नागपुर पीठ ने दिए आदेश – कोरोना संक्रमितों के लिए जरूरी उपकरणों का जल्द ही इंतजाम किया जाए

दरअसल ऑक्सीजन सिलिंडर व वेंटिलेटर की पूरी उपलब्धता न होने के कारण उच्च न्यायालय की नागपुर खंड पीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि कोरोना के बढ़ते प्रसार के कारण संक्रमितों की संख्या भी बढ़ती जा रही है ऐसे में रोगियों को सही उपचार मिलना जरूरी है।और इसी संबधित विषय में हाई कोर्ट में कई दिनों से याचिका दर्ज थी। और गुरुवार को न्यायमूर्ति रवि देशपांडे व पुष्पा गनेरीवला के सामने सुनवाई हुई।
शहर के सरकारी तथा प्राइवेट हॉस्पिटल्स में वेटिलेटर व ऑक्सीजन सिलिंडर जैसे आवश्यक उपकरणों की कमी है साथ ही स्वस्थकर्मियों व आईसीयू बेड की भी कमी है। कोरोना मरीजों की दिन ब दिन बढ़ती संख्या के साथ आवश्यक उपकरणों का होना भी जरूरी है। किन्तु इन सभी उपचार जरूरी उपकरणों की कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए यहां वहां भटकना पड़ रहा है और ऐसे में इलाज की देरी के कारण उनकी जान का खतरा भी है।
इसी विषय में न्यायालय ने आदेश दिए है किं सभी जरूरी उपकरण के जल्द से जल्द इंतजाम किए जाएं ताकि मरीजों को सही व समय रहते उपचार मिल पाए।
मनपा आयुक्त व कोरोना निवारण टास्क फोर्स को भी निर्देशित भी किया और कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है के हर नागरिक को जरूरी उपचार मिले और इलाज के लिए उसे एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल में इलाज के लिए भटकना ना पड़े।
और इसी विषय को लेकर 15 सितंबर से लेकर रोज़ सुबह 10:30 बजे सबंधित सुनवाई निश्चित की है।

मुंढे ने कहा के – जीवन में सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं करूंगा।तुकाराम मुंढे का फिर हुआ ट्रांसफर

तुकाराम मुंडे का तबादला नागपुर के नगर आयुक्त के पद से मुम्बई जीवन प्राधिकरण में हुआ था।कोरोना से उभरने के बाद, मुंढे ने अभी तक प्राधिकरण के सचिव के पद को स्वीकार नहीं किया है जबकि अभी तक,राज्य सरकार ने उन्हें फिर से ट्रांसफर कर दिया।
तुकाराम मुंढे को मुंबई जीवन प्राधिकरण प्रधान का प्रभार दिया गया था।राज्य सरकार ने कहा है कि यहां शामिल न हों।राज्य सरकार ने आज इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।प्रदीप चंद्रा को प्रबंध निदेशक, महाराष्ट्र राज्य खनन निगम नागपुर और ई रबींद्रन को बिक्री कर आयुक्त, बिक्री कर विभाग, मुंबई के रूप में नियुक्त किया गया है।
फिलहाल तुकाराम मुंढे को कौन सा पद मिलेगा, इसकी घोषणा नहीं की गई है।वे उत्सुक हैं कि अब उन्हें क्या जिम्मेदारी दी जाएगी। तुकाराम मुंढे का नागपुर में कार्यकाल भी विवादास्पद रहा। जनप्रतिनिधियों ने लगातार उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था।तानाशाह ’के रूप में भी उनकी आलोचना हुई।दूसरी ओर, मुंढे ने कोरोना संक्रमण के शुरुआती चरणों में तत्काल कदम उठाए थे।उसी के चलते  परिणामस्वरूप, पहले चार महीनों के लिए नागपुर में कोरोना संक्रमण नियंत्रण में था।
मैंने पिछले कुछ वर्षों में अपनी आक्रामकता को कम किया है,अपने स्वभाव पर अंकुश लगाया है, लेकिन चाहे मैं कितना भी बदलाव करूं, मैं जीवन में सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं करूंगा।
हर दिन मेरे खिलाफ, व्यवस्थित रूप से मुझे निशाना बनाने के आरोप लगाए जा रहे थे। इससे छुटकारा पाने में मुझे साढ़े चार महीने लगे। ऐसा क्यों किया गया? इसमें बीजेपी के लोग थे या कोई और आप बताएं कि और कौन करेगा ये सब ??
तुकाराम मुंढे को नगर आयुक्त के पद से हटाने के पीछे स्मार्ट सिटी परियोजना और उस संभालने की जिद के चलते यह प्रयास एक बड़ा कारण रहा है। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और नागपुर के सांसद नितिन गडकरी ने जिस तरह से मुंढे के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को संभालने की कोशिश की, उससे वह नाराज थे।
एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि मुंढे ने नागपुर नगर आयुक्त के रूप में पदभार संभाला है, इसलिए उन्होंने अन्य अधिकारियों की गिनती नहीं की है, यहां तक कि राजनीतिक नेताओं ने भी नहीं। उन्होंने ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जिसमें सभी राजनीतिक नेता भ्रष्ट हैं और वे खुद जनता के हित में काम कर रहे हैं। वे नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए काम कर रहे हैं। उसकी जिद से अधिकारी भी हैरान थे। यही नहीं, यह डिवीजनल कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर की मीटिंग भी है

