि का निर्णय आयुक्त की जिम्मेदारी नहीं है। यह भाजपा द्वारा सदन में लिया गया निर्णय है। उस समय, कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया गया था। अब, कांग्रेस पर अपने पापों को छिपाने झूठा आरोप लगाया जा रहा है। संदीप जाधव को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। झूठ बोलना सही नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक प्रफुल्ल गुड्डे पाटिल ने कहा कि इस मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।‌‌

अगर आगे बिजली बिल के लिए आत्महत्या होगी तो संघर्ष करेंगे: चंद्रशेखर बावनकुले

नागपुर:- बिजली बिल के लिए आत्महत्या हो रही हो तो यह काफी शर्म की बात है। अब तक, 1300 से अधिक आत्महत्याएं हुई हैं। पिछले चार महीनों से, हम सरकार से बिजली बिल माफ करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। पूर्व ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आज चेतावनी दी कि अगर बिजली के बिलों के लिए कोई और आत्महत्या करता है, तो भाजपा अब सरकार के साथ संघर्ष करेगी।

शनिवार को यशोधरा नगर निवासी लीलाधर गायधने ने बिजली के बड़े बिल के कारण आत्महत्या कर ली। उन्हें उनके दो मंजिला घर के लिए 40,000 रुपये का बिजली बिल भेजा गया था। उसके बाद भी, उन्होंने बिल को कम करने के लिए बिजली वितरण कार्यालय के कई चक्कर काटे। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

अंत में, हताशा में, उसने शनिवार दोपहर अपने घर के सामने खुद को आग लगा ली। इस घटना ने लोगों में गुस्सा पैदा कर दिया है। पूर्व ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होने चेतावनी दी कि वह अब बिजली के बिल के लिए आत्महत्या कतई सहन नहीं करेंगे, कोई लाइनमैन किसी के घर में बिजली काटने के लिए जाता है, तो वह सरकार से संघर्ष करेंगे।

श्री बावनकुले ने कहा, हमारी सरकार में, 45 लाख किसानों के पांच साल मे 28,000 करोड़ बकाया थे लेकिन हमने कोई कनेक्शन नहीं काटा। हम पिछले चार महीनों से मांग कर रहे हैं कि इस सरकार को 1200 यूनिट का बिजली बिल चार महीने के लिए 300 यूनिट प्रति माह माफ करना चाहिए। लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

इसी वजह से ऐसी आत्महत्याएं हो रही हैं। सरकार बिजली बिल के कारण आत्महत्या करने का समय ले आई है। क्योंकि कोई भी सामान्य व्यक्ति इस तरह के बिल का भुगतान नहीं कर सकता है। अभी भी समय नहीं गया है। सरकार को चार महीने के लिए 300 यूनिट प्रति माह के लिए 1,200 इकाइयों का बिजली बिल माफ करना चाहिए और आत्महत्याओं को रोकना चाहिए।

बढे पानी शुल्क आगे बढ़ाए: भाजपा ने आयुक्त को चेताया

नागपुर:- कमिश्नर मुंढे को कोरोना काल मे पानी की दरों में बढ़ोतरी सालभर स्थगित करने पर निर्णय लेना चाहिए। अन्यथा, वित्तीय संकट में जुझ रहे नागरिकों पर बोझ फिर से बढ़ जाएगा। सत्तारूढ़ दल ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो सभी 108 भाजपा पार्षद 13 अगस्त से आयुक्त कार्यालय के सामने आंदोलन करेंगे।

सत्तारूढ़ दल के नेता संदीप जाधव ने यह चेतावनी दी है। मेयर संदीप जोशी ने भी जताया था कि पानी के चार्जेस में बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। कमिश्नर को निर्देश दिया। लेकिन आयुक्त ने इसकी सुध नहीं ली। प्रशासन द्वारा स्थायी समिति को भेजे गए प्रस्ताव को स्थायी समिति द्वारा वापस भेज दिया गया। हालांकि, आयुक्त ने विपरीत जवाब दिया।

यह प्रस्ताव केवल पंजीकरण के लिए भेजा गया था। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति के पास इसे अनुमोदित करने या न करने का कोई अधिकार नहीं था। वर्तमान में कोरोना महामारी चल रही है। कईयों की नौकरी चली गई। जो नौकरी पेशा हैं उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल रहा है। बिजली कंपनी ने बिल को तीन गुना कर दिया। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर, अन्य सभी दुकानें लगातार 3 महीने तक बंद रहती हैं।