ट्रॉमा सेंटरसाठी अतिरिक्त ऑक्सिजन प्लांट मंजूर: 3 आठवड्यांत तयार होईल सेटअप

नागपूर: कोरोना रूग्णांच्या संख्येत वाढ झाल्याने रूग्णालयांत ऑक्सिजनची मागणीही झपाट्याने वाढली आहे. यामुळेच आता वैद्यकीय प्रशासनाने ट्रॉमा केअर सेंटरमध्ये नवीन लिक्विड ऑक्सिजन प्लांट बसविण्यास जिल्हा दंडाधिका-यांना प्रस्ताव दिला असून त्याला मान्यता देण्यात आली आहे. सुमारे 3 आठवड्यांत एक नवीन प्लांट स्थापित केला जाईल. यामुळे कोरोना रूग्णांसाठी पुरेश्या ऑक्सिजनची उपलब्धता राहिल.

गेल्या काही दिवसांपासून मेडिकलसह अन्य सरकारी रुग्णालयांत ऑक्सिजनची मागणी व पुरवठा वाढला आहे. कोरोना रूग्णांमध्ये वेगवान दराने ऑक्सिजनची पातळी कमी होते. या अवस्थेत त्याला मोठ्या प्रमाणात बाह्य ऑक्सिजनची आवश्यकता असते. सर्वसाधारणपणे, आजकाल एका गंभीर रुग्णास दिवसातून दोन ते तीन वेळा ऑक्सिजनची गरज पडत आहे. कोविड रुग्णालयात सध्या ऑक्सिजनची कमतरता नाही, परंतु अन्य प्रभागात दाखल झालेल्या रूग्णांना ऑक्सिजनची समस्या निर्माण होत आहे. यामुळेच वैद्यकीय प्रशासनाने कोविडच्या रूग्णांसाठी मेयोमध्ये 30 खाटांची व्यवस्था केली आहे. मेयोमध्ये तयार झालेल्या या वॉर्डात वैद्यकीय डॉक्टरांसह कर्मचारी आपली सेवा देत आहेत. वैद्यकीय यंत्रणेत ही यंत्रणा सामान्य होताच. त्या रूग्णांना वेगवेगळ्या वैद्यकीय वॉर्डात हलविण्यात येईल.

पॉइंट्स वाढवल्याने दबाव घटला: मेडिकल येथे ऑक्सिजनच्या सुमारे 350 पॉइंट्सची वाढ केली आहे. यामुळे इतर वार्डात दाखल झालेल्या रुग्णांना ऑक्सिजनचा कमी दाब मिळत आहे. याची तपासणी केल्यावर असे आढळले की ऑक्सिजन प्लांटमध्ये बर्फाचे कवच तयार होते. वापर वाढल्यामुळे बर्‍याचदा ही समस्या उद्भवते. बर्फ वितळण्यासाठी या पाईपवर सध्या पाण्याने फवारणी केली जात आहे. परंतु येत्या काही दिवसांत अखंड पाण्याचे फवारणी यंत्र बसविण्यात येणार आहे. संध्या यामुळे रुग्णांना एका प्रभागातून दुसर्‍या वॉर्डात हलविण्यात येत आहे.

ऑक्सिजनच्या कमतरतेमुळे जुने लिक्विड सिलिंडर बसविण्याचा निर्णय घेण्यात आला. कामही सुरू झाले, परंतु पावसाचे पाणी साचले. रस्ता तयार करण्यासाठी जेसीबी बोलविण्यात आले. रस्ता तयार करताना जेसीबीमुळे पाइपलाइन तिरपी झाली. आता त्यात सुधारणा करण्याचे काम सुरू आहे. हे 1-2 दिवसात केले जाईल. हेच कारण आहे की आता रूग्णांना मनपाकडून मेडिकलमध्ये दाखल करण्यासाठी येत असलेल्यांना मेयोमध्ये तयार केलेल्या कोविड वॉर्डात जाण्यास सांगितले जात आहे. येथे वैद्यकीय डॉक्टर, नर्स सेवा देत आहेत.

4127 लोकांस दंड, मास्क न घालणा-यांवर कारवाई सुरूच

नागपूर: कोरोना विषाणूचा संसर्ग रोखण्यासाठी पोलिस विभागाने कडक पावले उचलली आहेत. घराबाहेर पडलेल्या प्रत्येक व्यक्तीने तोंडावर मास्क घालणे अनिवार्य आहे. असे असूनही, लोक स्वत:च्या व इतरांच्या आयुष्यासह खेळत आहेत. कोरोना संक्रमित लोकांची संख्या नागपूरात सतत वाढत आहे. म्हणूनच मास्क परिधान न करणार्‍यांवर कठोर कारवाईचे आदेश नवे सीपी अमितेश कुमार यांनी पोलिस विभागाला दिले आहेत. मंगळवारी पोलिसांनी यास्तवची विशेष मोहीम सुरू केली आणि 4975 लोकांवर कारवाई केली.

ही कारवाई बुधवारीही सुरू राहिली. सर्व प्रमुख मार्गांवर पोलिस बंदोबस्त तैनात करण्यात आला होता. पोलिस स्टेशन स्तरावर 3042 लोकांना अटक करण्यात आली होती, तर 1085 लोकांना वाहतूक विभागाने चालान केले. एकूण 4127 जणांवर पोलिसांनी कारवाई केली. या लोकांकडून नियमांचे उल्लंघन केल्याबद्दल 7 लाख रुपयांचा दंड आकारण्यात आला. सदर कारवाई सलग सुरू ठेवण्याचे आदेश सीपींनी विभागाला दिले आहेत. घराबाहेर पडताना वाहनचालकांना मास्क व हेल्मेट घालणे बंधनकारक आहे. कारमध्येही लोक जात असतील तर त्यांना मुखवटे घालावे लागेल.

नागपुर की गंभीर कोवीड समस्या के संबंध में विधायक विकास ठाकरे की उपमुख्यमंत्री को अर्जी

नागपुर: मुंबई में दो-दिवसीय मानसून अधिवेशन चल रहा है। पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे भी मुंबई में हैं। ऐसे में उन्होंने नागपूर में बनी कोविड की गंभीर आरोग्य स्थिति, बढ़ती मृत्यु और फेल प्रशासन पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ज्ञापन सौंपा और मुंबई के समान तत्काल जंबो कोविड उपचार प्रणाली स्थापित करने का अनुरोध किया।