इसने मध्यम वर्ग और गरीबों की कमर तोड़ दी है। इस पर पानी के टैरिफ को बढ़ाने के फैसले से लोगों को और आर्थिक नुक्सान बैठेगा। हालांकि यह दर हर साल 10 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया गया है, लेकिन इस कठिन अवधि के दौरान ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी से भी नगर निगम को ज्यादा वित्तीय लाभ नहीं होगा। इसलिए, यह सुझाव दिया गया है कि यह कुछ समय के बिना किसी वृद्धि के निकाला जाना चाहिए।

यदि तीन दिनों के भीतर इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो सभी 108 नगरसेवक 13 अगस्त को शाम 4 बजे आयुक्त कार्यालय के सामने आंदोलन करेंगे। यह आंदोलन का पहला चरण होगा। यदि इसके बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, भले ही वर्तमान स्थिति ठीक न हो, तो लोगों के आंदोलन को बुलाना होगा और पूरी जिम्मेदारी वर्तमान पालक मंत्री, आयुक्त और प्रशासन पर होगी।

एनएमआरडीए ने विनाशुल्क भूखंड नियमित करावे: बावनकुळे यांची मागणी

नागपूर:- उपराजधानीचे माजी पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे यांनी कोणतीही फी न आकारता एनएमआरडीए अंतर्गत सर्व भूखंड नियमित करण्याची मागणी केली आहे. ते म्हणाले की, शहराचे क्षेत्र आता वाढत आहे. शहरातील ग्रामीण भागात नागरिकांनी मोठ्या संख्येने घरे बांधण्यास सुरुवात केली आहे. अनेक भूखंडांवर इमारती उभ्या राहिल्या आहेत.

नागपूर ग्रामीण, कामठी, हिंगणा इत्यादीचा परिसर शहरालगत आहे. जो एनएमआरडीएच्या अखत्यारीत येतो. यापूर्वी, अनधिकृत लेआउटमध्ये राहणा-या नागरिकांनी त्यांचे भूखंड विक्री केली आहेत, जे अद्याप नियमित केलेले नाहीत.

बरेच लेआउट्स अनियमित: बावनकुळे म्हणाले की एनएमआरडीएच्या स्थापनेपूर्वी, त्या भागांमध्ये अनेक अनधिकृत लेआउट तयार केले गेले होते. बर्‍याच उद्योगांच्या आगमनामुळे वर उल्लेखीत तीन्ही तहसीलचे लोक शहरालगतच्या भागात स्थायिक झाले आहेत. बर्‍याच लोकांनी पक्के घरे बांधली आहेत. हे अनधिकृत लेआउट आता नियमित करणे आवश्यक आहे. वरील सर्व परिसर आता येलो झोनमध्ये आले आहेत, ज्यामुळे सरकारने त्यांस त्वरित नियमित करण्याचा निर्णय घ्यावा.

नागरिकांकडून यासाठी कोणतेही शुल्क आकारले जाऊ नये, असे ते म्हणाले. कामठी, हिंगणा, नागपूर ग्रामस्थांचे अनधिकृत आराखडे नियमित करण्याचा संपूर्ण प्रस्तावही सज्ज असून सरकारद्वारे केवळ त्यावर शिक्कामोर्तब करणे आहे.

स्वबळावर सक्षमता सिद्ध करा: गडकरी

नागपूर:- केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी म्हणाले की, दहावीची परीक्षा ही जीवनातली अंतिम परीक्षा नसते. ही तर सुरुवात आहे, जीवन स्वतःच एक मोठी परीक्षा असते. आपल्या ज्ञानाच्या मदतीने आपली क्षमता सिद्ध करा. मनपातील गुणवंत विद्यार्थ्यांच्या सत्कार कार्यक्रमात ते बोलत होते. ते म्हणाले की, सामाजिक आणि आर्थिकदृष्ट्या कमकुवत कुटुंबातील मुले मनपाच्या शाळेत शिक्षण घेतात, परंतु हि सर्व मुले शिक्षणामध्ये मागे राहिली, हा समज मनपाच्या मुलांनी खोटा असल्याचे सिद्ध केले.