सितंबर के पहले ही सप्ताह में, नागपुर में कोरोना प्रकोप उग्र हो गया और पिछले सात दिनों में, 11,477 लोगों मे कोरोना संक्रमण हुआ है। इसी अवधि में, 320 लोग मारे गए। आंकड़े बताते हैं कि नागपुर में कोरोना तेजी से बढ़ा है। अकेले सितंबर के पहले सप्ताह, संक्रमित रोगियों की संख्या में पिछले तीन महीनों की तुलना में सात गुना बढी हुई है। 7 सितंबर तक, कुल 41,032 मरीज पंजीकृत किए गए और 1,365 लोगों की मृत्यु कोरोना के कारण हुई। 6 सितंबर को एक ही दिन में 54 संक्रमित लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि 7 सितंबर को 50 संक्रमित लोगों की मृत्यु हो गई, यह ज्ञापन में कहा गया है।‌‌

नागपुर शहर में, स्थिति विकट है और सरकार के लिए नागरिकों के जीवन को बचाने के लिए ध्यान देना और धन उपलब्ध कराना अत्यावश्यक है। यह दुख की बात है कि मरीजों को बेड नहीं मिलते हैं। सरकारी तीनो अस्पताल पर ग्रामीण का भी भार है, निजी अस्पतालों की भी यही स्थिति है और उनके पास कुछ भी कुछ ही बेड के साथ ऑक्सीजन और वेंटीलेटर की सुविधा है। इसके अलावा, नागपुर में आम आदमी निजी अस्पताल के लिए लाखों रुपये के बिल का भुगतान करने में पूरी तरह से असमर्थ है।

परिणामस्वरूप, महात्मा फुले जीवनदायी योजना को जल्द से जल्द आम और गरीब परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करनी चाहिए। कई शिकायतें हैं कि जिन रोगियों ने स्वास्थ्य बीमा करवाया है, उन्हें कई निजी अस्पतालों द्वारा स्वास्थ्य बीमा से वंचित कर दिया गया है। पहले राशि जमा करवाने मजबूर किया जा रहा है, इस बारे में नोटिस तुरंत जारी किया जाना चाहिए, यह भी उन्होंने ज्ञापन में में कहा है।

मुंबई की तरह ही, MMRD की मदद से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में सभी सुविधाओं के साथ एक जंबो अस्पताल शुरू किया गया। नागपुर में भी उसी तर्ज पर जल्द से जल्द एक जंबो अस्पताल शुरू किया जाना चाहिए। इससे कई लोगों की जान बच जाएगी। पिछले आयुक्त मुंढे ने ऐसे केंद्र की स्थापना का दावा किया गया था लेकिन अब तक नागपुर में मरीजों को एक भी बिस्तर उपलब्ध नहीं कराया गया है।‌‌ इसके अलावा, यह क्षेत्र नागपुर से 25 किमी दूर है। इस स्थान पर चिकित्सा अधिकारी, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन आदि जैसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

नागपुर के लोग डरे हुए हैं। गंभीर रूप से बीमार चल रहे कोविड मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलता है। कोई भी निजी अस्पताल उन्हें स्वीकार नहीं करता है। प्रत्येक मरीज को गंभीर स्थिति में 5-5 निजी अस्पतालों में भटकना पड़ता है। नागपुर के लोग बेहद पीड़ित हैं और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

कोरोनावायरस का पहला मामला 11 मार्च को नागपुर में पाया गया था। इसके अलावा, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने पहले सितंबर में सुझाव दिया था कि नागपुर में कोविड के रोगियों की संख्या 10,000 तक जा सकती है, लेकिन पिछले छह महीनों में स्थानीय निकायों द्वारा कोई भी प्रभावी उपाय नहीं किए गए हैं। नागपुर में, सरकारी और निजी अस्पतालों में केवल 3,078 बिस्तर उपलब्ध हैं, जबकि रोगियों की संख्या 11,477 तक पहुंच गई है।‌‌ संभव संकट पता होते भी प्रशासन की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं किया गया।

स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ निगम अधिकारी सिविक सुविधाओं जैसे कि सीमेंट रोड, गडर चेंबर, शॉपिंग मॉल खोलने आदि के काम में शामिल रहे। नागपूर में पांच मनपा अस्पताल में 450 बेड होकर भी एक भी कोविड पेशंट यहां भरती नहीं किया गया, चूंकि इन अस्पतालों में कोई डॉक्टर या चिकित्सा कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए इन अस्पतालों का नागपुर के लोगों के लिए कोई फायदा नहीं है। उधर दुसरी ओर बेड नही इसलिए जाने जा रहीं हैं।

नागपुर महाराष्ट्र की उप-राजधानी है, ऐसा होकर भी स्वास्थ्य सुविधाएं उक्त तरह की नहीं, तो मुंबई ही की तरह यहां पर भी तुरंत जंबो हॉस्पिटल बनाए जाने पर सरकार तुरंत मदद करे यह मांग इस ज्ञापन द्वारा उन्होंने की।

ऑनलाईन ॲपवर सुरू देहविक्रीचा भंडाफोड: गुन्हे शाखेची कारवाई

नागपूर: इंटरनेटच्या सहाय्याने चालणारे अँड्रॉइड फोन ॲपवर मुली पुरवण्यासाठीची असलेली एक अॅप गुन्हे शाखा पोलिसांचे रडारवर आली, याद्वारे व्हायरल होत असलेल्या एका मेसेजचा तपास करत व दिलेल्या यावरील नंबर वर संपर्क साधत या संपूर्ण यंत्रणेचाच भंडाफोड करत गुन्हे शाखेने सर्व संबंधितांना अटक केली आहे. मनीष नगरातील पुरुषोत्तम बाजार येथे या अॅपचे ऑफिस कार्यरत होते.

मनीष नगरातील वर्दळीच्या ठिकाणी असणारे सुपर बाजारातील इमारतीचा या कार्यालयाने वापर केला, बिनबोभाट बेकायदा कृत्य आरोपी चालवत होते. गुन्हे शाखेने आज धाड टाकून उपस्थितांना व संबंधितांना अटक केली आहे.
परराज्यातील दोन मुली व एजंट म्हणून काम करणारे तीन असे ताबडतोब या स्थळावरून अटक करण्यात आली.

दोन आरोपी अहमदनगर येथील रहिवासी असून तिसरा नागपूरचा स्थानिक यांना मदत करायचा, अटक केलेल्या तीनही गुन्हेगारांचा आधीचा रेकॉर्ड अशाच बेकायदा कारवाई करण्यात गुंतलेला असलेला आढळला आहे आणि या टोळीचा म्होरक्या सुद्धा अहमदनगरचाच असून चौकशीत त्याचाही रेकॉर्ड अशाच कारवायांत गुंतलेला आढळतो, त्याबाबतचा तपास सुरू असल्याची माहिती सामाजिक गुन्हे अन्वेषण विभागाच्या पोलीस प्रवक्त्यामार्फत देण्यात आली.

तंत्रज्ञान हे जसं वरदान आहे तसेच अपराध करणाऱ्यांसाठी सुलभ भांडारच, याच्या साह्याने सकारात्मक कामे केली जातात तशीच आपराधिक वृत्तीचे व्यक्तिंनाही तंत्रज्ञानाशी जवळीक करावीशी वाटते पण नुकतेच नागपूरास लाभलेले नवनियुक्त पोलीस आयुक्त अमितेश कुमार हे तंत्रज्ञान व सायबर गुन्हे याच विषयात पारंगत आहे आणि चारच दिवसांपूर्वी नेमके त्यांनी पांढरपोष गुन्हेगारांवर आता करडी नजर असण्याबाबतचेच वक्तव्य केले होते, अशातच हा तंत्रज्ञानाचे साह्याने चालू असलेला गुन्हा आज उघडकीस आला आहे, त्यामुळे नागपूर वासियात नव्या पोलिस आयुक्तांच्या त्या विधानाची चर्चा रंगत आहे.