ते म्हणाले की, मनपा एज्युकेशन चेअरमन आणि अधिका-यांनी विद्यार्थ्यांसाठी राबविलेल्या विशेष कोचिंग पॅटर्नला विद्यार्थ्यांचे यश म्हणून पाहिले गेले आहे. दहावी बोर्डाच्या परीक्षेत गुणवत्तेत आलेल्या मनपाच्या 13 विद्यार्थ्यांचा त्यांनी याप्रसंगी सत्कार केला. यावेळी उपमहापौर मनीषा कोठे, विरोधी पक्षनेते संदीप जाधव, शिक्षण समिती सभापती दिलीप दिवे, उपसभापती प्रमोद तभाणे, दयाशंकर तिवारी, शिक्षणाधिकारी प्रीती मिश्रीकोटकर, नियंत्रण अधिकारी नितीन भोळे आदी उपस्थित होते.

इंग्लिश मीडियमचे आव्हान: सभापति दिवे म्हणाले की, मनपा शाळांची गुणवत्ता वाढविण्यासाठी त्यांचे कार्यकाळात शक्य तितके प्रयत्न केले गेले. 22 मनपा शाळांमधील शिक्षकांना वनामतीचे प्रशिक्षण देण्यात आले. दहावीच्या 100 मुलांना निवडण्यात आले व त्यांना विशेष प्रशिक्षण देण्यात आले ज्यामुळे मुले चांगल्या गुणांसह उत्तीर्ण झाली. ते म्हणाले की शहरातील गरीब मुलांसाठी प्रत्येक विधानसभा मतदार संघात इंग्रजी माध्यमाची शाळा सुरू करण्याचा प्रयत्न आहे. या संदर्भात निविदा प्रक्रियादेखील करण्यात आली आहे. कोविड19 मुळे ते काम रखडले आहे.

महापौरांना बनवले पॉजिटिव्ह? काय आहे सत्य, वाचा

सोशल मीडिया आजकाल माहितीचे आदानप्रदानाचे उत्तम स्थान झाले आहे, मात्र त्यावर येणाऱ्या सर्व वृत्तांची खात्री देता येईलच असे नाही. अगदी कालचेच उदाहरण घ्या, नागपूर नगरीचे महापौर संदीप जोशी काल स्वतःहून गृह विलगीकरणात गेले, पण त्याच वृत्ताची चिरफाड करत आज सर्वत्र त्यांच्याविषयी कोरोना पॉझिटिव्ह असल्याचा संदेश फॉरवर्ड होत सर्वत्र व्हायरल झाला.

यामुळे महापौर संदीप जोशी यांनी आत्ताच एक पत्र सोशल मीडिया व अन्य माध्यमांवर निर्गमित केले आहे, पत्रात सर्वप्रथम व्हायरल होत असलेल्या त्या फेक मेसेज चे तपशील वृत्त दिलेले आहे

“माझ्या असे निदर्शनास आले आहे की माझे संबंधीचा एक खोटा फेक मेसेज सर्व सोशल मीडियावर साइटवर वायरल होतो आहे, मेसेज चे वृत्त असे:

“परिस्थिती फार काळजीची आहे कोरोनाचा आपल्या दारापर्यंत शिरकाव झालेला आहे. काळजी घ्या, आपले महापौर संदीप जोशी हे कोरोना पॉझिटिव्ह आढळले आहेत.
काळजी घ्या घरी राहा,” असा तो मेसेज आहे

आपणास या प्रकारचा मेसेज आला असल्यास कृपया हा मेसेज फॉरवर्ड करू नये. माझ्याशी संबंधित हा मॅसेज पूर्णतः चुकीचा असून त्यात मी कोरोना पॉझिटिव असल्याचा उल्लेख आहे जो संपूर्णपणे खोटा व दिशाभूल करणारा आहे.

माझी प्रकृती एकदम ठणठणीत असून फक्त वैद्यकीय तज्ञांच्या सल्यानुसार दक्षता म्हणून मी स्वतःस सात दिवसासाठी गृह विलगीकरणात लोटले आहे.

अन्य सर्व अफवा पूर्णपणे निराधार आहेत, सर्वांना कळकळीची विनंती आहे की आपल्यापर्यंत येणारे वृत्ताची नेहमी शहानिशा, खात्री केल्यानंतरच तो मेसेज, वृत्त समोर फॉरवर्ड करावे, वृत्तांसाठी खात्रीपूर्ण माध्यमांवरच विश्वास ठेवावा.

आपणास वृत्त पाठवणाऱ्यास जर ते वृत्त निराधार असल्यास त्याविषयक जागृत करावे अथवा फॉरवर्डेड मेसेज डिलीट करण्याविषयची विनंती करावी.