मुंबई नागपुर हाई स्पीड रेलवे कोरिडोर के लिए सरकार ने दिया निविदा आमंत्रण, 7 मार्ग है प्रस्तावित

रेलवे द्वारा सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन को सौंपा गया है।
सरकार ने मुंबई से नागपुर तक 741 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने के लिए व एक सर्वेक्षण करने के लिए निविदाएं आमंत्रित कीं।यह हाई स्पीड रेल कॉरिडोर महाराष्ट्र के नासिक से भी गुजरेगा।
प्रस्तावित मुंबई-नासिक-नागपुर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ सर्वेक्षण, ओवरहेड, ओवरग्राउंड, भूमिगत उपयोगिताओं की पहचान और सबस्टेशन के लिए पावर सोर्सिंग विकल्पों की पहचान ’के लिए निविदा जारी की गई है।
राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने अपनी वित्तीय व्यवहार्यता और अनुमानित यातायात को आकर्षित करने के लिए सात अन्य संभावित उच्च गति  पर व्यवहार्यता अध्ययन भी शुरू कर दिया है। भारतीय रेलवे यह पता लगा रहा है कि क्या गलियारे 300 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति वाली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन चलाने के लिए व्यवहार्य होंगे।
सात प्रस्तावित मार्ग दिल्ली-वाराणसी (865 किमी) वाराणसी-हावड़ा (760 किमी), दिल्ली-अहमदाबाद, मुंबई-नागपुर (741 किमी), मुंबई-हैदराबाद (711 किमी), चेन्नई-मैसूर (435 किमी) और दिल्ली हैं। अमृतसर (459 किमी)।
( Image is the just used for representation )
एनएचएसआरसीएल ने दिल्ली-जयपुर-उदयपुर-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी एचएसआर कॉरिडोर के लिए डेटा संग्रह से संबंधित निविदाएं मंगाई हैं।
886 किमी लंबी दिल्ली-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना राजस्थान के जयपुर और उदयपुर से होकर गुजरेगी।
एनएचएसआरसीएल के प्रवक्ता ने कहा, “जैसा कि उल्लेख किया गया है कि मार्गों की लंबाई अस्थायी है और वास्तविक सर्वेक्षण के अनुसार बदल सकती है।”
रेलवे द्वारा सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन  को सौंपा गया है।
राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने अपनी वित्तीय व्यवहार्यता और अनुमानित यातायात को आकर्षित करने के लिए सात अन्य संभावित उच्च गति मार्गों पर व्यवहार्यता अध्ययन भी शुरू कर दिया है। भारतीय रेलवे यह पता लगा रहा है कि क्या मार्ग 300 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति वाली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन चलाने के लिए कुशल साबित होंगे।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ वीके सिंह ने कहा –
अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की समयावधि को कोरोना संक्रमण के फैलाव के कारण फिर से शुरू करने की आवश्यकता होगी, लेकिन इसके पूरा होने की वास्तविक समय सीमा अगले तीन से छह महीनों के भीतर ही प्रदान की जा सकती है,
रेलवे के अनुसार, इस परियोजना के लिए अब तक 63 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है।
भारतीय रुपये और जापानी येन के बीच एक चौड़ी खाई के कारण परियोजना को भूमि मालिकों द्वारा विरोध से लेकर बढ़ती लागत तक के मुद्दों के साथ संघर्ष करना पड़ा है; परियोजना में किसी प्रकार की आर्थिक तंगी ना हो इसके लिए आवश्यक 1 ट्रिलियन रुपये का 80 प्रतिशत जापान के 20 वर्षीय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) के ऋण से आएगा।