कसल्याही माध्यमावर पोस्ट करण्यापूर्वी खात्री करणे ही सवय असणे अगदी उत्तम. पण वारंवार विनंती करूनही कोणी ऐकत नसेल आणि मेसेज मा-याचे कार्य सुरूच रहात असेल तर अशा व्यक्तीस रिपोर्ट करावे.

आपल्या शहरास कोरोणामुक्त तसेच अफवामुक्त बनवूया. नेहमीसाठीच ही उत्तम सवय लावून धरूया. एकत्र या व लढा द्या.
आपली काळजी घ्या व सर्वांची काळजी घ्या

घरातच विलगीकरण तर परिसरास कठडे कशाला? झलके

नागपुर:- कोरोनाबाधितांची वाढती संख्या बघता आता रूग्णालयात जागा नसल्याने घरीच उपचार करण्याचे नवे निर्देश राबवण्यात येत असले तरी शहरात तत्सम परिसर कठडे लाऊन सिल करण्यात येत होते, यात प्रशासनाचा लाखोंचा खर्च होतो शिवाय परिसरातील नागरिकांना दैनंदिन कामकाजासही अडथळा होतो. असा सवाल पिंटू झलके यांनी एका पत्रपरिषदेत केला.

आधीच मनपाकडे मनुष्यबळ नाही, प्रतिबंधित क्षेत्रात देखरेखीस पोलिस व ईतर कर्मचारी नसतात. अनेक प्रभागांत 15, 16 प्रतिबंधित क्षेत्र‌ झालेत पण देखरेख यंत्रणा नाही

मग हा अनावश्यक खर्च कशाला? असा सवाल अनेक नगरसेवक विचारत आहेत. असे ते म्हणाले. 24 जुलै रोजी महापौरांनी याविषयक बैठक घेतली त्यात प्रशासनाचे धोरणातील बदलाविषयक चर्चा झाली व नंतर 7 जुलै च्या नव्या परिपत्रकान्वये 17 रोजी नवे आदेश निर्गमित करण्यात आले, म्हणजे ईतके दिवस नागरिकांनी नाहक त्रास भोगला असल्याचे त्यांनी निदर्शनास आणून दिले

कंटेनमेंट बंद करा: प्रशासनाकडे मनुष्यबळाचा अभाव आहे, प्रतिबंधित क्षेत्रात पोलिसही नसतात तर मग अशा परिस्थितिंत एखादा परिसर कंटेनमेंट घोषित करूनही कुठला उपयोग नाही, यावर नाहक खर्च करन्यापेक्षा कंटेनमेंट प्रकियाच बंद करानी अशी भुमिका झलके यांनी मांडली.

मराठा आरक्षण मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए: राजस्व मंत्री थोरात

नागपुर:- राज्य के राजस्व मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने कहा है कि राज्य के महाविकास आघाडी (कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना) को स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ लड़ना चाहिए।

थोरात ने कलेक्टर कार्यालय में कोरोना की समीक्षा की। इसके बाद, पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि हालांकि कांग्रेस का विचार है कि आगामी नगरपालिका चुनाव आघाड़ी द्वारा संयुक्त रूप से लड़ा जाना चाहिए, पर इस संबंध में अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। अधिकारियों के विपक्षी नेताओं की बैठकों में भाग लेने की अनुमति नहीं देने के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जब फडणवीस मुख्यमंत्री थे तब यह आदेश जारी किया गया था। अब प्रशासन द्वारा केवल वह लागू किया जा रहा है। इसलिए उन्हें इस पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उप-समिति प्रमुख अशोक चव्हाण गंभीर नहीं हैं। राज्य सरकार अदालत में मराठा समुदाय का प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं करती है। किसी को बिना किसी कारण के मराठा आरक्षण के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। अशोक चव्हाण इस संबंध में अच्छा काम कर रहे हैं। बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। हमने देश के प्रतिष्ठित वकीलों को मैदान में उतारा है। इसलिए विनायक मेटे द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं।

मराठा मुद्दे पर माहोल दूषित करने की कोशिश के लिए आलोचना की। मराठा आरक्षण का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह परिणाम घोषित होने के बाद ही मराठा आरक्षण के अनुसार पद भरे जाएगे। थोरात ने कहा कि सारथी संस्था की जिम्मेदारी कांग्रेस के पास है और जल्द ही नए मंत्रि को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। राज्य के ऊर्जा मंत्री और नागपुर के जिला संरक्षक मंत्री नितिन राउत, खेल और पशुपालन मंत्री सुनील केदार, विधायक। विकास ठाकरे, राजू परवे, मंडल आयुक्त डॉ संजीव कुमार और जिला कलेक्टर रविंद्र ठाकरे इस समय उपस्थित थे।‌‌