नागपुर संभाग के लगभग 10 जलाशयों का जल रिकॉर्ड स्तर पर 90 प्रतिशत तक बढ़ा

नागपुर : पिछली साल की अपेक्षा इस बार जून से अगस्त में हुई अच्छी मानसून ने नागपुर मंडल के सभी प्रमुख जलाशयों का जल स्तर रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दिया है।
अगर बात करें टोटलाडोह बांध की तो यह नागपुर शहर की जीवन रेखा की तरह है, इस बांध में 95.25 प्रतिशत पानी का भंडार है और स्थानीय शासन का मानना है कि जलाशय में स्टॉक कम से कम दो साल के लिए नागपुर शहर की पानी की मांग को पूरा कर सकता है।
संभाग के 16 प्रमुख बांधों में से दस में पानी का स्टॉक 90 प्रतिशत से अधिक है, जो इस क्षेत्र के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। 2019 में 16 में से केवल पांच बांधों का जल स्तर 90 प्रतिशत से अधिक था। भंडारा जिले के बावनथड़ी में मंगलवार को कुल जल स्तर 92.75 प्रतिशत है, जबकि गढ़चिरौली में दीना बांध में 92.07 प्रतिशत जल भंडार है।
बात करें पिछले साल की तो इस तारीख में टोटलाडोह बांध में 65.95 प्रतिशत जल स्तर था।नागपुर जिले के कैम्पटी खैरी (99.53%) का भी लगभग पूरा स्टॉक है। 2019 में, कैम्पटी खैरी में 8 सितंबर को सिर्फ 38.43 प्रतिशत पानी का स्टॉक था।
असोलामन्धा जो कि चंद्रपुर जिले का एकमात्र प्रमुख बांध है, में पानी का स्टॉक 87.49 प्रतिशत है और यह कम से कम कुछ वर्षों के लिए जिले की पानी की माँग को पूरा करने में सक्षम है। गोसीखुर्द जलाशय जो भंडारा जिले की एक प्रमुख परियोजना है, में पानी का भंडार 48.71 प्रतिशत है।लोअर वर्धा (91.21%) और वर्धा जिले के बोर (89.39%) में भी मौसम का सबसे अच्छा जल स्तर है।
पूर्वी विदर्भ में पेंच और कन्हान नदियों में भी भारी वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति का सामना करना पड़ा।
अगस्त के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश और पूर्वी विदर्भ में भारी बारिश के कारण नागपुर डिवीजन के प्रमुख बांधों में जल स्तर में भारी वृद्धि हुई।
मानसून के तीन महीने खत्म हो गए लेकिन अभी भी एक महीना बाकी है और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस महीने के दौरान और ज्यादा बारिश होने की संभावनाएं जताई है।

हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने जताई चिंता -शहरी भारत से तेजी से ’गायब हो रहे’ ग्रीन कवर

बॉम्बे हाईकोर्ट की एक नागपुर पीठ ने मंगलवार को शहरी भारत से तेजी से ’गायब हो रहे’ ग्रीन कवर और खुले स्थानों के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि शहर तेजी से कंक्रीट के जंगल बन रहे हैं, जबकि इसे नागपुर नगर निगम द्वारा एक पार्क का व्यवसायीकरण करने के लिए एक टेंडर से निकला गया।

बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ नागपुर में एक सार्वजनिक पार्क के व्यावसायीकरण के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।न्यायमूर्ति सुनील स्क्वायर और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि हर साल दर साल और हर नई जनगणना के साथ, डेटा का अनुमान है कि अधिक से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में रह रही है, क्योंकि शहर भविष्य के आर्थिक इंजन बन जाते हैं।

शहरों में हरित आवरण में तेजी से कमी के कारण पीठ ने कहा कि शहरों में कॉलोनियों की गलियों और गलियों में आबादी इतनी अधिक है कि लोगों को आराम करने की जगह नहीं मिलती है।पीठ ने पार्क और उद्यानों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर आवश्यकता व्यक्त की, नागरिक हित याचिका दायर करते हुए, नागरिक कार्रवाई गिल्ड फाउंडेशन, नागपुर द्वारा दायर की गई।

पीठ ने आगे यह भी कहा कि शहर तेजी से कंक्रीट के जंगल बनते जा रहे हैं, क्योंकि हरे भरे क्षेत्र आश्चर्यजनक रूप से तेज़ी से गायब होने लगे हैं और अब बच्चों को अपने घरों से बाहर खेलने और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करने के लिए मुश्किल से ही अवसर मिलते हैं।

जनहित याचिका में, गैर-लाभकारी संगठन ने बच्चों  के पार्क को बनाए रखने के लिए ठेकेदार नियुक्त करने के लिए नागपुर नगर निगम द्वारा जुलाई 2020 में जारी निविदा की वैधता पर सवाल उठाया।यह विशेष रूप से निविदा में खंडों से प्रभावित था जिसने ठेकेदार के खेल परिसर, स्विमिंग पूल, रेस्तरां आदि की स्थापना करके खुली जगह का व्यवसायीकरण करने की अनुमति दी थी।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता निकाय की ओर से दी गई दलीलों को स्वीकार कर लिया कि पार्क में पहले से किया गया विकास अनधिकृत था, और नागरिक निकाय को निविदा के साथ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।पीठ ने कहा और निविदा पर प्रहार किया-“इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि पार्क व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, तो यह उस उद्देश्य को निराश कर सकता है जिसके लिए उक्त खुली जगह को अंतिम विकास योजना में आरक्षित किया गया है,”

कोर्ट ने नागपुर नगर निगम को यह भी निर्देश दिया है कि यदि अब तक किए गए निर्माण कार्य विकास नियंत्रण नियमों और खुले और हरे स्थानों की सुरक्षा की व्यापक आवश्यकता के अनुरूप हैं एक बार चेक किए जाएं

मास्क व हेलमेट न पहनने पर हो रही है कार्यवाही , पहले दिन वसूला गया 13,21,480 रुपए का दण्ड

शहर में कोरोना ने उग्र रूप ले लिया है दिनों दिन मामले बढ़ते जा रहे हैं साथ है मृत्यु दर भी बढ़ रही है। इसी विषय की चर्चा के लिए महापौर जोशी , आयुक्त राधाकृष्णन बी व पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने की बैठक।
इसके साथ ही मंगलवार को पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने भी अपनी विभागीय मीटिंग की और गाड़ी चलाते वक्त मास्क व हेलमेट न पहनने वालों पर दंडात्मक कार्यवाही करने का फैसला किया।
उसी के अनुसार आज सुबह से हेलमेट न पहनने वाले सवारों पर कार्यवाही की जा रही है। कल्मना सहित शहर के बहुत से थानों ने लगभग हर सिंगनल पर बिना हेलमेट से चल रहे लोगों पर कार्यवाही की।
कल दिन भर चली इस प्रक्रिया में 1,784 मामले दर्ज किए गए साथ ही कुल 3 लाख 96 हजार 80 रुपए तक का दण्ड वसूला गया और शहर के परिवहन विभाग में लगभग 2 हजार 122 प्रकरण दर्ज किए गए जिसमें 9 लाख 25 हजार 400 रुपए का दण्ड वसूला गया । दोनों कार्यवाहियों का कुल किया जाए तो लगभग 13 लाख 21 हजार 480 रुपए का दण्ड वसूला गया ।
पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा के यदि आप कार्यवाही से बचना चाहते हैं तो हेलमेट पहनिए और वाहनों में सुरक्षित अंतर रखिए । और साथ ही जनता से आवाहन किया के परिवहन नियमों का सुरक्षा नियमों का पालन करें जिससे आप सुरक्षित भी रहेंगे और कड़ी कार्रवाई से भी बचेंगे।
इसके साथ ही नागपुर मनपा के उपद्रव शोधक विभाग ने 649 नागरिकों पर कार्यवाही की। 5 दिन की कार्यवाही में विभाग ने कुल 3,57,000 दंड वसूला ।
इस तरह की कार्यवाही लक्ष्मीनगर , धतोली, धरमपेठ, आशिनगर , लकड़गंज ,हनुमाननगर , सतरांजीपुरा , गांधीबाग , नेहरू नगर आदि इलाकों में हुई
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