रेत की चोरी रोकने में त्रुटियों को खत्म करेगी सरकार: बालू की चोरी रोकने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मंत्री खुद भी कार्रवाई कर सकते हैं। कुछ भी गलत होने पर जांच करेंगे। यदि कोई त्रुटियां हैं, तो उन्हें कलेक्टर द्वारा हटा दिया जाएगा, राजस्व मंत्री थोरात ने स्पष्ट किया।

कोरोना जांच की संख्या बढ़ने पर मरीजों की संख्या बढ़ी: कोरोना को जरूर हराएंगे, क्योंकि हमने धारावी जैसे क्षेत्रों को मुक्त कर दिखाया और यह विश्व स्तर पर माना गया। उसके बाद, नागपुर में मोमिनपुरा जैसे क्षेत्र भी नियंत्रण में हैं। महाराष्ट्र में अधिकांश कोरोना परीक्षण किए जा रहे हैं। इसलिए मरीज आगे आ रहे हैं। इससे बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

बिजली धारकों को राहत देने का प्रयास: कोरोना अवधि के दौरान बिजली के जादा बिलों से घिरे ग्राहकों को बिजली के बिलों में रियायत दी जानेपर विचार जारी है। उन्होंने कहा कि अगली कैबिनेट बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव लाया जाएगा।‌‌

स्मार्ट ॲक्शन प्लॅन तयार करा: पालकमंत्री राऊत

नागपूर:- शहरी व ग्रामीण भागात वाढलेली मृत्यू संख्या कमी करण्यावर भर देण्यात यावा असे सांगून राऊत म्हणाले की, लॉकडाउन हा पर्याय नसून नागरिकांनी स्वयंशिस्त पाळल्यास कोरोना नियंत्रणात येऊ शकतो.जूनच्या तुलनेत जुलै महिन्यात कोरोनाचा संसर्ग वाढला असून त्यावर नियंत्रण आणण्यासाठी स्मार्ट अॅक्शन प्लॅन तयार करण्याच्या सूचना पालकमंत्री डॉ. नितीन राऊत यांनी प्रशासनाला दिल्या.

साथीच्या काळासाठी खासगी एजन्सीमार्फत मनुष्यबळ उपलब्ध करून घ्यावे, असे पालकमंत्री म्हणाले. मात्र, संबंधित एजन्सीकडे स्वच्छतेसाठी लागणारी साधनसामुग्री असणे आवश्यक असल्याचे त्यांनी सांगितले. रुग्णांची संख्या वाढत असल्याने अतिरिक्त मनुष्यबळाची आवश्यकता भासत आहे. विशेषतः चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व सफाई कामगार मोठ्या प्रमाणात लागणार आहेत, असे डॉ. मित्रा यांनी सांगितले.

विभागीय आयुक्त कार्यालयात आज कोरोना आढावा बैठक घेण्यात आली. यावेळी विभागीय आयुक्त डॉ. संजीव कुमार, पोलिस आयुक्त डॉ. भूषणकुमार उपाध्याय, महापालिका आयुक्त तुकाराम मुंढे, जिल्हाधिकारी रवींद्र ठाकरे, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश कुंभेजकर, पोलिस अधीक्षक राकेश ओला, आरोग्य उपसंचालक डॉ. संजय जयस्वाल, मेडिकलचे अधिष्ठाता डॉ. सजल मित्रा, जिल्हा शल्य चिकित्सक डॉ. देवेंद्र पातूरकर व डॉ. दीपक सेलोकर उपस्थित होते.

उद्योग व्यवसाय नुकतेच रुळावर आले असून आता अर्थ चक्राला गती देण्याची वेळ असल्याचे पालकमंत्री म्हणाले.उपचारासाठी मेडिकलमध्ये येणाऱ्या प्रत्येक रुग्णाची अँटीजेन टेस्ट करण्याच्या सूचना पालकमंत्र्यांनी दिल्या. कोरोना विरुद्धच्या लढ्यात काही स्वयंसेवी संस्था स्वयंप्रेरणेने प्रशासनासोबत काम करण्यास तयार असून आजच्या बैठकीत याबाबत सादरीकरण करण्यात आले.

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